व्हाट गोस ऑफ माइ फादर

dennisहमने यह पोस्ट बहुत दिनों पहले बनाई थी पर मुंबई के आतंकी हमले के परिपेक्ष में हमने ऐसे और भी लेख रोक लिए थे, संवेदनशील कहलाने के लिए. कल ही ज्ञानजी का पोस्ट “यह क्या भाषा है?” पढ़ी और पुनः बैटरी चार्ज हो गई. हमने अपनी टिपण्णी नही दी थी परन्तु उनकी प्रतिष्ठा में इस पोस्ट को समर्पित करने की सोची.

हमने पिछले पोस्ट में बताया था कि हमारी दूकानदारी चलने लगी है. सहज है कि सीना फूलेगा. आख़िर हिन्दी क़ी सेवा में मद्रासी ज़ोर लगा रहा है. हौसले बुलंदी पर. हमें जताना था कि हम हिन्दी के भविष्य के बारे में कितने फ़िकरमंद हैं. एक दिन अचानक अख़बार में कुछ लिखा हुआ दिख गया.
मुह से निकल गया, अय्यो! अय्यो!, ये क्या जी? ये क्या हिन्दी लिखता? क्या लॅंग्वेज का मर्डर करेगा. हम सोचा हमको भी पेल देना चाहिए, सो पेल दिया एक पोस्ट, अपने चिट्ठे पर(
हमारी हिन्दी कहाँ जा रही है) . गाँव का कुत्ता  बैलगाड़ी के नीचे नीचे चलता है, सोचता, मेरे कारण गाड़ी चलता.  हमने भी यही सोचा. सबको ईमेल करके बोला हम आपका इस्तकबाल करता हूँ. आओ देखो क्या प्राब्लम है.

हमारे ब्लॉग में सब लोग आया, बहुत लोग आया. कोई बोलता सब ठीक है, चलेगा और चलना भी चाहिए. लॅंग्वेज एनरिच होता ना. कोई बोला नहीं चलेगा, लोग हिन्दी क़ी चिंदी कर रहे हैं और ब्डा बड़ा लेख पढ्ने बोला बताने के लिए क़ी वो भी यही बोलता है. कुछ लोग बोला, नहीं, हमको ब्रॉड माइंडेड होना माँगता है. बीच वाला रास्ता देखने बोला. अँग्रेज़ी का एग्ज़ॅंपल देकर बोला देखो अमेरिकन लॅंग्वेज के इंपॅक्ट से कितना अच्छा हो गया. बिल्कुल हो गया. एस.एम.एस लॅंग्वेज में लिखता. टाइम का नो वेस्टेज. इसको भी सीखना पड़ेंगा. हमको मालूम, हमारा बाप बताया था कि इंडिया में पहले पहले संस्कृत चलता था. इंडिया का आदिवासी लोग अपना बोली को मिक्स किया फिर प्राकृत नाम का इडली बनाया. आगे और बढ़ा अपभ्रंश का उपमा और दोसा बनाया. सब अपना अपना मर्ज़ी से. संस्कृत एलीट का लॅंग्वेज बन गया. हिन्दी को भी एलीट लोग यूज़ करेगा. ये सब आज के हिन्दी पंडित लोगों का कॉन्स्पिरेसी बोलेगा.क्यों वो नहीं चाहता कि लोग अच्छा लिखें पढ़ें. फिर उनको कोई नहीं पूछेगा ना. पुराने जमाने में भी ऐसा ही हुआ. ब्राह्मण लोग बोला ऑर्डिनरी पब्लिक को वेद, पुराण, उपनिषद् वग़ैरा मालूम करने का क्या ज़रूरत.

आज कल कोचीन मे बेटकर बहुत से इंडियन लोग इंग्लेंड के बच्चा लोगों को  इंटरनेट में अँग्रेज़ी पढ़ा रहे.  हमारे बच्चा लोगों को चाइना वाला हिन्दी पढायेगा. हमारा क्या. जो सीख लिया उनको अनसीख करेगा और आप लोग जैसा बोलेगा वैसा सीखेगा और लिखेगा. आप इडली खाओ, दोसा खाओ या खिचड़ी खाओ. व्हाट गोस ऑफ माइ फादर.

वैधानिक चेतावनी: इस बक बक को गंभीरता से लेंअपने उत्तरदायित्व पर!

20 Responses to “व्हाट गोस ऑफ माइ फादर”

  1. दिनेशराय द्विवेदी/Dineshrai Dwivedi Says:

    चीन में हिन्दी शिक्षक विद्यालय खुल गया है क्या?

  2. govind goyal Says:

    jis rup me aap kisi ko apni baat kah sako wahi bhasa hai, jo bhav shbdon ka rup le le wahi kavita hai ya rachana hai.
    narayan narayan

  3. sareetha Says:

    दुनिया में आयातित चीज़ों की कीमत हमेशा ही ज़्यादा रह्ती है । आप तो हिंदी को चिंदी बनाएं या रुमाल पर डटे रहें जीत आपकी ही होगी ।

  4. सतीश पंचम Says:

    ये मद्रासी इतनी अच्छी हिंदी लिखता ….अहा ! ……वाह वाह पोस्ट। बहुत खूब।

  5. seema gupta Says:

    हमारे बच्चा लोगों को चाइना वाला हिन्दी पढायेगा.
    “”ऐसा क्या….”
    Regards

  6. PN Subramanian Says:

    @श्री दिनेशराय द्विवेदी:
    बीजिंग यूनिवर्सिटी में हिन्दी का डिपार्टमेंट होता. उसको हमारा गवर्नमेंट ग्रांट दिया और बोला तुम लोग सीखो हिन्दी फिर हमारा लोगों को सिखाना.

  7. ranju Says:

    बढ़िया लगा आपका यह लेख ..:)

  8. naresh singh Says:

    गाँव का कुत्ता बैलगाड़ी के नीचे यह उदाहरण तो राजस्थान मे दिया जाता है क्या यह आपके यहा भी चलता है । व्यंग्य के रूप में आपने अच्छी बात बताई । आभार

  9. ताउ रामपुरिया Says:

    हमको तो चीन वालो ने उनको चीनी सीखाने का ठेका दिया है ! हम तो वहीं जा रहे हैं !:)

    राम राम !

  10. puja upadhyay Says:

    वाह वाह बढ़िया लिखा है. आप हिन्दी की इतनी सेवा कर रहे हैं और इस सेवाभाव से ओतप्रोत हैं देख कर दिल को काफ़ी ठंढक पहुँची. आपको बहुत बधाई.🙂

  11. Vineeta Yashswi Says:

    बहुत अच्छा लिखा है आपने. सच मै बहुत अच्छा लगा इसे पढ़ना

  12. Arvind Mishra Says:

    बढियां है -आप ने लाजवाब कर दिया अब क्या टिप्पणी दूँ?

  13. yoginder moudgil Says:

    मैं भी ताऊ के साथ जा रहा हूँ

  14. राज भाटिया Says:

    गाँव का कुत्ता बैलगाड़ी के नीचे …. बहुत सुंदर मद्रासी बाबु जी बडी सटीक बत कह गये, राम राम् जी मै भी चला ताऊ के संग

  15. डा. अमर कुमार Says:


    ठीक कहा आपने.. पर पल्ला कैसे झटक सकते हैं ?

  16. विष्‍णु बैरागी Says:

    यस, नथिंग गाज आफ माय फादर बअ एवरीथिंग गोज आफ माय मदर ।

    आपने मेरे मन की बात कही है ।

  17. Brijmohanshrivastava Says:

    मद्रासी में टाक कर रहे हो बट ऐसा लग रेला है बिहारी माफिक बोल रेले हो /वो क्या है के जब यू अक्षर से काम चल रेला है तो वाय ओ यू क्यों लिखना रे मामूं /स्पीड का पीरियड है स्पीक में शोर्ट कट होना /अँगरेज़ लोग भी बड़ा अन्याय करके चला गया जब आर अक्षर था तो ऐ आर इ क्यों पेल गया /जब ओक्स का मतलब बैल होता है रे सर्किट और फोर्ड गाडी का नाम है तो बैल गाडी को ओक्सफोर्ड क्यों नही कहते ? भाई टेंशन नही लेने का अभी जाता हूँ “”व्हाट गोस आफ माई फादर “”ब्लॉग पर और बहुत कुछ सीख कर आता हूँ भाई /टेंशन नही लेने का ठंडा पानी पीने का

  18. Brijmohanshrivastava Says:

    ये जो तीन कालम हैं नेम ,मेल और वेब साईड -तो इस में क्या लिखना चाहिए ,में मध्यप्रदेश लिख देता हूँ वास्तब में लिखना क्या चाहिए ?

  19. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    विस्तार से ईमेल के मध्यम से समझने का प्रयास किया है. अपना मेल देखें.

  20. mahendra mishra Says:

    वाह वाह बहुत खूब

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