ओडेपस ने अपनी माँ से शादी की थी!

odipusandsphinxग्रीस जिसे हम यूनान कहते हैं, के पौराणिक कथाओं में ओडेपस (Oedipus) नामक एक राजकुमार की  कथा मिलती है. लगभग ईसा पूर्व ७वी शताब्दी में  लाईअस (Laius) नाम का एक राजा  थेबेस नगर राज्य का शासक था.  उसकी पत्नी का नाम था जोकस्ता (Jocasta). इन्हें एक पुत्र होता है ओडेपस (Oedipus). राजा लाईअस ने , डेल्फी के पुरोहित, तिरेसियस, जो भविष्य वक्ता था (ओरेकल) से बच्चे के भविष्य की जानकारी चाही.

ओडेपस स्फिंक्स के प्रश्न का उत्तर देते हुए

उसने यह बता दिया कि बच्चा बड़ा होकर अपने पिता की हत्या करेगा और अपनी माँ से शादी कर लेगा.   भविष्य में ऐसी अनहोनी से मुक्ति पाने के लिए राजा लाईअस ने बालक ओडेपस की हत्या करवा देने की ठान ली. उसने बालक के दोनो पैरों को आपस में बँधवा कर किसी चरवाहे या पशुपालक को दे दिया और निर्देशित किया कि बच्चे का वध कर दे. उस चरवाहे में बालक के प्रति दया उमड़ पड़ती  है. लेकिन राजाज्ञा के डर से एक दूसरे चरवाहे को सौंप देता है. दूसरा चरवाहा बच्चे को कोरिन्थ नगर राज्य के शासक पोलिबस के सुपुर्द कर देता है.

पोलिबस ने ओडेपस को गोद ले लिया और उसका लालन पालन युवराज की तरह होने लगा. कोरिन्थ का वह अगला शासक बनने वाला था. अब वह युवा हो चला था. धीरे धीरे उसे अफवाहें सुनने को मिलीं की वह पोलिबस का पुत्र नहीं है. इन सुनी सुनाई बातों पर उसे विश्वास नहीं हुआ. एक दिन उसने एक भविष्य वेत्ता से सच्चाई जाननी चाही. उसे इतना ही बताया गया की उसके हाथों उसके पिता की मृत्यु होगी और वह अपनी माता से ही संबंध भी बनाएगा. भविष्य वेत्ता की बातों को ग़लत साबित करने के लिए उसने कोरिन्थ शहर को छोड़ देना ही उचित समझा. भरे मन से वह थेबेस की ओर निकल पड़ा.

ओडेपस, थेबेस की ओर बढ़ा चला जा रहा था. कुछ दूर जाने के बाद उसे एक मार्ग संगम (तिगड़डा) मिला. सामने की ओर से कोई रथ पर सवार हो आता  दिखा. यह थेबेस का राजा लाईअस ही था परंतु ओडेपस उसको पहचानता नहीं था. लाईअस ने मन में सोचा कि यह नौजवान मेरे जाने के लिए रास्ता छोड़ देगा. पर ऐसा न्हीं हुआ. ओडेपस अड़ गया. आपस में खूब तू तू मै मै हुई और तलवारें खिंच गयीं.  अंत में राजा लाईअस मारा गया. ओडेपस को पता भी नहीं चला कि यह उस भविष्यवाणी का एक भाग था. उसने अपनी यात्रा जारी रखी.

आगे जाकर उसकी मुलाकात एक स्फिंक्स (यूनान में स्त्री शरीर और शेर के मुख युक्त एक विशाल जानवर) से हुई. सभी थेबेस जानेवालों को वह रोका करती थी और एक पहेली पूछती. सही उत्तर ना देने वालों को खा जाती. उसने ओडेपस से पूछा “वह कौन है जो सुबह चार पैरों पर, दुपहर दो पैरों पर और शाम तीन पैरों पर चलता है”. ओडेपस ने उत्तर दिया कि “आदमी ही बचपन में चारों पैरों से रेंगता है, बड़े होने पर दो पैरों पर चलता है और बुढ़ापे में लकड़ी का सहारा लेता है” यह पहली बार था कि किसी ने स्फिंक्स को सही उत्तर दिया था. उत्तर सुनते ही स्फिंक्स वहीं मृत होकर ढेर हो जाती है और इस तरह थेबेस वासियों को उस दुष्ट स्फिंक्स से छुटकारा मिल जाता है. थेबेस के नागरिक प्रसन्न होकर ओडेपस को अपना राजा नियुक्त करते हैं और विवाह में विधवा रानी जोकस्ता का हाथ भी उसे सुपुर्द कर देते हैं. ओडेपस और रानी जोकस्ता के इस संबंध से चार बच्चे होते हैं, दो लड़के पोलिनिसेस और इतिओक्लेस और दो लड़कियाँ अन्तिगोने और इसमेने.

ओडेपस और जोकस्ता के शादी के कई साल बाद, एक बार थेबेस नगर में प्लेग की बीमारी फैलती है. लोगों में त्राहि त्राहि मच जाती है. ओडेपस दंभ में आकर कहता है कि वह इस बीमारी को भगा देगा. सलाह लेने के लिए वह रानी जोकस्ता के भाई क्रिओं को  डेल्फी के पुरोहित (ओरेकल) के पास भेज देता है. उसके वापस आने पर ओडेपस को बताया जाता हैं कि नगर को बचाने के लिए पूर्व राजा लाईअस के हत्यारे को ढूंड कर उसकी हत्या कर देनी होगी या फिर देश के बाहर करना होगा. राजा के हत्यारे की सही पहचान करने के लिए ओडेपस डेल्फी के पुरोहित, तिरेसियस को, जो अब अँधा हो चला था, बुला भेजता है. तिरेसियस सब कुछ जानता था परंतु वह बताना नहीं चाहता था. वह सलाह देता है “तुम उस हत्यारे की खोज करना बंद कर दो, तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा”. ओडेपस नाराज़ होकर तिरेसियस को बुरा भला कहने लगता है. उत्तेजना में आकर तिरेसियस बता बैठता है  “जिस को ढूंड रहे हो वो तो तुम खुद ही हो और एक शर्मनाक जीवन बिता रहे हो”. ओडेपस यह सब सुनकर स्तब्ध रह जाता है. उसे इन बातों पर विश्वास नहीं होता और पुनः अपनी खोज में लग जाता है. उधर कोरिन्थ से राजा पोलिबस की मृत्यु का समाचार लेकर एक संदेशवाहक पहुँचता है. वह यह भी बताता है कि ओडेपस  को मृत राजा ने गोद लिया था. जोकस्ता को तो सब कुछ समझ में आ जाता है और वह ओडेपस से विनती करती है कि वह लाईअस के हत्यारे की तलाश करना छोड़ दे. फिर वह अपने महल की ओर बढ़ जाती है. ग्लानि से अपने कक्ष में पहुच कर आत्म हत्या कर लेती है.

संदेशवाहक के द्वारा बताई गयी बातों की सत्यता परखने के लिए ओडेपस उस बूढ़े हो चले चरवाहे से भी मिलता है और वह भी इस बात की पुष्टि करता है कि जिस बच्चे को पोलिबस ने गोद लिया था वह पूर्व राजा लाईअस और जोकस्ता की ही संतान थी. अब कहीं जाकर ओडेपस के सभी भ्रम दूर होते हैं. वह समझ जाता है कि थेबेस की ओर जाते हुए जिस व्यक्ति की हत्या उसके हाथों से होती है वह उसका ही पिता  लाईअस था. उसकी मृत्यु के कारण ही उसे राजा बनाया गया था और यह भी कि उसने अपनी ही माँ जोकस्ता से ही शादी भी कर ली थी.

घोर पश्चाताप और आत्म ग्लानि से ग्रसित हो ओडेपस अपनी माँ से मिलने उसके कक्ष में जाता हैं और तब उसे पता चलता है कि जोकस्ता ने आत्म हत्या कर ली है. मृत शरीर के चारों ओर घूमता है और तभी उसे अपनी माँ के गाउन में खुंची हुई सलाइयाँ मिल जाती हैं. उनसे वह स्वयं ही अपनी आँखें निकाल देता है. अँधा हो चले ओडेपस अब पश्चाताप की आग में झुलसता हुआ थेबेस नगर को छोड़ निकल पड़ता है.  मदद के लिए उसकी बेटी अन्तिगोने साथ हो लेती है. गाँव गाँव भटकते भटकते अंत में उसकी मृत्यु कॉलोनस नामक जगह में हो जाती है. मृत्यु के पूर्व अथेन्स के राजा थेसियस ने उसे अपनी अभिरक्षा में ले लिया था.

 

37 Responses to “ओडेपस ने अपनी माँ से शादी की थी!”

  1. लावण्या Says:

    फ्रोइड महाशय ने इसीलिये तो “ओडीपस कोम्प्लेक्स ” की थियरी प्रतिपादीत की थी – Truth is stranger then fiction !!
    – लावण्या

  2. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    यह कथा सुंदर है, जीवन जीने की कला और निषिद्ध संबंधों के लिए भय उत्पन्न करती है। पर इस की सचाई संदिग्ध है।

  3. amar jyoti Says:

    दिनेश जी ! यह तो एक पौराणिक कथा है व इसका सच्चाई से इतना ही सम्बन्ध है जितना किसी भी पौराणिक गल्प का हो सकता है।तत्कालीन मानव-समाज और मानव-मस्तिष्क में झांकने की खिड़की मात्र होती हैं ऐसी कथायें।

  4. Arvind Mishra Says:

    अब इतना अच्छा लिखने के बाद आपके लिए एक होमवर्क _
    १-इस कहानी और इस ब्लॉग पर पहली पोस्ट कुणाल की कथा के साम्य को बताएं और व्याख्या करें !
    २-बालक प्रहलाद और इस कथा की समानताओं को परखें -कहीं प्रहलाद और होलिका का कोई इडिपल एंगल तो नही था ?
    ३-कहीं इन सभी कहानियो का उदगम एक तो नहीं जो समय और स्थान के बदलाव से कालांतर में यथानुकूल रूप में परिवर्तित होती गयीं और आज हमारे सामने विविध रूपों में प्रस्तुत है !
    आप अपनी अगली पोस्ट भी इस क्वेरी पर करने का विचार कर सकते हैं !
    @अरविंद मिश्रा जी:

    कोई भी ब्लॉगर ऐसे प्रस्ताव से प्रसन्न हो जाता. क्योंकि अगली पोस्टों के लिए बना बनाया मसाला मिल रहा है. जब हमने कुणाल की कहानी दी थी उस समय भी हमें ओडेपस याद था लेकिन बहुत बड़ा अंतर है. एक जानता था कि उसकी विमाता है दूसरा अंजान था और केवल राज धर्म का पालन किया. प्रहलाद की कहानी पर तो रात भर का प्रवचन होता है.
    रही समानता की बात, हमारी तो मान्यता है की तथाकथित आर्यन सभ्यता का उदगम स्थल भारत ही है और यहीं से पश्चिम की ओर हवा चली है. पारसियों के ग्रंथ अवेस्ता और ऋग्वेद में भी कई समानताएँ मिल रही हैं. अभी अभी एक सुसन की किताब पढ़ी जिसमे कहा जा रहा है की कश्मीर यहूदियों का मूल स्थान था. ब्रह्मा ही अब्राहम है.
    हम क्षमा प्रार्थी हैं. अपना सर और ना खपाएँगे. वैसे अब कुछ रह भी नहीं गया है. (भेजे में)
    सार्थक टिप्पणियों के लिए आभार.
    सुब्रमणियन

  5. nirmla.kapila Says:

    bahut hI ashchrya janak kathaa hai jise maine pahali baar suna hai

  6. nirmla.kapila Says:

    बहुत ही आश्चर्यजनक कथा है जिसे मैने पहली बार पढ़ा है धन्यवाद

  7. संजय बेंगाणी Says:

    पौराणिक कथाएं पढ़ने में अच्छी होती है, और कई धाराओं में सोचने पर मजबूर कर देती है.

  8. seema gupta Says:

    आश्र्य्जनक भी है और हैरत मे डालने वाली भी …..

    Regards

  9. ranju Says:

    यह कहीं पढा था पर पूरी जानकारी इस विषय में आज ही पढ़ी इस लेख के माध्यम से ..हैरान कर देने वाला वृत्तांत है यह ..

  10. satish saxena Says:

    बहुत वर्षों बाद यह कथा पढ़ी ,बढ़िया एवं ज्ञानवर्धक लेखों एवं लेखन शैली के लिए शुभकामनायें !

  11. ताऊ रामपुरिया Says:

    सुन्दर लेखन और आश्चर्यजनक.

    रामराम.

  12. विनय Says:

    ज्ञानवर्धक लेख

  13. Vineeta Yashswi Says:

    पौराणिक कथाए पढ़ना हुमेशा ही अच्छा लगता है.
    सुन्दर और ज्ञान वर्धक लेख

  14. विष्‍णु बैरागी Says:

    अद्भुत, अविश्‍वसनीय और आपवादिक। कौतूहल से पढना शुरु किया और अविश्‍वास से समाप्‍त किया। ऐसे आख्‍यान केवल अविश्‍वसनीय वक्‍तव्‍यों को पुष्‍ट करने में सहायक होते हैं।
    सुन्‍दर कथा सुनाई आपने।
    धन्‍यवाद।

  15. Ranjan Says:

    अच्छी लगी..

  16. sareetha Says:

    अदभुत रचना और उस पर आपका अनूठा प्रयास ला जवाब । ईमेल के ज़रिए सूचना देकर इतनी अच्छी रचना पढवाने के लिए शुक्रिया । इस तकनीकी सुविधा के बारे में हमें भी बताइएगा वक्त मिलने पर ।

  17. Brijmohanshrivastava Says:

    आपके द्वारा वर्णित तो यह एक घटना विशेष है /जब हम विवाह शब्द वाबत विचार करते है तो हमारा ध्यान anthropology की ओर जाता है उसमे विवाह वावत टायलर ,मदान, फ्रेजर ,और श्यामा चरण दुबे ने गहन अध्ययन किया है /gratification &procreation के अलावा आर्थिकसहयोग व्यक्तित्व – विकास पारिवारिक और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे कई तथ्य काम करते हैं /अनुलोम या प्रतिलोम विवाह भी होते है और दादा =पोती , दादी – पोता विवाह भारतीय गोड जनजातियों ,उत्तर प्रदेश व उत्तरी नाइजीरिया के कुछ भागों में प्रचलित हैं जिनका उद्देश्य मात्र संपत्ति प्राप्त करना होता है / लुशाई पर्वत पर बसी लाखेर जन जाती तथा सेमा नागाओं में एक पुत्र अपने सगी माता को छोड़ कर अन्य सभी सौतेली विधवा माताओं से विवाह करता है जिसका उद्देश्य मात्र संपत्ति पर अधिकार प्राप्त करना होता है

  18. amita neerav Says:

    unani pauranik katah ke liye dhanyavad

  19. हरि जोशी Says:

    बहुत दिनों बाद एक बार फिर ये कथा पढ़ी। ऑडीपश थ्‍योरी याद आई और याद आए अपने एक बुजुर्ग मित्र जो हमेशा इस कथा के नाट्य रूपांतर के मंचन को ला‍लायित रहते थे।

  20. हिमांशु Says:

    इस पौराणिक कथा के लिये आपका धन्यवाद.

  21. राज भाटिया Says:

    सुब्रमणियन जी यह कहानी मेने कुछ समय पहले ही कही पढी थी,बहुत रोचक, हो भी सकता है, फ़िर से आप के यहां पढ कर बहुत अच्छा लगा.
    धन्यवाद

  22. common man Says:

    बहुत सुन्दर वर्णन, बहुत रोचक, आपके लिखने की शैली बहुत रोचक है, आनन्द आ गया. इस कथा के अतिरिक्त यवन सुन्दरी वाला किस्सा भी बहुत मजेदार है. धन्यवाद.

  23. mohan vashisth Says:

    क्‍या आश्‍चर्यजनक और अदभुत
    इस कथा को पढवाने के लिए धन्‍यवाद

  24. Pratap Says:

    सचमुच बहुत ही अद्भुत कथा है यह. पौराणिक कथाओं की विश्वसनीयता सदैव ही संदिग्ध रही है…कारण समय अपना रूप बदल चुका होता है…हमारी मान्यताये, परम्परा और विश्वास सब कुछ बदल चुका होता है.
    दो बातें तो इस कथा से बिल्कुल स्पष्ट हैं —
    १. जब भी कथा लिखी गई उस समय भी मानवीय रिश्तों की परम्परा और आधार आज से बहुत भिन्न नही था जिसकी वजह से कथाकार को अंततः ग्लानि और क्षोभ का अतिरेक दिखाना पड़ा.
    २. इस कथा का पृष्ठ भूमि ईशा पूर्व ७ वीं शताब्दी का है जब सभ्यता अपने बाल्यकाल में रही होगी और इसका ही लाभ लेते हुए कथाकार ने एक विस्मयकारी कथा लिखी. स्वयं की रक्षा करने हेतु उसने विधि को कवच बनाया.

  25. vidhu Says:

    kathaa adbhut hai .pouaaraanik kahaaniyaan ab kahan padhne ko milti hain….odipas granthi manovigyaan main padhi hai,,,bashaai

  26. sandhya gupta Says:

    Sophocles ke dwara likhi gayi greek tragedy Oedipus Rex me yah kahani pehle padhi thi. Kintu ‘bhagya’ aur ‘swantra sankalp’ (free will) jaise vishyon ko chune wali is kahani ko dubara padh kar achcha laga.

  27. डा. अमर कुमार Says:


    आदरणीय सुब्रह्ममनियम जी, मनोविज्ञान में अभिरूचि रखने वाला
    हर सामान्य व्यक्ति यह जानकारी रखता ही होगा । सिगमण्ड फ़्रायड की इस आधुनिक
    थ्योरी ने बड़े दिनों तक अपनी मान्यता बनाये रखी ।
    क्या ज़रूरत इस बात की नहीं है,कि हम अपने अतीत के अनछुये पहलुओं को सामने
    लायें ? इतना कुछ है, जिनसे एक प्रबुद्ध व्यक्ति भी अपरिचित है ।
    हमने अपने अतीत के सत्य इस हद तक भुला दिये हैं, कि जब कहीं विदेशों में उल्लेख
    किया जाता है.. तो हमें स्वयं ही आश्चर्य होता है ।
    मुझे जब भी पर्याप्त समय मिलेगा, मैं यह अवश्य करना चाहूँगा ।
    इस दिशा में अभी आप आगे बढ़ें, तो मुझे भी बल मिलेगा ।
    कहने की बात नहीं, कि यह आलेख तो बेहतरीन बन पड़ा है ।

  28. alpana verma Says:

    अनजाने में की गई एक गलती अन्ततः घोर ग्लानी और दुःख ,क्षोभ का कारण बनी.
    ईसा से पूर्व की यह कथा सच में अद्भुत है.

  29. mohan vashisth Says:

    गणतंत्र दिवस की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं

    http://mohanbaghola.blogspot.com/2009/01/blog-post.html

    इस लिंक पर पढें गणतंत्र दिवस पर विशेष मेरे मन की बात नामक पोस्‍ट और मेरा उत्‍साहवर्धन करें

  30. ghughutibasuti Says:

    यदि भाग्य, विधि का विधान ही सबकुछ नियन्त्रित करता है तो फिर मानव का क्या दोष? मेरे विचार में माता और पुत्र दोनों निर्दोष थे। यदि किसी को आत्महत्या करनी या आँखें फोड़नी चाहिए थीं तो वह भाग्य या विधाता को ही करना चाहिए था।
    जब जब मैंने इस कहानी को पढ़ा है यही सोचा है।
    घुघूती बासूती

  31. dhirusingh Says:

    भाग्य इतना खराब भी न हो . बेटा बाप को मारे और माँ से ………. .

  32. sameer lal Says:

    निश्चित ही पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियाँ अक्सर हैरत में डालती है..उसी कड़ी में यह कथा पढ़कर बहुत अचरज हुआ और अंत हर परिपेक्ष में स्वभाविक सा था. और क्या अंत होता ऐसी कथा का.

  33. sameer lal Says:

    जो भी हो, कथा बहुत रोचक, पठनीय और जानने योग्य रही. आपका आभार.

  34. Gagan Sharma Says:

    आश्चर्य हुआ लोगों की यादाश्त देख। किसी एक भी टिप्पणीकर्ता को 18 अक्टूबर को मेरी पोस्ट पर लिखी इसी कहानी की कोई याद नहीं।
    अब तो लगने लग गया है कि अधिकांश टिप्पणीयां बिन पढे सिर्फ उपस्थिति जताने को ही की जाती हैं।

  35. Rajesh soni Says:

    बहुत वर्षों बाद यह कहानी पढ़ी ,पौराणिक कथाएं पढ़ने में अच्छी होती है लेखन शैली के लिए शुभकामनायें!

    ,

  36. हम हैं इस पल यहाँ, जाने वो हैं कहाँ : चिट्ठा चर्चा Says:

    […] ओडेपस की ये कथा को ही ले लीजिये जिसमें ओडेपस ने अपनी माँ से शादी की थी बताया जा रहा है – ग्रीस जिसे हम यूनान […]

  37. hari singh Says:

    I have heard from some one that Mangolian Changase Khan, had also married with his Mother. Whether, it can be confirm by any one.

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