डॉ. मनोज मिश्र जी ने अपने चिट्ठे मा पलायनम में जौनपुर के इतिहास के बारे में किश्तों में एक आलेख लिखा था जिसे हम इतिहास में रूचि रखने वालों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समझते हैं. शीर्षक बड़ा ही सुन्दर था “ये पार जौनपुर, ओ पार जौनपुर” (इस पार भी जौनपुर उस पार भी जौनपुर). क्योंकि गोमती नदी के दोनों और बसावट है. इस लेख को पढ़कर हमें मालूम हुआ कि हमारे पास जौनपुर के दो चार सिक्के जो संग्रहीत हैं, उनमे कितना इतिहास छिपा है. उनके चित्र हम नीचे दे रहे हैं.
इब्राहीम शाह





मार्च 24, 2012 को 6:52 पूर्वाह्न पर
अभी भी संग्रहलायों में ये पर्याप्तता से दिखायी पड़ जाते हैं।
मार्च 24, 2012 को 7:47 पूर्वाह्न पर
जरुर आपने आपने इस सिक्काप्रेमी सनक के चलते जौनपुर के इतिहास और किले पर डाका डाला है
इतिहास का यह प्रामाणिक दस्तावेज कृपया किसी प्रतिष्टित और भरोसेमंद संग्रहालय में दान करें !
मार्च 24, 2012 को 8:07 पूर्वाह्न पर
अरे आप तो यह शौक भी रखते हैं
मार्च 24, 2012 को 8:14 पूर्वाह्न पर
हमारे लिए तो फारसी…, हां! ग्राफ पेपर पर चित्र लेने का आइडिया अच्छा लगा, सिक्कों के आकार का ठीक-ठीक अंदाज हो पा रहा है.
मार्च 24, 2012 को 10:14 पूर्वाह्न पर
@राहुल जी:
यह पोस्ट तो ड्राफ्ट ही था. बहुत कुछ करना था लेकिन कल कम्पूटर से लोग आउट नहीं हो पाया था और पुत्र ने क्या किया होगा नहीं मालूम. प्रकाशित हो गया और तब पता चला जब मेल पर प्रतिक्रियाएं आने लगीं. वैसे ग्राफ पर सिक्कों को रख कर चित्र लेना उत्तम लगा क्योंकि स्केल को बगल में रखने से बड़ा भद्दा लगता है.
मार्च 24, 2012 को 10:19 पूर्वाह्न पर
डा. अरविन्द मिश्रा:
अगली बार जब भी आप भोपाल आयें तो इन सिक्कों को ले जाएँ और जौनपुर के ही संग्रहालय में रखवा दें. मुझे बड़ी प्रसन्नता होगी.
मार्च 24, 2012 को 4:43 अपराह्न पर
अरे कोई इतिहास के इस प्रामाणिक दस्तावेज को पढ़के भी तो बताये ! या फिर संग्रहालय में जमा करने की धुनक में लगे रहियेगा
मार्च 24, 2012 को 11:43 अपराह्न पर
इस माले में मैं तो केवल ‘चाक्षुष सुख’ तक ही सीमित हूँ।
मार्च 25, 2012 को 8:08 पूर्वाह्न पर
@ जी ,मनोज को कहता हूँ!
मार्च 25, 2012 को 12:18 अपराह्न पर
wow this is great stuff u have…
I was thinking how on earth u got those snaps, coz every time I went to a museaum they never allow u to take pictures
Awesome read about these historical coins
n they look great !!
मार्च 25, 2012 को 2:54 अपराह्न पर
ग्राफ पेपर पर चित्र खींचने का विचार बहुत अच्छा लगा. आपसे अनुरोध है कि आप जो कुछ इस पोस्ट पर लिखना चाहते थे और इसके असमय हे पब्लिश हो जाने के कारण लिख नहीं पाए, कृपया उसको एक अन्य पोस्ट बना कर अवश्य लिखें. हमको उससे वंचित न रखें
मार्च 25, 2012 को 3:17 अपराह्न पर
wow!
मार्च 28, 2012 को 11:03 अपराह्न पर
jaunpur ke itihas se mithila ka itihas…khas kar mahakavi vidyapati ka itihas jura hai.kripya sikke per likhe text ka deonagari me batayen.
ishwar karun,
chennai
मार्च 29, 2012 को 2:20 अपराह्न पर
नमस्ते अंकल,
इसी तरह के पोस्ट सच में उपयोगी है …. जैसे आपसे बात हुयी थी बहुत लोगो के पास पुराने सिक्के या कुछ वस्तुए होती है पर बस पुराणी वस्तु है करके रखी रहती है पर आप जैसे जानकर को दिखाई जाये तो उसके मोल और इतिहास पता चले!
regards
मार्च 30, 2012 को 5:10 अपराह्न पर
हर पोस्ट आपका एक नया पहलू उजागर करती है । कमाल के चित्र हैं सिक्कों के । वैसे जौनपुर मैं भी गई हूं एक बार ।
जुलाई 22, 2012 को 12:22 अपराह्न पर
Glad to see your coin collection, I too collect stamps, coins and banknotes.