दिल्ली का पुराना किला या इन्द्रप्रस्थ

 

purana-qila

कहा जाता है कि दिल्ली को सर्वप्रथम पांडवों ने अपनी राजधानी इन्द्रप्रस्थ के रूप में बसाया था वह भी ईसापूर्व 1400 वर्ष पहले. परन्तु क्या कोई प्रमाण हैं या केवल हवाई बातें. आज दिख रहे पुराने किले के दक्षिण पूर्वी भाग में सन 1955 में परीक्षण के लिए कुछ खंदक खोदे गए थे और जो मिटटी के पात्रों के टुकड़े आदि पाए गए वे महाभारत की कथा से जुड़े अन्य स्थलों से प्राप्त पुरा वस्तुओं से मेल खाते थे. इससे पुराने किले के भूभाग को इन्द्रप्रस्थ रहे होने की मान्यता को कुछ बल मिला है. भले ही हम महाभारत को एक पुराण के रूप में देखते हैं लेकिन बौद्ध साहित्य “अंगुत्तर निकाय” में वार्णित महाजनपदों यथा अंग, अस्मक, अवन्ती, गंधार, मगध, छेदी आदि में से बहुतों का  उल्लेख महाभारत में भी मिलता है जो इस बात का संकेत  है कि यह ग्रन्थ मात्र पौराणिक ही नहीं तथापि कुछ ऐतिहासिकता को भी संजोये है.bara-darwaza बड़ा दरवाज़ा – मुख्य द्वार

 

पुराने किले के पूर्वी दीवार के पास दुबारा खुदाई 1969 से 1973 के बीच भी की गई थी.  वहां से महाभारत कालीन मानव बसावट के  कोई प्रमाण तो नहीं मिले लेकिन मौर्य काल (300 वर्ष ईसापूर्व) से लेकर प्रारंभिक मुग़ल काल तक अनवरत वह भूभाग मानव बसाहट से परिपूर्ण रहा. ऐसे प्रमाण मिलते गए हैं जिनमे काल विशेष के सिक्के, मनके, मिटटी के बर्तन, पकी मिटटी की (टेराकोटा) यक्ष यक्षियों की छोटी छोटी प्रतिमाएँ, लिपि युक्त मुद्राएँ (सील) आदि प्रमुख हैं जो किले के संग्रहालय में प्रर्दशित हैं.

155-purana-qilaकहते हैं की मुग़ल सम्राट हुमायूँ ने यमुना नदी के किनारे उसी टीले पर जिसके नीचे इन्द्रप्रस्थ दबी पड़ी है, अपने स्वयं की नगरी “दीनपनाह” स्थापित की थी. तत्पश्चात शेरशाह सूर (सूरी)(1538-45) ने जब हुमायूँ पर विजय हासिल की तो सभी भवनों को नष्ट कर अपनी दिल्ली शेरशाही या “शेरगढ़” का निर्माण प्रारम्भ करवाया. इस बीच हुमायूँ ने पुनः संघटित होकर आक्रमण किया  और अपनी खोई हुई सल्तनत वापस पा ली थी. समझा जाता है कि किले का निर्माण कार्य हुमायूँ ने ही 1545 में पूर्ण कराया था.

168-purana-qilaहुमायूँ दरवाज़ा – दक्षिणी द्वार – इस पर शेरशाह का नाम लिखा है

पुराना किला मूलतः यमुना नदी के तट पर ही बना था परन्तु उत्तर और पश्चिम दिशाओं के ढलान से प्रतीत होता है कि नदी को जोड़ती हुई एक खाई सुरक्षा के दृष्टि से बनी थी. इस किले की चहर दीवारी लगभग 2.4 किलोमीटर  लम्बी है और इसके तीन मुख्य दरवाज़े उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में हैं. इनमे से पश्चिमी दरवाज़े का प्रयोग आजकल किले में प्रवेश के लिए किया जाता है. उत्तर की ओर का द्वार “तलाकी दरवाजा” कहलाता है. यह स्पष्ट नहीं है कि कब और क्यों इस दरवाज़े के प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया. यह किला मुग़ल, हिंदू तथा अफघानी वास्तुकला के समन्वय का एक सुंदर नमूना माना जाता है. अब आगे हम कुछ चित्रों के माध्यम से किले के भीतर बने भवनों/हिस्सों का अवलोकन करेंगे.

161-mesquitaकिला-इ-कुहना मस्जिद

160-pqila-mesquitaकिला-इ-कुहना मस्जिद (पीछे से)

163-tecto

164-interior

166-mesquita-sher-shahउपरोक्त चित्रों मे: मस्जिद के अंदरी दृश्य

158-purana-qilaतलाकी दरवाज़ा – उत्तरी द्वार

167-sheer-mandal

शेरशाह द्वारा बनवाया गया शेर मंडल जो अश्तकोनीय दो मंजिला भवन है. इसी भवन मे हुमायूँ का पुस्तकालय हुआ करता था. यहीं पर एक बार पुस्तकों के बोझ को उठाये हुए जब हुमायूँ सीढियों से उतर रहा था,  तभी मूयेज़िन की पुकार सुनाई पड़ती है, नमाज़ का समय हो चला था. हुमायूँ की आदत थी कि नमाज़ की पुकार सुनते ही,  जहाँ कहीं भी होता झुक जाया करता. झुकते समय उसके पैर लंबे चोगे में कहीं फँस गये और वह संतुलन खो कर गिर पड़ा. इस दुर्घटना से हुई शारीरिक क्षति से ही 1556 के पूर्वार्ध मे वह चल बसा.

 चित्र: पूर्वानुमति से साभार

Gil (GMG): trotter@sapo.pt

43 Responses to “दिल्ली का पुराना किला या इन्द्रप्रस्थ”

  1. विष्‍णु बैरागी Says:

    आलेख और चित्र मिल कर एक ही भाव उत्‍पन्‍न कर रहे हैं ‘ ‘मणि-कांचन संयोग’।

  2. yoginder moudgil Says:

    आप दिल्ली आकर लालकिले से लौट गये अच्छी बात नहीं… पानीपत का मैदान मात्र सवा घंटे दूर था दादा…. खैर…

  3. dhirusingh Says:

    भारत की महान सभ्यता को तहस नहस किया था विदेशी आक्रंताओ द्वारा . ऐसा कर दिया गया की मुगलों से पहले हमारे पास कुछ यह ही नही . इन्द्र प्रस्थ के महल हो या कुतुब मीनार सब का रूप बदला गया .इस विषय मे श्री पी अन ओक के द्वारा लिखा साहित्य पढ़े लेकिन उनका लिखी पुस्तके साम्प्रदायिक साबित कर दी गई है

  4. seema gupta Says:

    पुरातन कला का नमुना पुराना किला और उससे जुड़ी नई अद्भुत जानकारी पढ़कर एक नया ही अनुभव हुआ…वैसे भी भारत के इतिहास मे जाने कितनी ऐसी अनदेखी और अनसुनी कहानियाँ दफ़न हैं ….ऐसी अनोखी जानकारियों से अवगत करने का आभार..

    Regards

  5. nirmla.kapila Says:

    बहुत ही ग्या्र्द्ध्क जानकारी है ऐसी अद्भुत जानकारी के लिये धन्यवाद इन्तजार रहेगा ऐसी ही और रचना का धन्यवाद्

  6. pritimav Says:

    बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने। तस्वीरें भी कमाल की हैं। बेहतरीन प्रस्तुतियों के लिए हृदय से धन्यवाद,

    हमारे ब्लाग पर आपका स्वागत है।

  7. ताऊ रामपुरिया Says:

    लाजवाब चित्रों में लाजवाब ऐतिहासिक जानकारी दी आपने. बहुत धन्यवाद आपको.

    रामराम.

  8. amar jyoti Says:

    इतने रोचक और जानकारी से परिपूर्ण आलेख के लिये आभार। ऐसा लग रहा है जैसे मैं स्वयम ही वहां घूम आया हूं।

  9. amit Says:

    bahut hi acchi jaankaari…….

  10. विवेक सिंह Says:

    अच्छी जानकारी दी ! आभार !

  11. संगीता पुरी Says:

    बहुत सुंदर चित्र !!! वैसा ही खूबसूरत और ज्ञानवद्र्धक विवरण !!! बहुत अच्‍छा लगा।

  12. ranju Says:

    बहुत सुंदर चित्र और लेख …मैं इस पर जल्द ही लिखने वाली थी पर आपने बहुत शानदार लिखा है इस पर .मुझे यह जगह बहुत ही पसंद है ..

  13. हिमांशु Says:

    इतनी अमूल्य एवं विशिष्ट जानकारी के लिये धन्यवाद.
    इतिहास का इतनी रोचकता से पारायण यहीं इसी ब्लोग पर करता हूं.

  14. RAJIV MAHESHWARI Says:

    रोज ही इस के सामने से गुजरते है .आज आपके फोटो देख कर इस की खूबसूरती के बारे में जाना.
    इतवार को जरुर सपरिवार जाउगा .जानकारी ,फोटो के लिए आभार.

    -राजीव महेश्वरी

  15. Vineeta Yashswi Says:

    Sunder chitro ke saath lajwab jankari……

  16. vidhu Says:

    दिल्ली तो हमारे दिल मैं है सुंदर चित्र और jaankaari dhanyvaad

  17. mohan vashisth Says:

    वाह जी बहुत ही रोचक और बढिया जानकारी दी है आपने। इसके लिए काफी मेहनत से आंकडे जुटाए और फोटोज का बंदोबस्‍त करना काफी सराहनीय कदम है इसके लिए आपको बारम्‍बार धन्‍यवाद और रोज इसी तरह की जानकारी प्रदान करने के लिए शुभकामनाएं

  18. mamta Says:

    दिल्ली का पुराना किला तो लगता है हम भूल ही गए थे आपने पुनः याद दिला दिया ।
    एक अरसा हो गया है इसे देखे हुए ।
    जितनी सुंदर फोटो उतना ही अच्छा विवरण ।
    शुक्रिया ।

  19. राज भाटिया Says:

    बहुत बार गये इस किले मै, ओर बहुत कुछ पढा सुना, आज आप से कुछ ओर नया पता चला , आप ने बहुत मेहनत से हर छोटी छोटी बात को समझाया.
    धन्यवाद

  20. satish saxena Says:

    इस महत्वपूर्ण लेख के लिए आभारी है,आपके !

  21. Gagan Sharma Says:

    आपकी मेहनत का रंग चढा हुआ है आलेख और चित्रों पर।
    बहुत सुंदर।

  22. Brijmohanshrivastava Says:

    सरजी /बहुत दिनों से “बिजी विदआउट वर्क “”रहा अत न तो आपके दर्शन कर पाया न आपको पढ़ पाये ,क्षमा प्रार्थी हूँ /दर्शनीय चित्र ,एतिहासिक विवरण / अपने साथियों को लाभान्वित करने आप कितना परिश्रम करते है

  23. mahendra mishra Says:

    मुग़ल शासन से सम्बंधित ऐतिहासिक जानकारी प्रस्तुत करने और हम सबको बांटने के लिए शुक्रिया .

  24. arsh Says:

    लाजवाब ऐतिहासिक जानकारी दी आपने. बहुत धन्यवाद आपको.

    arsh

  25. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    चित्र मय इतिहास और आप के निष्कर्ष सोचने को बाध्य कर रहे हैं।

  26. alpana verma Says:

    बहुत अच्छी जानकारी–
    चित्रों को देखना एक अलग अनुभव है.
    वैसे यह किला हमारा देखा हुआ है.

    [Sir,आप मेरा ब्लॉग एड्रेस कॉपी पेस्ट कर के देखीये-कोई समस्या नहीं आएगी–मैं यहाँ बॉक्स में एड्रेस टाइप नहीं कर रही–
    aisa lagta hai यहं से क्लिक करने पर ही यह कहीं और divert हो जाती है शायद?]

    http://www.alpana-verma.blogspot.com

  27. प्रताप सिंह Says:

    आपका ब्लॉग तो एक ग्रंथालय की तरह है. ..अद्भुत है आपका अभिलेखागार. कुछ प्रविस्थियाँ ही पढ़ पाया हूँ अभी… बहुत ही रोचक लगीं.

  28. common man Says:

    gyanvardhak jaankari ke saath-saath chitra aur bhi uttam hain. majaa aa gaya padhkar aur chitra dekhkar, dhanyavaad.

  29. musafir jat Says:

    सुब्रमनियम जी, नमस्कार
    बढ़िया ऐतिहासिकता से भरी जानकारी दी है आपने.
    यह इलाका तो महाभारत कालीन राज्यों का हिस्सा रहा है. एक बात और बताना चाहूँगा-
    कि पांडवों ने अपने गुरू द्रोणाचार्य को एक गाँव दक्षिणा में दिया था. जानते हैं उस गाँव का नाम क्या है?
    गुडगाँव
    यानि गुरु गाँव.

  30. sandhya gupta Says:

    Ek baar phir “purani chizon” ke bare me “nayi jankariyon” ke liye aabhar.

  31. sameer lal Says:

    अरे, कुछ दिन पहले बता देते तो एक पहेली में जीत गये होते हम.

    बढ़िया रोचक प्रदर्शनी!! आभार.

  32. Arvind Mishra Says:

    वाह बहुत उम्दा सचित्र वर्णन -बाईस्कोप की याद आ गयी !

  33. डा. अमर कुमार Says:


    यह सर्वमान्य तथ्य पुनः स्मरण दिलाने एवं
    ऎसी धरोहरों की जानकारियाँ ब्लाग पर सँजोने के लिये अतिशय आभार !

    मेरा भी ऎसा प्रयास काकोरी के शहीद पर चल रहा है ।

  34. Devesh Says:

    इतने रोचक और जानकारी से परिपूर्ण आलेख के लिये आभार। ऐसा लग रहा है जैसे मैं स्वयम ही वहां घूम आया हूं।

    बहुत धन्यवाद आपको.

  35. संजय बेंगाणी Says:

    यहाँ दुबारा आना हुआ, पहली बार पढ़ने के लिए, दुसरी बार टिप्पणी के लिए. अभी पता चला कि मेरी टिप्पणी यहाँ है ही नहीं. मगर जो की थी वह कहाँ गायब हो गई? शायद किसी त्रुटि कि वजह से ऐसा हुआ हो.

    खैर दुबारा कर देता हूँ. उस समय क्या लिखा था, याद नहीं….मगर एक अनजने इतिहास से रूबरू होने का मौका मिला. ज्ञानवर्धक जानकारी. तस्वीरों ने ज्यादा रोचक बना दिया.

  36. हरि जोशी Says:

    शानदार ब्‍लाग। बेहतरीन जानकारी। कई दिन के पढ़ने का मसाला मिल गया। आभार।

  37. Manish Kumar Says:

    बहुत अच्छा विवरण !

  38. अतीश मिश्र Says:

    अच्छा है।

  39. santosh kumar kaushal Says:

    thankyou

  40. nasir Says:

    मैंने श्री ओंक जी की पुस्तक का अवलोकन किया है. उन्होंने स्वप्न में देखी हुई घटनाओं को भी ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया है. जिन ऐतिहासिक धरोहर पर गुडहल का फूल बना है उसको वे लिखते हैं की “ओंम” लिखा है. इतिहास में ऐसे बेतुके तर्कों की लिया जगह नहीं है क्योंकि ये कोई राजनीती का मैदान नहीं.

  41. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    क़िबला नासिर भाई,

    श्रीमान ओक की किताब के बारे में की गयी टिपण्णी से हम सहमत हैं. यदि हमारे
    आलेख के बारे में कोई संशय हो तो जरूर बताएं.एक नयी पोस्ट भारत के सबसे
    पुराने मस्जिद के बारे में भी है. देखना चाहें तो यहाँ देख सकते हैं.

    आभार.

    ++++++++++++++++++++++++++++++++++
    Please visit my Indian History related blogs at:
    http://paliakara.blogspot.com (English)
    https://mallar.wordpress.com (Hindi)

  42. s d yadav Says:

    ek baat samajh se baahar hai ki mugal saasan se pahale ke raja kya jhuggi jhopri men rahte the unka koi mahal nahi mandir nahi muglo k aate hi saare ke saare bhawan ban gaye laal kila ban gaye jaama masjid ban gaye qutub meenar ban gaye taaj mahal ban gaya yaani ki saari ki saari bildingen inki aati hi ban gaye mugalon ne raajaon k mahalon par nahi jhuggi par hamla kiya jhooth jhooth aur safed jhooth

  43. ajay Says:

    In imarto k piche kitne nirdosh Hindus ka khun baha hai pata chalta hai.

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