सौराष्ट्रीय जो तामिलनाडू में बसे हैं

sunकुछ माह पूर्व हमने एक आलेख “तामिलनाडू में एक महाराष्ट्र” के अर्न्तगत टूटी फूटी मराठी बोलने वाले तामिलनाडू के एक समाज की चर्चा की थी. उन दिनों हमारा ब्लॉग अपने शैशव अवस्था में था इसलिए कुछ गिने चुने लोगों ने ही उसे देखा या पढ़ा. आज हम आपको परिचित कराते हैं तामिलनाडू के एक ऐसे समुदाय से जो “सौराष्ट्रीय” कहलाते हैं और गुजराती से मिलती जुलती बोली बोलते हैं.

तामिलनाडू के मदुरै नगर में  मराठी बोलने वालों के साथ साथ एक समुदाय ऐसा भी है जो गुजराती से मिलती जुलती भाषा बोलता है जिन्हें सौराष्ट्रीय  कहा जाता है. इनकी संख्या हजारों में है और वहां ४०० वर्षों से रह रहे हैं. वैसे पूरे तमिलनाडु में ऐसे लोगों की संख्या १० लाख से अधिक ही होगी. रंग रूप में स्थानीय लोगों की तुलना में गोरे और सभी प्रकार के व्यवसाय से जुड़े हुए. इन में वर्णाश्रम की दृष्टि से ब्रह्मण भी है परन्तु अधिकाँश जुलाहे हैं जो रेशम के कपडे बुनने में दक्ष हैं. इन लोगों को तामिलनाडू में “पट्टूनूलकारन” अर्थात रेशमवाला कहते हैं. तमिल संस्कृति का उन पर इतना असर पड़ चुका है कि उन्हें स्थानीय लोगों से अलग कर पाना कठिन होगा. उनका खान पान रहन सहन, उनके नाम, धार्मिक अनुष्ठान (विवाह आदि) पर दृष्टिपात करें तो उन्हें तमिल समुदाय का अभिन्न अंग ही मानना होगा. Wedding

मूलतः सौराष्ट्रीय समुदाय जिनकी हम चर्चा कर रहे हैं, वर्त्तमान मध्य प्रदेश के पश्चिम में स्थित मंदसौर नगर के निवासी रहे. इस नगर को दासपुरा भी कहा जाता था.   किसी समय मंदसौर भी सौराष्ट्र का हिस्सा हुआ करता था. सौराष्ट्री लोग  सौर (सूर्य) के उपासक थे. सन ४३७ में मंदसौर के शासक बंधू वर्मा (जो कुमार गुप्त प्रथम का समकालीन था) के द्वारा एक सूर्य मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख शिलालेख में किया गया है. इस बात का भी उल्लेख है कि सूर्य मंदिर, नगर के रेशम उद्योग से जुड़े समुदाय के द्वारा बनवाया गया था. कुमारगुप्त के किसी अभिलेख में ऐसा कहा गया है कि ये लोग लता नामक किसी स्थल से मंदसौर पहुंचे थे. इन्हें “पट्टवाह” भी कहा गया है. वैसे “पटवा” आज भी मंदसौर में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं.

सन १०२४ से  मुहम्मद गजनी के द्वारा सोमनाथ मंदिर को बारम्बार लूटे जाने और पूरे क्षेत्र में अशांति फैलाये जाने के कारण इस समुदाय के लोग अपने घर द्वार छोड़ कर दक्षिण की ऑर निकल पड़े. कुछ सूरत में बस गए और एक बड़ी आबादी देवगिरी (दौलताबाद) पहुँच गयी जहाँ यादव शासन कर रहे थे. देवगिरी में सौराष्ट्रीय समुदाय लगभग दो सदियों तक बना रहा. वे वहां रच बस गए थे. परन्तु १२९४ में पुनः विपत्ति आई. मालिक काफूर जो दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन खिलजी का सेनापति था, ने युद्ध में यादव राजा रामचंद्र को परस्त कर बंदी बना लिया और भारी लूट पाट मचाई. एक बार फिर सौराष्ट्रीय लोग देवगिरी (दौलताबाद) से कोल्हापुर की तरफ बढ़ गए फिर वहां से विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी (किश्किन्दा) में बस गए. यहाँ उन्हें राजाश्रय प्राप्त हुआ था.

सन १५०९ में मदुरै, विजयनगर साम्राज्य के  कृष्ण देव राय के आधीन आ गया था. उसने वहां अपने सेनापति को सत्ता में बिठा दिया. संभवतः उन्हीं दिनों सौराष्ट्रियों का एक समूह  हम्पी से मदुरै भिजवाया गया. १५६५ के लगभग विजयनगर साम्राज्य का भी पतन हो गया और बहमनी सुलतान ने हम्पी नगर को उजाड़ दिया. सौराष्ट्री लोगों को वहां से भी पलायन करना पड़ा. क्योंकि उनके रिश्ते नाते मदुरै में पूर्व से बसे हुए थे, इसलिए सब के सब मदुरै पहुँच गए. सन १६२३ से थिरुमला नायकर मदुरै में शासन कर रहा था. उसके शासन में सौराष्ट्रियों को काफी प्रोत्साहन मिला. मदुरै से ही सौराष्ट्रीय समुदाय के लोग तामिलनाडू के अन्य भागों में फ़ैल गए. कांचीपुरम के रेशमी साडियों की तो सब जगह तूती बोलती  ही है. इसके पीछे भी हमारे सौराष्ट्रीय बंधुओं का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से बहुत बड़ा योगदान रहा है.Training dharamvaram

मंदसौर से मदुरै तक के इस लम्बी यात्रा में कई पड़ाव आये जैसा ऊपर बताया जा चुका है. इसका प्रभाव उनकी बोली पर पड़ना स्वाभाविक था. आज उनकी बोलचाल की भाषा में, गुजरती, मराठी, कोंकणी, तेलुगु और तामिल के कई शब्दों का समावेश हो चुका है. बातचीत में हमारे एक सौराष्ट्रीय मित्र ने बताया था कि उनकी भाषा वास्तव में शास्त्रीय गुजराती थी. गुजराती पर तो अरबी और फारसी का असर पड़ा परन्तु क्योंकि सौराष्ट्री लोग मुसलमानों के संपर्क से दूर रहे इसलिए उनकी भाषा संस्कृत के अधिक करीब है. उनका समृद्ध साहित्य भी हुआ करता था परन्तु अब कुछ भी शेष नहीं बचा. उनकी भाषा की वर्णमाला भी है परन्तु क्योंकि विद्यालयों में इस लिपि को पढाया नहीं जाता इसलिए उनके लोगों में भी अनजाना है.

उनकी लिपि निम्न प्रकार का है (स्रोत: विकिपीडिया)

sourashtra_vwl

sourashtra_conssourashtra_num

Advertisements

37 Responses to “सौराष्ट्रीय जो तामिलनाडू में बसे हैं”

  1. Ratan Singh Says:

    बहुत शानदार और ज्ञान वर्धक जानकारी देने के लिए आभार !

  2. प्रवीण त्रिवेदी ...प्राइमरी का मास्टर Says:

    वाह जी वाह !!
    बढ़िया जानकारी दी और हमने पाई!!

    हिन्दी चिट्ठाकारों का आर्थिक सर्वेक्षण : परिणामो पर एक नजर

  3. Abhishek Mishra Says:

    Ek baar punah anuthi jaankari di aapne. Apni virasat ke sanrakshan ke liye is samaj ko khud hi pahal karni hogi.

  4. बालसुब्रमण्यम Says:

    एक बार ट्रेन में मेरी मुलाकात कुछ गुजराती व्यापरियों से हुई जो तमिल नाड से थे। वे इतनी शुद्ध तमिल बोल रहे थे, कि मुझे अपनी मलयालम-मिश्रित तमिल पर शर्म आ गई। गुजराती एक व्यापारी कौम हैं और वे देश-विदेश के कई भागों में पाए जाते हैं। अब मदुरै के इन सौराष्ट्री तिमिल-गुजरातियों की जानकारी भी मिली। आभार।

  5. संजय बेंगाणी Says:

    सौराष्ट्र गुजरात का एक प्रांत है, मुझे लगा यहाँ के लोगो के बारे में है. जानकारी शानदार रही. गुजराती पर अरबी का बहुत असर हुआ है. लिपि देवनागरी से मिलती है. वहीं आपने जो लिपि यहाँ दिखायी है, वह दक्षिण की लगती है.

    एक बार फिर से जानकारी पूर्ण पोस्ट.

  6. tanu Says:

    my g.k s gonna b vry strong due to u…..
    thnx

  7. sandhya gupta Says:

    Jaankari ke liye dhanywaad.

  8. dhirusingh Says:

    पेट की खातिर कहाँ से कहाँ पहुच जाते है लोग .

  9. नरेश सिह Says:

    रोचक जानकारी है ।

  10. alpana verma Says:

    कांचीपुरम के रेशमी साडियों के सफल उद्योग में सौराष्ट्रीओं का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से बहुत बड़ा योगदान है.जानकार आश्चर्य हुआ.उनके वहां पहुँचने के कारण आदि का इतिहास भी जाना.
    नयी जानकारी मिली. धन्यवाद.

  11. पं.डी.के.शर्मा 'वत्स' Says:

    बिल्कुल नवीन जानकारी प्रदान की आपने……..ऎसा लगता है कि जैसे इस समाज के आगे भाषायी वैभिन्य कभी आडे नहीं आया हो।

  12. ताऊ रामपुरिया Says:

    बहुत शानदार जानकारी दी आपने. शुभकामनाएं.

    रामराम,.

  13. Vineeta Yashswi Says:

    Ek baar fir raochak aur bilkul nayi jankari di hai apne…

  14. nirmla Says:

    subramaniam ji apki post par mai sab se baad me is liye aati hoon ki ise dhian se padhna hota hai chunki maine bhraman adhik nahin kya to apki post me sare bhaarat me ghoomne ka avsar mil jata hai bahut hi bdiya jankaree dete hain apapke blog ppar poora bharat maujood hai badhai dhanyvad

  15. Dr.Manoj Mishra Says:

    एक बार फिर ज्ञानवर्धक जानकारी के लिए आपको धन्यवाद .

  16. Ranjan Says:

    साड़ी तो बहुत सुन्दर बनाई है… बहुत ज्ञा्नवर्धक आलेख.

  17. ranju Says:

    बढ़िया लगी यह जानकारी मुझे तो इस दिशा में कुछ भी पता नहीं था ..आपके ब्लाग पर नया ही जानने को मिलता है शुक्रिया

  18. - लावण्या Says:

    सौराष्ट्री कौम की सिल्क साडीयोँ के हम भी प्रशँसक हैँ –
    ये जानकारी भारतीय जनता के ऐतिहासिक स्थानाँतरण पर प्रकाश डालती पसँद आयी
    – लावण्या

  19. tasliim Says:

    Rochak evam gyanvardhak.

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  20. ali syed Says:

    हमेशा की तरह स्कालरली पोस्ट !

  21. MUSAFIR JAT Says:

    ये तो जी बड़ी ही अनोखी बात बताई है आज आपने.

  22. Vinay Kumar Vaidya Says:

    Very intersting information. I didn’t know that Dashpur (Mandsaur of M.P.) was a part of Saurashtra. It was also unteresting to know that Hampy is Kishkindha. I think it is the same as the one in Ramayana . I have lived in Surat. It is famous for silk. (It seems There is a ‘silk-root’ in India also !)
    Thanks and Regards.

  23. Gyandutt Pandey Says:

    मन्दसौर के पास का क्षेत्र/मालवा तो मुझे सांस्कृतिक मैल्टिंग पॉट लगता था। और आपकी यह पोस्ट उसकी याद दिला गयी।
    हमेशा की तरह महत्वपूर्ण पोस्ट।

  24. yoginder moudgil Says:

    SHaanDaar jaAnKaari ke liye SAADHUwaad

  25. Manish Says:

    Aapke aalekh ke dwara nayi Jaamkari Mili in logon ke bare mein. shukriya !

  26. mahendra mishra Says:

    “गुजराती से मिलती जुलती भाषा बोलता है जिन्हें सौराष्ट्रीय कहा जाता है”

    बहुत बढ़िया सचित्र ज्ञानवर्द्धक जानकारी देने के लिए आभार

  27. राज भाटिया Says:

    सौराष्ट्र के बारे पढ कर बहुत अच्छा लगा, आप के ब्लांग पर भारत के बारे बहुत अच्छी अच्छि जानकारी मिलती है.
    धन्यवाद

  28. Asha Joglekar Says:

    बहुत ही बढिया रही आपकी पोस्ट । महाराष्ट्र के लोग तामिलनाडू मे जाकर बस गये हैं तथा कर्नाटक मे भी हैं जिनकी बोली शिवकालीन मराठी से मिलती जुलती है । तथा अभी की मराठी से काफी अलग सी है । सौराष्ट्र के लोग भी तामिल नाडू में बस गये है और इनका मंदसौर से मदुरै तक का सफर भी काफी रोचक लगा । मंदसौर का नाम पढकर मेरी भी आँखों चमक गईं कुछ पुरानी यादें भी ताजा़ हो गईं। मंदसौर का पुराना नाम दशपुर था जहांतक मेरी जानकारी है दस गावों से मिलकर बना होने की वजह से इसे दशपुर कहा जाता था , फिर इसका रूप बिगड कर दसौड और फिर मसौड से मंदसौर हो गया । मेरे पिताजी वहां कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर थे और ६ वर्ष का लंबा समय वहीं बीता हमारा ।

  29. RAJ SINH Says:

    हमेशा की तरह , ज्ञानप्रद !

  30. रंजना. Says:

    waah !! ekdam nayo jankari rahi yah hamare liye…bada hi achchha laga…aabhar aapka.

  31. Smart Indian Says:

    आपकी श्रंखला काफी अच्छी चल रही है. मेरी खुशकिस्मती है कि तमिलनाडु के कुछ सौराष्ट्रियों से भी परिचय रहा और मराठीभाषी तमिलों से भी.

  32. Dr.Arvind Mishra Says:

    रोचक और ज्ञानवर्धक !

  33. anupam agrawal Says:

    रोचक और सुन्दर विवरण

  34. Rajesh Says:

    Very interesting and lots of information that makes one sit and think.

  35. ghughutibasuti Says:

    बहुत रोचक जानकारी। मैं जब भी सोमनाथ जाती हूँ एक विचित्र सी उदासी मुझे घेर लेती है। कल्पना में सोमनाथ पर बार बार हमला करने वाले का चित्र उभरता है।शायद गजनी समुद्र के रास्ते नहीं आया था किन्तु मुझे वह एक जहाज पर आता दिखता है और उदासी गहरा जाती है। चाहे मैं यहाँ की मूल निवासी नहीं हूँ परन्तु एक दर्द होता ही है। शायद यही दर्द मेरे सौराष्ट्रीय बन्धुओं को इतनी दूर तमिलनाडू ले गया था।
    घुघूती बासूती

  36. shobhana Says:

    बहुत ही ज्ञानवर्धक जानकारी
    आभार
    सदियों से उत्तर भारतीय लोग दक्षिण में व्यापर और मंदिरों के पूजारियों बारे में देखा पढा और सुना था किन्तु सौराष्ट्रियका तमिलनाडू में बसने की रोचक यात्रा का वर्णन बिल्कुल अनूठा है |मंदसौर का बार बार जिक्र हुआ है ,
    मै करीब १५ साल तक मंदसौर जिले में रही हुँ अतः पढकर अच्छा लगा .सचमुच वहा आज भी पटवा सरनेम प्रसिध है |
    कभी मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे श्री सुन्दरलाल पटवा भी मंदसौर जिले से ही है ।
    धन्यवाद
    शोभना चौरे

  37. T.R. BHASKAR Says:

    It is nice to read information about about Tamil Nadu’s Sourashtra People. But I want to clarify some more information is ” We are pre-Gujarati and Pre-Marati Speakers because of We migrated much before the Gujarat & Maharashtra seperated. By naturally we traditional Prohit & Weavers came to Tamil nadu By Three different periods. First migration took at the time Mohammed Gajni attach on Lord Somnath temple settled near Mysore and Salem. Second Migration took with Shivaji’s kindom employers and settled Tanjure of Tamilnadu. Third migration tool on Vijaya nakara period and settled Madurai and sourrounding places. The Script in the comment shown is not really sourashtra script and it is used by time being. Our script originally Devanagari script and it is very rare usage in Tamil nadu.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: