एक चिड़िया … अनेक चिड़ियाँ

आजकल के टीवी कार्यक्रमों को देख जो कष्ट होता है इसका उल्लेख श्री अनिल पुसदकर जी ने अपने एक पोस्ट में किया था. देखिए और सुनिए एक संदेश को जो दूरदर्शन के प्रारंभिक काल में दिखाई जाती थी. आज भी इस वीडियो में निहित संदेश की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता.

12 Responses to “एक चिड़िया … अनेक चिड़ियाँ”

  1. anil pusadkar Says:

    सच कहा सुब्र्हमणियम साब आपने।दूरदर्शन जब सरकारी था तब हम इसे भले ही इडियट बाक्स कहते रहे हों,मगर वो तब असरकारी था।उसके विग्यापानों मे भी संदेश होते थे। अब निजीकरन की दौड मे तो सब कुछ बदल गया है जैसे।लड्का डियो लगता है लडकी चिपक जाती है और तो और बन्दर भी अन्डवियर का विग्यापन करते नज़र आते है,उससे बन्दरिया लिप्स्टिक लगा कर चिपकति नज़र आती है।ये तो स्तर है कमर्शियल्स का सीरियल्स का तो भग्वान ही मालिक है। आपको बहुत-बहुत बधाई ऐसे दौर मे एकता का पाठ पढाने वाली चिडीया की याद दिलाने के लिये।वैसे मल्हार मेरे शहर के पास एक पुरातात्विक महत्व की साइट है। आपक मल्हार वही से तो नही?

  2. jitendra bhagat Says:

    आपको यह जानकर अच्‍छा लगेगा कि‍ मेरा 19 महि‍ने का बेटा इसे देखते हुए ही खाता-पीता है। मैंने पी.सी में यह पहले से ही सुरक्षि‍त रख लि‍या था।
    आपको याद होगा इसी तरह का एक और कार्यक्रम था, जि‍समें एक कमजोर आदमी रेंगता हुआ आता है, चलता-चलता हड्डी में तब्‍दील होने लगता है, उसे सेब मि‍लता है, और उसे खाते ही वह ठीक होने लगता है। फि‍र बादल पकड़ने की कोशि‍श… बाकि की स्‍मृति‍यॉं धूमि‍ल हैं।
    अगर आपके पास ये शि‍क्षाप्रद कार्टून हो तो जरूर पोस्‍ट करें कभी।

  3. limit Says:

    ” well have seen and heard this video earlier also on some blog….. or somewhere but yaad nahee aa rha khan… but it is very nice to refresh the memory again by watching it again….”

    Regards

  4. ताऊ रामपुरिया Says:

    इस संदेश से आपने बीते दिनों की याद दिला दी ! दूरदर्शन आज भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की कोशीस करता है पर निजी चैनल तो आते ही पैसा कमाने के लिए हैं तो इसका खामियाजा तो आपको हमको सबको भुगतना ही पडेगा ! पर इन पर भी थोड़ी जिम्मेदारी किसी ना किसी रूप में डाली जानी चाहिए ! आपने एक सामाजिक जिमेदारी का मुद्दा उठाया इसके लिए आपका धन्यवाद !

  5. Ramesh Sachdeva Says:

    It is good. How can I download you tube and can listen it later on.
    Let me know the link.
    Thanks.
    Ramesh Sachdeva
    09896081327

  6. समीर लाल Says:

    इसे जब भी सुनता हूँ पुराने दिन याद हो आते हैं जब ब्लैक एंड व्हाईट टीवी आया था. आभार.

  7. yoginder moudgil Says:

    Are wah saheb
    kya baat hai
    kya prastuti rahi
    kamaal
    sadhuwad

  8. राज भाटिया Says:

    बहुत ही अच्छा लगा , इसे मेने भी अपने बांलग पर डाला हुआ है, ओर बच्चे तो बच्चे हम भी बहुत प्यार से देखते है, आज की बकबास देखने के वजाये यह देखना अच्छा है.
    आप का धन्यवाद

  9. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    @सचदेव जी
    आभार. हमने आपको ईमेल से तरीका बताया है. काम न बना हो तो बताएँ.

  10. संजय बेंगाणी Says:

    पूराने दिनो की सुखद याद की तरह है, यह विज्ञापन.

  11. मनीष Says:

    जी अच्छी तरह याद है ये वृत चित्र..

  12. विष्‍णु बैरागी Says:

    एकता और समरसता की चिडिया का घोंसला उजाडा जा रहा है । ऐसे प्रयत्‍नों का ही आसरा और उम्‍मीद है । आपने मन को ठण्‍डक दी ।

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