विश्व का विशालतम शिव

िवात्रि के इस अवसर पर विशेष प्रस्तुति

gouri-phoniपेरिअप्पा पेरिअप्पा आप इस महाशिवरात्रि के लिए मुरुदेश्वर के शिव के बारे में लिखिए न. मुंबई से हमारी भतीजी गौरी ने कहा.    तो फ़िर तू ही लिख दे न. नहीं न  पेरिअप्पा अभी एक्साम्स हैं. अभी लिखने बैठूंगी तो अम्मा खा जायेगी, अच्छा आप का नाम ले लूंगी. हमने बिना सोचे विचारे ही कह दिया जरुरत नहीं है. मन ही मन हमने सोचा कही परीक्षा में नंबर कम आए तो नाहक हम कारक न बन जायें. लीजिये फ़िर इस शिवरात्रि पर विशेष.

old-templeरावण शिव जी का परम भक्त था. एक बार रावण ने खूब तपस्या करी और शिव जी को प्रसन्न कर दिया. वरदान स्वरुप रावण ने शिव जी से “अत्मलिंग” की मांग रखी. शिव जी ने कहा  ठीक है लेकिन इसे जमीन पर मत रखना  नहीं तो फ़िर वह वहां से नहीं उठेगा. रावण “अत्मलिंग” को हाथ में लिए लंका के लिए निकल पड़ा. इस लिंग के प्राप्ति पर रावण अमर और अदृश्य हो सकता था. नारद मुनि को इसकी भनक लग गई थी. वे सीधे विष्णु जी के पास पहुंचे और कहा नारायण अनर्थ होने जा रहा है.murudeswar1 दुष्ट रावण भूलोक ही नहीं बल्कि देवलोक में भी हाहाकार मचायेगा. उसे रोकिये. तब तक तो रावण गोकर्ण तक पहुँच ही गया था. विष्णु  ने अपना करतब दिखाया. मध्याह्न में ही सूर्य को ढँक कर संध्या का भ्रम निर्मित किया. रावण शिव जी की सांध्य पूजा किया करता था. अब वह धर्म संकट में पड़ गया. इस बीच नारद ने गणेश जी को भी पटा लिया था जिसके कारण गणेश जी स्वयं ब्राह्मण  के वेश में रावण के समीप प्रकट हो गए. रावण ने उस ब्राह्मण स्वरुप गणेश जी से आग्रह किया कि वह उस अत्मलिंग को अपने हाथों में रखे ताकि वह सांध्य पूजा कर सके. ब्राह्मण ने बात मान ली परन्तु कह भी दिया कि आवश्यकता पड़ने पर तीन बार ही पुकारेगा और फ़िर उस लिंग को छोड़ कर चलता बनेगा. रावण ने “अत्मलिंग” को ब्राह्मण के हवाले कर पूजा करने निकल पड़ा. रावण के जाते ही गणेश जी ने उस लिंग को वहीं (गोकर्ण) रख दिया और अंतर्ध्यान हो गए.  रावण अपनी पूजा से निपट कर जब वापस आया तो अत्मलिंग को जड़वत पाया. उसने उठाने कि भरसक कोशिश की पर सफल न हो सका. फ़िर क्रोध में आकर अत्मलिंग के अलग अलग भागों को उखाड़ कर इधर उधर फेंकने लगा. जिस वस्त्र से लिंग ढंका हुआ था वह आकर मुरुदेश्वर में गिरा और तब से एक महत्वपूर्ण शिव क्षेत्र के रूप में प्रसिद्द हुआ.

dscn0013यहाँ का प्राचीन शिव मन्दिर समुद्र के किनारे कंदुकागिरी पर बना है और उसकी बनावट, शिल्प आदि से चालुक्य – कदम्ब शैलियों का मिश्रित प्रभाव परिलक्षित होता है. मन्दिर के अन्दर के शिल्प और कलात्मकता लुभावनी है. इस मन्दिर की देखरेख के लिए प्रबंधक के रूप में श्री मंजुनाथ शेट्टी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होने स्वेच्छा से सिंडिकेट बैंक के अपने अधिकारी पद से सेवा निवृत्ति ले ली थी.  यहाँ की एक विशेषता यह है कि इस मन्दिर के आस पास भीख मांगने वाले नहीं दिखेंगे. कोई भी दूकानदार पूजा सामग्री खरीदने के लिए भी आपके पीछे नहीं पड़ेगा. कुछ बच्चे जरूर घूम रहे होते हैं जो वहां के चित्रों को बेचने में लगे हैं. पाँच रुपये के दस. मन्दिर के पीछे एक पुराना किला भी है और कहा जाता है कि टीपू सुलतान ने इस किले का जीर्णोद्धार कराया था.

muruमुरुदेश्वर की आज कल की प्रसिद्धि तो यहाँ के विशाल शिव जी के कारण हो गई है. यह प्रतिमा उसी कंदुका गिरी के शीर्ष पर बनी है, पुराने मन्दिर के ऊपर कुछ दायीं ओर. मूर्ति की ऊँचाई १२३ फीट है जिसके कारण दूर दूर से ही दिखाई भी देती है. शिव जी के एकदम नीचे पैरों तले एक सुरंग नुमा हाल है. यहाँ पर पौराणिक कथाओं के आधार पर झांकिया बनी हैं. रावण, गणेश जी ब्राह्मण के वेश में और ऐसी ही कथाओं से सम्बंधित अन्य प्रतिमाएँ रखी है. इनके बारे में कन्नड़ और हिन्दी में कमेंट्री चलती है. अतिरिक्त शुल्क देकर अंग्रेजी का केसेट भी लगवाया जा सकता है. यह सब अभी अभी ही किया गया है.   जहाँ एक तरफ़ शिव जी की यह प्रतिमा विशालतम है वहीं  इन तक आने के लिए सिंह द्वार पर राजगोपुरम जो बना है वह भी बेमिसाल है. इसकी ऊँचाई २४९ फीट है और इसके मुकाबले कोई दूसरा गोपुरम नहीं है. गोपुरम के दरवाजे पर ही दो विशाल हाथी द्वारपाल के रूप में बनाये गए हैं.    इस पहाडी के तीन ओर समुद्र है जो अपेक्षाकृत शांत है. लगा हुआ बीच भी है जो साफ़ सुथरी और मनमोहक है. यहाँ नग्न या अर्ध नग्नावस्था में रेत पर लेटे रहना निषिद्ध है हलाकि विदेशी पर्यटकों की यहाँ कोई कमी नहीं है.    कुछ दूरी पर रेत पर ही कई नौकाएं दिखेंगी. शाम होते होते समुद्र से आखेट कर नौकाएं वापस आती दिखती हैं. उनके वापसी पर वहां मछलियों की बिक्री भी होती देख सकते हैं.

dscn0014यहाँ आस पास ही ४ होटल हैं. बगीचे से लगा हुआ एक रेस्ट हाउस है जहाँ रहने का किराया जेब पर भारी नहीं पड़ता. मन्दिर की ओर जाते समय समुद्र से सटा हुआ ‘नवीन बीच रेस्टोरेंट’ बड़ी अच्छी जगह बना है. अन्दर नाश्ता करते हुए समुद्र का नज़ारा बड़ी संतुष्टि दायक होती है.

murudeswarमुरुदेश्वर में इस  विश्व के सबसे ऊंचे शिव जी, भव्य राज गोपुरम, पर्यटकों के लिए सुविधाएँ आदि की व्यवस्था करने के लिए पूरा का पूरा श्रेय  श्री आर.एन. शेट्टी, को जाता है जो यहाँ के एक प्रमुख उद्योगपति हैं. उन्होंने मुर्देश्वर को एक बड़े पर्यटन केन्द्र के रूप में विकासित करने के लिए ५० करोड़ रुपये की राशि लगायी थी. इन सबके आलावा मुरुदेश्वर में कुछ बहुत ही सुंदर थीम पार्क भी हैं..

मुरुदेश्वर कर्णाटक के भटकल तहसील में मुंबई – थिरुवनन्थपुरम रेल मार्ग पर पड़ता है और गाडियां यहाँ रूकती भी हैं. बीकानेर और जोधपुर से भी रेलगाडियां मिलती हैं. दिल्ली की ओर से आने के लिए कोंकण मार्ग पर जानेवाली गाड़ियों को चुना जा सकता है. गोवा से मुर्देश्वर की दूरी मात्र १६० किलोमीटर है. यहाँ से उडुपी भी नीचे १०० किलोमीटर की दूरी पर है. मुरुदेश्वर स्टेशन से मन्दिर या बीच तक के लिए ऑटोवाले २० रुपये लेते हैं. हुबली में उतरकर भी यहाँ आया जा सकता है.

53 Responses to “विश्व का विशालतम शिव”

  1. sanjay vyas Says:

    सम्पूर्णता को समेटे सुंदर विवरण.जोधपुर से इस स्थल की कनेक्टिविटी बताने का आभार.

  2. Ratan Singh Says:

    बहुत अच्छी जानकारी !

  3. manvinder bhimber Says:

    महा shivratri की शुभ kaanaayen ….बहुत अच्छी जानकारी

  4. amar jyoti Says:

    रोचक जानकारी।रेल-सम्पर्क और ठहरने के बारे में भी जानकारी देने से आलेख और भी उपयोगी हो गया है।

  5. seema gupta Says:

    बहुत रोचक जानकारी। शिवरात्रि के पावन अवसर पर बहुत बहुत शुभकामनाये

    Regards

  6. विष्‍णु बैरागी Says:

    सदैव की तरह एक और सुन्‍दर पर्यटन वर्णन । वीडियो से बात और अधिक जल्‍दी तथा अधिक स्‍पष्‍टता से समझ आई।
    इस सबके लिए धन्‍यवाद।

  7. Satish Saxena Says:

    मुरुदेश्वर के दर्शन कराने के लिए आपका शुक्रिया !

  8. nitin Says:

    रोचक जानकारी! धन्‍यवाद।

  9. sameer lal Says:

    पर्व विशेष पर विशिष्ट जानकारी के लिए बहुत बहुत आभार. आपको महाशिवरात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  10. pradeep manoria Says:

    सुंदर कमाल अद्भुत रोचक आलेख …………! मेरे ब्लॉग पर पधार कर “सुख” की पड़ताल को देखें पढ़ें आपका स्वागत है
    http://manoria.blogspot.com

  11. हिमांशु Says:

    इस विशिष्ट जानकारी के लिये आभार. आपको महाशिवरात्रि की शुभकामनायें.

  12. anupam agrawal Says:

    शिवरात्रि के पावन पर्व पर साक्षात दर्शन कराने के लिये आभार .

    सजीव चित्रण के लिये बधाई

  13. arsh Says:

    पर्व विशेष पर विशिष्ट जानकारी के लिए बहुत बहुत आभार. आपको महाशिवरात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

  14. ताऊ रामपुरिया Says:

    आपको महाशिवरात्रि की बहुत शुभकामनाएं और इस पावन पर्व पर इस जानकारी के लिये बहुत
    धन्यवाद.

    रामराम.

  15. mahendr mshra Says:

    महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामना

  16. Gagan Sharma Says:

    इतनी अच्छी जानकरी देने के लिये बहुत-बहुत आभार। मौका मिला तो जरूर दर्शन करने जाउंगा।
    पर एक बात समझ में नहीं आयी विडिओ का 75% भाग मछलियों ने क्यूं संभाल रखा है ?

  17. anuradha srivastav Says:

    विशिष्ट जानकारी के लिए बहुत बहुत आभार……….

  18. हरि जोशी Says:

    मनमोहक तस्‍वीरें और उपयोगी जानकारी के‍ लिए हम हमेशा की तरह इस बार भी आपके आभारी हैं।

  19. ranju Says:

    बहुत ही रोचक जानाकारी दी है आपने ..इस पावन पर्व पर ..शुक्रिया

  20. puja Says:

    रावण को कितनी जगह रोका गया था आपके लेख को पढ़ कर पता चल रहा है…हमारा यहाँ बैद्यनाथ धाम की भी यही कहानी है, वहां का ज्योतिर्लिंग भी ऐसे ही रावण को रोकने के कारण वहां स्थापित हुआ…वो कहानी आज हमने भी लिखी है…अब आपके ब्लॉग पर आई तो देखा की यहाँ भी रावण को रोक दिया गया. पता नहीं…बड़ा कंफ्यूजन है.

  21. alpana verma Says:

    पावन पर्व महाशिवरात्रि के दिन इतनी अच्छी पोस्ट .धन्यवाद.
    सुंदर चित्र और यह जानकारी पहली बार इतनी details में मिली.आप की भतीजी गौरी को मेरी तरफ़ से ख़ास धन्यवाद दिजीयेगा.आखिर यह उसका सुझाव है तो श्रेय उसी को मिलना चाहिये..

    http://www.alpana-verma.blogspot.com

  22. नरेश सिंह Says:

    आपने हमेशा की तरह इस बार भी सुंदर चित्र के साथ बहुत ही रोचक जानकारी दी है धन्यवाद

  23. Isht Deo Sankrityaayan Says:

    अच्छी जानकारी दी है. धन्यवाद. वैसे यहाँ कथा बहुत हद तक देवघर स्थित रावणेश्वर महादेव की कथा से भी मिलती है.

  24. विष्‍णु बैरागी Says:

    आज सवेरे आपकी यह पोस्‍ट पडी थी। अभी-अभी, पूजाजी उपाध्‍याय की पोस्‍ट ‘बैद्यनाथ धाम की कहानी’ पढी। उनका कहना है कि जो घटना आपने ‘मुरुदेश्‍वर’ की बताई है, वह तो ‘देवधर’ में हुई थी। पूजाजी की पोस्‍ट इस पते पर पडी जा सकती है –
    http://laharein.blogspot.com/2009/02/blog-post_23.html
    हम आप दोनों की बातों पर भरोसा करनर चरहते है किन्‍तु सच तो कोई एक ही होगा।
    आप दोनों मिल बैठ कर तय कर लें कि आप दोनों के पाठक किसे सच मानें।

  25. राज भाटिया Says:

    अजी सब से पहले तो गौरी बेटी का बहुत बहुत धन्यवाद, जिस के आग्रह पर आप ने इतनी सुंदर पोस्ट लिख दी, बहुत सुंदर चित्र ओर साथ मे विडियो, ओर बहुत सारी कहानी, यह रावण के बारे पहली बार पढा है. आप का भी धन्यवाद

  26. sanjay vyas Says:

    पूजा जी, महान कथाओं के कई लौकिक पाठ या संसकरण होते है. फादर कामिल बुल्के ने शताधिक राम कथाओं के अस्तित्व की बात कही थी,जिनमे संथाली जैसी भाषाओं की अपनी रामायण भी शामिल है.आश्चर्य नही कि एक अयोध्या थाई लैंड में भी है.भारत के लगभग हर गाँव में पांडवों के अज्ञात वास करने के किम्वदंती प्रचलित है.किसी आख्यान के बारे में ये जानना अपने आप में humbling experience है.कृपया मुझे इस विषय का जानकार न समझा जाय वरन मैं तो आपको सहज जिज्ञासा वृत्ति पर बधाई दे रहा हूँ.

  27. dhirusingh Says:

    शिवरात्रि के उपलक्ष्य पर शिवजी के दर्शन ,धन्य है आप

  28. Shastri JC Philip Says:

    सबसे पहले तो चित्र देखे, फिर वीडियो देखा, और फिर आराम से आलेख को पढा. काफी अच्छा लगा कि एक बार और हिन्दुस्तान के वास्तुशिल्प के बारे में जानने का मौका मिला.

    चालुक्य-कदंब सुन कर अच्छा लगा. कितने महान थे हमारे पूर्वज्!!

    सस्नेह — शास्त्री

  29. दिनेशराय द्विवेदी Says:

    शिवरात्रि पर सुंदर जानकारी से प्रसन्नता हुई।

  30. ज्ञान दत्त पाण्डेय Says:

    मुरुदेश्वर के बारे में जानना बहुत भाया। एक ब्लॉग पर यह भी पढ़ा कि भागलपुर के पास बैजनाथ धाम में भी रावण फंसा था इस प्रकार।
    पूअर रावण! किसी भी अभियान पर चलने से पहले सारी शंकायें निपट कर यात्रा में कर्मकाण्ड के नियम बदल देने चाहियें।🙂

  31. Dr.Arvind Mishra Says:

    वाह भव्यतम ! कथा भी बहुत व्यापक है ! कभी देखने का सौभाग्य मिलें -साथ देख रही पत्नी तो अभिभूत हैं !

  32. मुसाफिर जाट Says:

    सुब्रमनियम जी,
    बढ़िया जानकारी दी आपने. इस बार तो चित्र भी भरपूर मात्रा में दे दिए हैं.

  33. Abhishek Mishra Says:

    बहुत ही सुंदर विवरण. इसमें जो एक बात और जुड़नी चाहिए वो यह की रावण ने जहाँ ‘शिवलिंग’ रखा वह स्थान झाड़खंड में ‘वैद्यनाथ धाम’ से प्रसिद्द है. देखिये शिव ने किस खूबी से सारे हिंदुस्तान को एक सूत्र में बाँध रखा है !

  34. संगीता पुरी Says:

    मुरुदेश्वर के दर्शन कराने के लिए आपका शुक्रिया !

  35. प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह Says:

    पूरी तन्‍मयता से पढ़ा काफी अच्‍छा लगा

  36. yoginder moudgil Says:

    वाह… दादा वाह… अच्छी जानकारी बतायीमन शिवमय हो गया….

  37. sareetha Says:

    आपकी पोस्ट पर जानकारियों के साथ बेहतरीन चित्र देखकर चमत्कृत होने के सिवाय कुछ और रास्ता ही नहीं बचता । हमें तो एक चित्र लगाने में पसीने छूट जाते हैं लेकिन यहाँ आकर्षक और बोलते चित्रों का अंबार आलेख में जान डाल देता है । शिवजी की अद्भुत प्रतिमा के साथ अन्य दृश्य भी नयनाभिराम हैं ।

  38. लावण्या Says:

    अच्छी जानकारी दी आपने और आपकी बिटीयाको परीक्षा मेँ सफल होने के लिये मेरे आशिष भी देँ
    वीडीयो मेँ, मँदिर भी घुमा देते तो और अच्छा होता ..

    बेचारी सिल्वर मछलियाँ !
    शिवजी के क्शेत्र मेँ स्वर्ग पा गईँ !!😉

    – लावण्या

  39. Satish Chandra satyarthi Says:

    बड़ी जानकारी बड़ी रचना
    धन्यवाद

  40. Smart Indian Says:

    बहुत रोचक जानकारी. धन्यवाद!

  41. संजय बेंगाणी Says:

    युवा अंग्रेजी में एक शब्द बोलते है, वही मैं लिख रहा हूँ, “वाऊ”.

  42. परमजीत बली Says:

    bahut achchi jaankari dee hai.aabhaar.

  43. साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन Says:

    अदभुत।

  44. common man Says:

    बहुत सुन्दर चित्रण, जानकारी तो बहुत बढ़िया है ही, साथ में चित्र बहुत सुन्दर हैं.

  45. ranjana Says:

    Waah ! Manmohak chitra aur sundar chitran…..

    Bahut bahut aabhar..

  46. varsha Says:

    shivraatri par shiv ki viraat pratima dekhkar din safal ho gaya, bahut hi bhavya pratima hai, ab to paas jaakar dekhne ka man karta hai..

  47. Brijmohanshrivastava Says:

    सुंदर भी रोचक भी /पुराणों में भी गजब के किस्से भरे है ,भगवान् लोग भी कितने चालक हुआ करते थे या कहलो जैसे के साथ तैसा करते थे /चित्रों के लिए बधाई

  48. prem sagar singh Says:

    झारखण्ड के देवघर में स्थापित शिवलिंग सम्भवतः रावण द्वारा छोड़ा गया शिवलिंग है। क्या मैं ठीक हूँ।

  49. hempandey Says:

    पौराणिक, ऐतिहासिक संदर्भों सहित पर्यटकीय महत्त्व वाले धार्मिक स्थल की यात्रा करवाने के लिए धन्यवाद.मध्य प्रदेश में भी भोपाल के निकट भोजपुर में एक विशालकाय शिवलिंग स्थित है.

  50. Vinay Kumar Vaidya Says:

    What a beautiful blog about Murudeshwar. Thanks.

  51. mamta Says:

    ये तो बहुत सुंदर मन्दिर है और फोटो सहित विस्तृत जानकारी देने का शुक्रिया ।
    शायद इसीलिए १२ जगह पर ज्योतिर्लिंग स्थापित है ।

    फोटो मे गौरी ही है ना ।

    देखते है मौका लगा तो इसे देखने जरूर जायेंगे ।

  52. brahmin-barcelona Says:

    main haryana key yamuna nagar jiley sey hoon or icc jagha aaney ki icha rakhta hoon…kabhi baba ney bulaya to jaroor aunga…aap ka kam bahut acha laga

  53. sadeep shetty Says:

    hi superb yar……

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