उत्कृष्टता की अभिलाषा

 

sculptorचतुर्वेदी घूमते घूमते एक निर्माणाधीन मंदिर के पास पहुँच गया. पास ही एक शिल्पी एक मूर्ति को पूरी तन्मयता से आकृति देने में व्यस्त था. चतुर्वेदी बड़े कौतूहल से शिल्पी को कार्य करते हुए कुछ देर तक देखता रहा. तभी उसने देखा कि पास में ही एक मूर्ति पड़ी हुई है. उसने मूर्ति को दोनो हाथों से उठा लिया और निहारने लगा. बहुत ही सुंदर लग रही थी. चतुर्वेदी ने महसूस किया कि जिस मूर्ति पर शिल्पी काम कर रहा है वह हूबहू उसके हाथ की मूर्ति का प्रतिरूप ही लग रही थी. जिग्यासा वश पूछ बैठा, “ब्रदर एक जैसी दो दो मूर्ति कहाँ लगाओगे”

शिल्पी ने बगैर नज़र उठाये ही उत्तर दिया “एक ही लगेगी. उस खंबे के ऊपर”

चतुर्वेदी संतुष्ट नहीं हुआ. फिर पूछा “और ये वाला”

शिल्पी ने उसी अंदाज़ में कहा “सर वो डिफेक्टिव है”

चतुर्वेदी ने बड़े ध्यान से अपने हाथ की मूर्ति का परीक्षण किया. कहीं कोई खराबी नहीं दिख रही थी. फिर पूछा भाई इसमे क्या प्राब्लम है?

शिल्पी ने कहा भाई साहब उसकी नाक में खरोंच आ गयी है.

चतुर्वेदी ने भी देखा कि हाँ है तो सही लेकिन इतना तो चलता है यह सोच बोला अरे भाई उतने ऊपर से इतना सा खरोंच कोई नहीं देख पाएगा.

शिल्पी ने व्यथित स्वर में कहा “हमको तो मालूम पड़ेगा”

उत्कृष्टता की अभिलाषा आत्मिक होती है, किसी के द्वारा सराहे जाने की कामना से रहित.

 

पारंपरिक

 

 

19 Responses to “उत्कृष्टता की अभिलाषा”

  1. seema gupta Says:

    शिल्पी ने व्यथित स्वर में कहा “हमको तो मालूम पड़ेगा”
    उत्कृष्टता की अभिलाषा आत्मिक होती है, किसी के द्वारा सराहे जाने की कामना से रहित.

    ” what a great example of self satisfaction, so honest…”

    regards

  2. himanshu Says:

    “शिल्पी ने व्यथित स्वर में कहा “हमको तो मालूम पड़ेगा”

    उत्कृष्टता की अभिलाषा आत्मिक होती है, किसी के द्वारा सराहे जाने की कामना से रहित.”

    इसे हर एक ब्लोगर को पढ़ना चाहिए, कम से कम शास्त्री जी को तो जरूर.

  3. ताऊ रामपुरिया Says:

    उत्कृष्टता की अभिलाषा आत्मिक होती है, किसी के द्वारा सराहे जाने की कामना से रहित.

    सुन्दरतम कहानी ! शुभकामनाएं !

  4. मोहन वशिष्‍ठ Says:

    सच इसी को कहतें हैं काम के प्रति ईमानदार। बहुत ही अच्‍छी रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं

  5. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    यह उत्कृष्ठता की निशानी है। लेकिन आज के युग में परफेक्शनिस्ट बहुत पीछे रह जाते हैं। उन्हें उत्पादन में दुगना तिगुना समय लगता है और कीमत अधिक से अधिक सवाई और ग्राहक मिलते नहीं। हाँ उन का मूल्यांकन बहुत ऊँचा अवश्य होता है।
    और मैं इस का भुक्त भोगी हूँ।

  6. सतीश सक्सेना Says:

    मुझे नही मालूम कि कि यह रचना सत्य घटना है या नही ! मगर भाव और लेखन सार्थक हैं ! बहुत अच्छा लगा यह पढ़कर, ऐसे लेखों का स्वागत है !
    आपको साधुवाद एक अन्य कारण भी ! दक्षिण वासी होकर इतनी अच्छी हिन्दी एवं उत्कृष्ट एवं अनूठा विषय,
    सादर अभिनन्दन !

  7. Dr.Arvind mishra Says:

    Rightly said ,perfectionism is an individualistic urge !

  8. yoginder moudgil Says:

    क्या बात है दादा
    सत्यम शिवम सुंदरम
    साधुवाद……….

  9. विष्‍णु बैरागी Says:

    इस कथा ने गांधी की याद दिला दी । आत्‍म निरीक्षण, आत्‍म परीक्षण और आत्‍म परिष्‍कार गांधी के जीवन की अनवरत प्रक्रिया थी । खुद से सच बोलो – यह आज की सबसे बडी जरूरत भी है ।
    यह वर्णन हमें आत्‍म निरीक्षण का परामर्श देता है ।

  10. संगीता पुरी Says:

    पहले आपके ब्‍लाग पर नहीं आ सकी थी। खेद क्‍या प्रकट करूं । खुद का ही नुकसान हुआ है। बहुत सुंदर कहानी। आत्मिक संतुष्टि सबसे बडी बात होती है।

  11. राज भाटिया Says:

    इसे कहते है लगन, यानि हम ऎसा काम करे की कोई उस मै कोई गलती निकाल ही ना सके,बहुत ही सुंदर लगा, एक शिक्षा से भरपुर.
    धन्यवाद

  12. संजय बेंगाणी Says:

    शानदार बात कही है, कथा के माध्यम से.

  13. Sameer Lal Says:

    सच कहूँ तो इस कहानी ने मुझे बहुत प्रभावित किया-जब तक मुझे मालूम है तब तक लाख अच्छा दिखे–दोष तो है ही.
    आनन्द आ गया और आपका बहुत आभार.
    भारत आने के बाद यह पहली टिप्पणी है, अतः मेरी नजरों में महत्वपूर्ण.

  14. LOVELY Says:

    जरा व्यस्तता के कारन देर से आई हूँ ..प्रेरक प्रसंग है ..धन्यवाद

  15. मनीष Says:

    क्या दृष्टांत दिया आपने. सही बात है जब तक अपने स्तर से कोई कमी दिखती रहे उसे सुधारने की कोशिश करती रहनी चाहिए.

  16. naresh singh Says:

    very nice thouht and nice example

  17. Gajender Bisht Says:

    उत्कृष्टता की अभिलाषा आत्मिक होती है, किसी के द्वारा सराहे जाने की कामना से रहित.

    What a brilliant definition. Superb!!!!!!
    Regards,

  18. elias (Greece) Says:

    καλημερα απο chalkis
    GOOD MORNING FROM chalkis

  19. Shastri JC Philip Says:

    यदि हम में से 10% लोग इस कलाकार के समर्पण के सिर्फ 10% समर्पित हो जायें तो यह समाज 10 गुना उत्कृष्ट हो जायगा !!!

    — शास्त्री

    — हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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