ताली बजाओ – चिट्ठा जगत का गुर हमने सीख लिया

हमने चिट्ठाकारी शुरू किए अभी जुम्मा जुम्मा ८ दिन ही हुए थे. चाहने वालों ने टोचन मारी, कहा, अँग्रेज़ी में क्यों लिखते हो, हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है. हिन्दी में लिखो और ज्ञान बाँटो. हमने भी मन बना लिया फिर सोचा चलो देखते हैं लोग  कैसे लिख रहे हैं. हिन्दी को समर्पित चिट्ठाकारी के बारे में भी बहुत कुछ पढ़ा, आश्वस्त हुआ कि राज ठाकरे टाइप का कोई अंतरजाल में है तो नही. क्योंकि हम ठैरे मद्रासी. कोई ये ना कहे कि हिन्दी हमारी बपौती है. फिर हम भी सेवक बन गये.

लिखना शुरू किया. इक्के दुक्के लोग भटक कर “हाय” करने आ जाते. धीरे धीरे और लोग आने लगे, हमारा पढ्ने (या फिर खाली टिपियाने?). अंतरजाल में एक पुण्य आत्मा भी भटक कर आई, समीर लाल जी के रूप में. उन्हें शायद समझ में आ गया था कि ये कोई नादान है. उन्होने पूछा, क्यों ब्लॉगवाणि, चिट्ठाजगत आदि में पंजीयन कराया? हमने पूछा ये क्या होता है. उन्होने अपनी ओर से ही सब कुछ करा के हमे बधाई देदी. हम प्रसन्न हुए.

अपने चिट्ठे के लिए पाठक जुटाने के ऊपर भी एक दो शोध प्रबंध शास्त्री जी के द्वारा प्रकाशित हुए थे. हमने भी सोचा चलो कामयाब लोगोने नुस्खे दिए हैं, आजमा लेते हैं. दूसरों के चिट्ठो पर दिनभर टीपियाते, लेकिन ईमानदारी से. हमारे पाठकों की संख्या बढ़ने लगी लेकिन पाया कि २५ चिट्ठो पर टीपने के एवज मे ५ हमे उपकृत करते. बात बनती नहीं दिखी. फिर लगा अपनी मंडली, वही कोर ग्रूप, बनानी ही पड़ेगी. हमने देखा हमारे चिट्ठे पर कुछ लोग तो आते ही थे. उन सब का हमने पूरी आत्मीयता से पोल्सन (पुराने जमाने का मक्खन) लगाकर स्वागत किया. दूसरों के चिट्ठो पर जाकर भी देखा कि वहाँ कौन कौन नियमित रूप से आते है. वे हमारे पोटेन्षियल पाठक बन सकते हैं. उनके यहाँ भी जाते रहे ताकि तरस खाकर वे हमें भी उपकृत कर दें. एक बार वो आए तो फिर हम उनसे ऐसे चिपके कि वे अलग ही नही हो सके. उन्हें अलग से ई-मेल भेज कर कुशल क्षेम पूछने का प्रपंच किया.एक सरदरजी थे वो समझ गये.उन्होने हमें एक लिंक भेजी. हमने खोला और देखा की वह एक चिट्ठा था, शीर्षक “अकल” और पूरा पन्ना एकदम कोरा. हम क्लीन बोल्ड. समीरलाल जी के लिए कुछ नहीं किया, क्योंकि हमने पाया कि वे तो सर्वव्यापी है. कुछ हमारे वरिष्ट चिट्ठाकार ऐसे भी मिले जिन्होने घास नहीं डाली पर हमने भी हार नहीं मानी. वो सुबह कभी तो आएगी. अब लगने लगा है कि एक कोर ग्रूप हमने खड़ी कर ली है, भले छोटी ही सही. अब वे तो हर पोस्ट पर नियमित आते हैं और खुज़ला जाते हैं.

एक दूजे की पीठ खुजाने की परंपरा अब हमारे चिट्ठे पर भी व्यवस्थित हो चली है.

33 Responses to “ताली बजाओ – चिट्ठा जगत का गुर हमने सीख लिया”

  1. Dr.Arvind Mishra Says:

    आप तो सिद्धहस्त हिन्दी ब्लॉगर हो चले -अब तो आप इसमें चुहलबाजी भी सीख गए .मजेदार पोस्ट !

  2. सतीश पंचम Says:

    वैसे आप अपने आपको चेन्नासी ( चेन्नईवाला) बोला करिये, मद्रासी बोलने से कहीं आपके यहाँ वाला कम्बख्त कोई राज ठाकरे न जाग जाये 🙂
    मजेदार पोस्ट।

  3. विष्‍णु बैरागी Says:

    ‘आत्‍म-कथन’ के नाम पर आपने ‘सफलता के सूत्र’ दिए हैं या इस बहाने ‘शवोच्‍छेदन’ कर दिया है – समझ नहीं पा रहा हूं । ऐसा लगता है मानो आपने वह सब लिख दिया है जो मैं कहना चाहता था ।
    आपकी पोस्‍ट पढते-पढते डर लगने लगा । अपने ‘ट्रे्ड सीक्रेट’ इस तरह जग जाहिर कर आप तो गांधी बन गए और हमें अपने आप पर झेंप आने लगी । 🙂
    अच्‍छी, उत्‍साहवर्धक पोस्‍ट है । मुझ जैसों को रास्‍ता भी नजर आएगा और साहस भी बढेगा ।

  4. yoginder moudgil Says:

    क्या बात कही दादा मजा आ गया
    पीठ खुजाने वाला मुहावरा गजब का है

  5. सतीश सक्सेना Says:

    बहुत प्यारा लिखते हो, विद्वता के साथ चालू भी हो सो बहुत सारा जुगाड़ भी सीख लिए हो आपकी स्पीड देखते हुए उम्मीद है जल्दी बहुत सारे चेले भी मिल जायेंगे !
    और फिर मौजां ही मौजां !!!!

    आप समाज को नेतृत्व क्षमता देने में पूर्ण समर्थ हैं, आपकी सशक्त लेखनी इस घर को सुधारने का प्रयत्न करेगी ऐसी आशा है, यहाँ कुछ लोग,पहले से ही,प्रांतीयता, भाषा, जातियों में बँटे लोगों को नफ़रत सिखाने में लगे हुए हैं ! बिना किसी वर्ग विशेष से जुड़े, प्यार से रहने का रास्ता दिखायंगे तो समाज आपका आभारी रहेगा !

    और अगर आप की सोच भी प्रांतीयता और जातिवादी हुई तो कम से कम मैं अवश्य दुखी महसूस करूंगा कि एक और ताकतवर लेखनी संकीर्णता के रास्ते पर चली गयी ! सशक्त मगर संकीर्ण मानसिकता युक्त लेखनी, समाज का वह विनाश कर सकती है जिसकी कल्पना भी न की जा सके !
    मगर मुझे उम्मीद है कि आप अपने सौम्य, हास्य और धारदार लेखन से यहाँ एक नए आयाम देने में स्पष्ट भूमिका निभाएंगे !

    आपके सशक्त ज्ञान को सादर अभिवादन !

  6. अशोक पाण्‍डेय Says:

    बधाई हो। वैसे एक दूजे की पीठ खुजाना उतना बुरा भी नहीं है। आखिर खुद पीठ तो खुजाई नहीं जा सकती 🙂
    बपौती वाली बात आपने ठीक कही है, कई लोग धर्म, क्षेत्र, जाति आदि के आधार पर भाषा व साहित्‍य को अपनी या किसी और की निजी जायदाद समझने लगते हैं।

  7. Rahul Singh Rathore Says:

    बहुत बढ़िया ………….आपके आने ब्लॉगजगत में चार चाँद लग गए …..लिखते रहिये |

  8. Lavanya Says:

    आप लिखेँ पढनेवाले आयेँग़ेँ ..
    – लावण्या

  9. seema gupta Says:

    वो सुबह कभी तो आएगी
    ” उम्मीद पर दुनिया कायम है, दामन थामे रखे…..”
    Regards

  10. Prashant Says:

    badhiya likha..
    vaise chennai kab aa rahe hain?? aane se pahle jaroor batayiyega.. 🙂

  11. anil pusadkar Says:

    बधाई हो.हमको भी अपने कोर ग्रुप मे शामिल कर लेना.बहुत बढिया लिखा.

  12. संजय बेंगाणी Says:

    आपकी हिन्दी, हिन्दी वालों से अच्छी है.

    अगर अच्छा व नियमीत लिखेंगे तो पाठक भी मिलेंगे, आज नहीं तो कल सही.

  13. Ranjan Says:

    आप लिखते रहें, शुभकामनाएं

  14. ताऊ रामपुरिया Says:

    आपने मजाक मजाक में बहुत उंची बात लिख दी ! असल में ये समीरलाल जी ही हैं जिन्होंने आपके मेरे जैसे कई लोगो को यहाँ रुकने का होंसला दिया है ! आपने लिखा की – २५ चिट्ठो पर टीपने के एवज मे ५ हमे उपकृत करते. सो आप यही बात समीरजी के लिए देखिये उनका रेशियो तो शायद इतना भी नही होगा ! आपतो कामयाब रहे बीस प्रतिशत की दर से ब्याज वसूल कर ! : )

    कुछ हमारे वरिष्ट चिट्ठाकार ऐसे भी मिले जिन्होने घास नहीं डाली पर हमने भी हार नहीं मानी. वो सुबह कभी तो आएगी. अब लगने लगा है कि एक कोर ग्रूप हमने खड़ी कर ली है, भले छोटी ही सही.

    इस सम्बन्ध में आप आज शास्त्री जी की पोस्ट देखे और न.५ के नफे नुक्सान से तुलना कर लीजिये ! आपकी कोर ग्रुप के लिए आपको बधाई ! ताऊ के खेमे में आ जाईये एक एक्स्ट्रा प्लाट वहा फ्री मिल रहा है ! और इसका सत्यापन भी शास्त्री जी ही करेंगे ! 🙂

    इस शानदार और फ़ुरसतिया स्टाईल में मौज लेती पोस्ट के लिए आपको बधाई ! और हमने भी ये सब मौज मौज में ही लिख दिया है ! दिल पर ना ले ! 🙂 इब राम राम !

  15. alpana Says:

    आप अच्छा लिखते हैं और टिप्पणी भी अच्छी देते हैं.
    आप ब्लॉग्गिंग में सिर्फ़ 8 ही दिन से हैन.जान कर आश्चर्या हुआ.
    मैं तो सोच रही थी आप काफ़ी दिन से यहाँ हैं.

    शुभकामनाएँ.

  16. संगीता-जीवन सफ़र Says:

    ताली बजाओ – चिट्ठा जगत का गुर हमने सीख लिया –ये देख कर हम भी ताली बजाने आ गये,बहुत-बहुत बधाई आपने बहुत बढिया लिखा है|

  17. paramjitbali Says:

    बहुत सही व सच्ची बात कही है।बढिया पोस्ट लिखी है।

  18. Sanjeeva Tiwari Says:

    बधाई हो भाई साहब । मेरी भी हाजरी स्‍वीकारें ।

  19. Manish Kumar Says:

    टिप्पणियाँ आनंद देती हैं पर सिर्फ टिप्पणी पाने के लिए टिप्पणी ना करें। मैंने तो आपका लेखन अच्छा पाया है और इसलिए आपकी पहली पोस्ट पढ़ कर ही मुसाफ़िर हूँ यारों पर अपनी ब्लॉग लिस्ट में ऍड कर लिया। इसी तरह अच्छा लिखते रहें लोग पढ़ने जरूर आएँगे और उनमें से कुछ टिप्पणी करेंगे कुछ नहीं।

  20. सरिता अरगरे Says:

    आपका अंदाज़े बयां निराला है । हिन्दी की शुद्धता और शब्दों का बेहतरीन इस्तेमाल करके आपने इस पोस्ट में गज़ब ढहा दिया । कहीं कुछ कहा और कुछ अनकहा छोडकर बहुत कह दिया । मज़ा आया ,पढकर । टिप्पणियों के फ़ेर में मत पडिए आप अच्छा लिखते हैं यूं ही लिखते रहिए । मेरी राय में पाठक ज़रुरी हैं टिप्पणी नहीं । सौ पैकेट ’पोल्सन’ पर इक चम्मच मां के हाथ का बना घी भारी है ।

  21. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    बधाई हो! आप ने पाठक भी जुटाए और टिप्पणीकार भी। लेकिन इन में स्थायित्व केवल लगातार अच्छे लेखन से ही संभव है। आप काम की बातें अपने चिट्ठे पर लिखते रहें आप का अपना पाठकवर्ग बन लेगा।

  22. Dr Anurag Says:

    कहाँ है भाई तुम्हारी पीठ ?सर्दी के मौसम में काफ़ी ड्राई हो चली है…….जरा दूर से खुजाता हूँ….कभी कभी कोई emolient लगाते रहिये …..अगली बार तब आयेगे जब कुछ लिखेंगे ……

  23. Brijmohanshrivastava Says:

    क्या कहने हैं आपके
    बात हमारी शब्द आपके
    आपके पच्चीस में से पांच आए
    हम तो रह ही गए टापते
    मैं तो अपना सौभाग्य ही समझता हूँ
    रोज़ दर्शन तो हो जाते हैं आपके
    मुझे तो बहुत कुछ मिलता है
    जब पढता हूँ लेख आपके

  24. mohan vashisth Says:

    वाह जी वाह पढकर मजा आ गया और काफी गुर हमने भी ले लिए हैं आपसे और अब तो लेते ही रहेंगे धन्‍यवाद

  25. अनूप शुक्ल Says:

    सुन्दर! इत्ती तो घास हो गयॊ! बधाई!

  26. Ratan singh Says:

    चुहलबाजी के साथ साथ चिट्ठाकारी के गुर भी सिखा दिए आपने | आभार

  27. राज भाटिया Says:

    एक दूजे की पीठ खुजाना, तो चलिये आईये हम खुजाते है एक दुसरे की पीठ 🙂
    जनाब आप तो हम से आगे निकल गये 🙂
    धन्यवाद है भी गुर सीखने का

  28. राज भाटिया Says:

    धन्यवाद हमे भी यह गुर सीखाने के लिये.( भुल सुधार)

  29. हिमांशु Says:

    “वक्त अच्छा भी आयेगा एक दिन
    गम न कर जिंदगी पडी है अभी . ”

    बहुत मजा आया पढ़कर . धन्यवाद .

  30. मीनाक्षी कंडवाल Says:

    वाह… ब्लागिंग के सच को काफी अच्छी तरह ह्यूमर मं पिरोया आपने। लेकिन फिर भी ये सच है कि इस ब्लागिंग के जरिए हम सबके बीच एक संवाद तो स्थापित होता ही है। जो कई अहम मुद्दों पर आवाज़ उठाकर अपने विचारों को रखने के लिए एक मंच देता है।

  31. गौतम राजरिशी Says:

    नायाब अंदाज कहने का…वाह!!!
    नतमस्तक….बधाई

  32. arsh Says:

    बहोत खूब कहा आपने ,वेसे सतीश पंचम जी के बात से सहमत हूँ ,वेसे उम्मीद पे तो दुनिया कायम है .. खुजली कराने का परम्र बदस्तूर जारी रहे … हम भी आपके महफ़िल में शामिल है .. ढेरो साधुवाद…

  33. Gagan Sharma Says:

    बहुत ही सुंदर।
    आपने तो सरल हृदय से अपनी सारी बातें खोल कर रख दीं। भाई लोग तो डूब कर पानी पी लेते हैं, पता भी नहीं चलता।
    वैसे ऐसे ही पूछ रहा हूं, मने कि, याने कि, मेरा मतलब है कि यूंही जानना चाह रहा था कि अब तो काफी जान-पहचान हो गयी है, आपकी तो—- पूरानी जगहों का चक्कर लगता रहेगा कि नहीं।

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