पातालकोट – एक और स्वर्ग

patalkot1प्रकृति के आगोश में जैविक विभिन्नताओं से परिपूर्ण एक पाताललोक, मिथक ना होकर यथार्थ में ही. सतपूड़ा की रानी कहे जाने वाले पचमढ़ी के पार्श्व भाग में 3000 फुट ऊँची पर्वत शृंखलाओं से तीन ओर से घिरी एक सुरम्य घाटी, मानो स्वर्ग ही अवतरित हो गया हो इस पाताल में. किंवदंती है की रामायण काल में मेघनाथ, भगवान शिव की आराधना कर इसी मार्ग से पाताल लोक के लिए प्रस्थित हुआ था.

हम चर्चा कर रहे हैं उस अनूठे गहरे घाटी की जो धरती के गर्भ में सदियों से अनजाना बना रहा. इसी घाटी का नाम है पातालकोट. मध्य प्रदेश के छिन्दवाडा नगर से पछ्मढी की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग में 62 कि.मी. चलने के बाद, दाहिनी ओर है यह अजूबा. धरती से हज़ारों फुट नीचे, सही मायनों में एक पाताल. उस सड़क मार्ग पर चलते समय आभास तो यही हो रहा था की हम समतल पठार पर से होते हुए जा रहे है और अचानक आ जाता है यह पाताल कोट का  मनोरम एवं विहंगम भूदृश्य. घाटी की वादियों को वहाँ कल कल कर प्रवाहित होने वाली “दूध” नदी और अधिक आकर्षक बना देती है.

patalkotयह घाटी विभिन्न प्रजातियों के वनस्पति से परिपूर्ण है. भुमध्यरैखिक वन संपदा की प्रचुरता है. लगभग 2000 से ऊपर यहाँ लोग बसते हैं जो कभी आधुनिक सभ्यता से पूर्णतह अछूते थे. 79 वर्ग कि.मी. भूभाग पर फैले इस घाटी में लगभग दो दो कि.मी. की दूरी पर कुल 12 गाँव हैं. यहाँ के आदिवासी, जीविका के लिए पूर्णतः वहाँ के भू एवं वन संपदा पर ही निर्भर है.

यहाँ बसने वाले आदिवासी भरिया और गोंड जनजाति के हैं.  पाताल कोट के निवासी धरती को माता के रूप में ही देखते हैं और कुछ समय पूर्व तक हल चलाने से परहेज करते थे इसलिए खुरपी का प्रयोग करते थे. पर अब स्थतियाँ बदल गयी हैं.

घाटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यहाँ औषधीय गुण वाली नाना प्रकार की वनस्पति (ज्ञांत अल्प ज्ञांत, अज्ञांत)  और दुर्लभ जड़ी बूटियों का भंडार है. पाताल कोट में नाग देवता के बाद अगर कोई भगवान माना जाता है, तो वो है भूमका, वहाँ के चिकित्सक. भूमका ही हैं जो पाताल कोट के निवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं. वे ऐसे कुछ रहस्य भी जानते हैं जिन्हे पाताल कोट rathed-villageके आम लोग नहीं जानते. भूमका पाताल कोट की हर जड़ी बूटी की विशेषता को समझते हैं. साधारणतया पाताल कोट के निवासी   बीमार नहीं पड़ते, लेकिन अगर कोई परेशानी हो जाती है तो सीधे भूमका के पास ही पहुँचते हैं.यहाँ की दुर्लभ जड़ी बूटियों में हर बीमारी के लिए इलाज़ उपलब्ध है.

प्रदेश शासन के द्वारा स्थापित पातालकोट विकास प्राधिकरण घाटी में जन जागरण तथा विकास के लिए कार्यरत है.घाटी में मिड्ल तक की स्कूली शिक्षा, प्राथमिक चिकित्सा सेवाएँ एवं पशचिकित्सा उपलब्ध करा दी गयी हैं. क्षेत्र में दुर्लभ जड़ी बूटियों की उपलब्धता ने लालची व्यापारी वर्ग को आकृष्ट किया है और उनके द्वारा घाटी के इस संपदा का बड़ी बेरहमी से दोहन किया जा रहा है. कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि कुछ दुर्लभ जड़ी बूटियों की तस्करी कर विदेशों को भी निर्यात किया जा रहा है. शीघ्र ही उनके क्रिया कलापों पर अंकुश नही लगाया जाता तो संभावना है कि पातालकोट की पहचान ही नष्ट हो जावेगी.

bhariaपाताल कोट के जैविक विविधता तथा आदिवासियों के पारंपरिक जड़ी बूटियों पर आधारित औषधीय ज्ञान (एथनोबाटोनी) के संरक्षण के क्षेत्र से जुड़ा एक व्यक्तित्व है डा. दीपक आचार्य, जो क्षेत्र के ही निवासी भी हैं.  इस ओर उनके द्वारा किया जाने वाला अथक परिश्रम सराहनीय है.

इस पोस्ट को डालने के कुछ पूर्व ही हमने  गूगलिंग की  और हमें अप्रत्याशिक रूप से यह वीडीयो मिल गया:

 

 

 चित्र: डा. दीपक आचार्य                                                      Find English Version Here

34 Responses to “पातालकोट – एक और स्वर्ग”

  1. हिमांशु Says:

    बड़ी अच्छी जानकारी .
    पातालकोट, भूमका और दीपक आचार्य की सराहना कर रहा हूँ. इस प्रकार की प्रविष्टियों से ही मल्हार उल्लेखनीय है .

    धन्यवाद.
    हिमांशु

  2. Ratan singh Says:

    बहुत शानदार और अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया |

  3. प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर Says:

    जीते जी पाताल लोक कि सैर कराने का धन्यवाद!!!

    कहीं स्वर्ग भी तो हमारे पड़ोस में नहीं??????

  4. seema gupta Says:

    “पाताललोक का ये मनोरम द्रश्य देख कर न जाने अंतर्मन कहाँ विचरने लगा , आकाश को छूती ये पहाडियां, गहरी खाइयाँ मीलों दूर तक फैली ये हरयाली , धरती पर झुकता आसमान का ये आँचल , स्वर्ग नही तो और क्या है ….”

    Regards

  5. संजय बेंगाणी Says:

    बहुत सुन्दर जानकारी दी है.

  6. Brijmohanshrivastava Says:

    सर मुझे धन्य कर दिया आपने /किम्वदन्ती है कि रामायणकाल में की जगह में लिखता तो मान्यता है शब्द का प्रयोग करता /पातालकोट का नक्षा क्लिक किया बस देखता रहा नक्शे को और धन्यवाद देता रहा आपको /अजूबा शब्द बहुत उत्तम चयन किया है /मैं कल्पना ही कर सकता हूँ कि जब आप दूध की नदी देख रहे होंगे तो कितना आनंदित हो रहे होंगे /एक तो आपका प्रकृति प्रेम और उसको चित्रण करने की आपकी विशेषता ने चित्रण को अति सुंदर आकर दे दिया है /वहा बसने वाले आदिवासियों की जानकारी भी विदित हुई /आपका प्रस्ताव तो सही है मगर धनलोलुप लोगों को क्या मतलब किसकी पहिचान नष्ट हो रही है /दीपक आचार्य जी को सराहना ,मदद ,प्रोत्साहन मिले तथा उनसे कुछ और आयुर्वेद के जानकार मिलकर शोध करे /काश ऐसा हो पाता /मैं आपका किस प्रकार शुक्रिया अदा करुँ समझ में नहीं आरहा

  7. Satish Saxena Says:

    पातळ लोक की सैर करवाने के लिए आपका आभारी हूँ ! शायद आपका अकेला ब्लाग है जो यह जानकारी देता है !पुरातत्व विज्ञान के बारे में जानने की बहुत इच्छा है, मगर यह मेरा विषय कभी नही रहा ! हो सके तो नौसिखियों के लिए कुछ जानकारी अवश्य दें !

  8. दिनेशराय द्विवेदी/Dineshrai Dwivedi Says:

    ऐसे स्थलों को पूरी तरह महफूज रखने की व्यवस्था होनी चाहिए। वरना व्यावसायिक लोग धरती का समूचा सौन्दर्य नष्ट कर डालेंगे। वहाँ कभी भी निश्चित संख्या से अधिक लोग बाहरी दुनिया से नहीं पहुंचने चाहिए और बार बार वहाँ जाने पर भी प्रतिबंध होना चाहिए।

  9. dr.g.s narang Says:

    bahut badiya aur gyanvardhak jaankari ke liye dhanyawad.

  10. tanu Says:

    ओके….तो आपने अपने ब्लॉग का हिंदी वर्ज़न भी तैयार कर लिया….हालांकि आपके उस ब्लॉग से भी लोग समझ पा रहे होंगें…लेकिन यहां आपको शायद ज्यादा पाठक मिलें और ज्यादा से ज्यादा लोग फायदा उठाएं…इन जानकारियों का…
    और हां एक बार फिर बता दूं….ibn7 देखिएगा…आज दोपहर ऑफिस आने से पहले पातालकोट पर एक रिपोर्ट आ रही थी…..बिल्कुल वैसा ही सब कुछ जैसा आपने लिखा…

  11. Vineeta Yashswi Says:

    Apka yah blog bhi bahut achha hai.

  12. GIRISH BILLORE MUKUL Says:

    behad soochana parak report

  13. mohan vashisth Says:

    पातालकोट के बारे में एक बहुत ही अच्‍छी और ज्ञानवर्धक जानकारी देने के लिए धन्‍यवाद अब तो आना हुआ करेगा बधाई हो

  14. Anunad Singh Says:

    अति सुन्दर !

    भारत में एक से बढ़कर एक पर्यटक-स्थल हैं किन्तु इनके बारे में प्रचार-प्रसार का अभाव है। ‘कस्तूरी कुण्डलि बसै”.. जैसा । इसी कारण (और कुछ गुलाम मानसिकता के चलते) सब लोग विदेशी पर्यटक-स्थलों की तो खूब चर्चा करते हैं किन्तु अपने देश में ही उपलब्ध स्वर्गों के बारे में अनभिज्ञ हैं।

  15. common man Says:

    bahut sundar, kripya lucknow se pahunchne ka raasta, wahan rukne ke saadhan bhi batayen

  16. ताऊ रामपुरिया Says:

    सही मे आज तो लगता है कि स्वर्ग लोक की सैर कर ली हो ! इस सम्पदा को बचाने और प्रचार प्रसार की आज बहुत ही ज्यादा आवश्यकता है ! इस चित्रमयी जानकारी और अवलोकन करवाने के लिये आपको बहुत धन्यवाद !

    राम राम !

  17. naresh singh Says:

    स्वर्ग लोक(पाताल लोक) की सैर कराने के लिये आपको बहुत धन्यवाद । बहुत ही अच्‍छी और ज्ञानवर्धक जानकारी दी है

  18. Gagan Sharma Says:

    अद्भुत

  19. मनीष Says:

    छिंदवाड़ा से सड़क मार्ग से मैं भी पचमढ़ी जा चुका हूं पर पातालकोट से अनभिग्य कैसे रह गया ये समझ नहीं पा रहा. छिंदवारा से होते हुए हम पारसिया -डेलखरी होते हुए मुटकुली पहुँचे.

    क्या आप बताएँगे कि पातालकोट इनमें से किन गंतव्यों के बीच आता है?

  20. अंतरजाल में KISS का आतंक « मल्हार Malhar Says:

    […] मल्हार Malhar पुरातत्व, मुद्राशास्त्र, इतिहास, यात्रा आदि पर Archaeology, Numismatics, History, Travel and so on « पातालकोट – एक और स्वर्ग […]

  21. sandhya gupta Says:

    धरोहरों को वास्तव मे काफ़ी सहेज़ कर रखने की ज़रूरत पातालकोट की सैर कराने के लिए धन्यवाद.

  22. विनय Says:

    नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

  23. Smart Indian Says:

    पातालकोट के बारे में अनूठी जानकारी से भरी इस पोस्ट के लिए आपका धन्यवाद!

  24. Moomal Says:

    पर्यटन की दुनिया में आप का ब्लॉग हमारे पाठकों के बहुत काम का लगा। मूमल यात्रा, मल्हार का अनुसरण करके गर्व का अनुभव करेगा। पातालकोट पर प्रस्तुति काफी अच्छी लगी।

  25. harkirat haqeer Says:

    भारत में एक से बढ़कर एक पर्यटक-स्थल हैं किन्तु इनके बारे में प्रचार-प्रसार का अभाव है……..पातालकोट के बारे में अनूठी जानकारी से भरी इस पोस्ट के लिए आपका धन्यवाद…….

  26. mahendra mishra Says:

    पाताल लोक की सैर कराने के लिये ,धन्यवाद.

  27. dipak Says:

    please send me the way to patalkhot

  28. ramkrishna dongre Says:

    बहुत धन्यवाद आपका .

    पातालकोट को हमने काफी करीब से देखा है …
    लेकिन समय की कमी के चलते गहरी खाई में उतर नहीं सकें .

  29. mohan sahu e Says:

    deyar
    patalkot kee jankaree ke leeya think

  30. smt. saingita mohan sahu Says:

    patalkot kee samachar ke leeya long on kre http://www.patalkotexp.com

  31. rahul surwade Says:

    hi frinds,im rahul vsurwade me ek film banana chahata hu agr ki meri parmishan ke liye sath de

  32. rahul kumar Says:

    Nice

  33. manoj kumpar rawal Says:

    patalkot mujhe dekhna hai

  34. Patalkot – the bottom of the Earth – Free Porn XXX Adult Photos and Erotic Stories Says:

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