वज्रेश्वरी देवी का मंदिर और गरम पानी के कुंड

हमारे मुंबई प्रवास के समय आस पास घूमने लायक जगहों में वज्रेश्वरी के गरम पानी के कुंडों की बात चली थी. पता चला कि वहां वज्रेश्वरी देवी का एक मंदिर भी है. ज्वालामुखी से निर्मित पर्वतीय क्षेत्र है. विरार तो हमें जाना ही था सो सबर्बन (पश्चिमी) रेल द्वारा निकल पड़े थे और विरार भ्रमण के बाद भोजन कर एक मित्र, सल्वेजी, के वाहन में उनके साथ ही चले गए. विरार से १० किलोमीटर चलकर मुंबई से अहमदाबाद जाने वाले एक्सप्रेस हाईवे से जा मिले. इस हाईवे पर २ किलोमीटर उत्तर  चलकर दाहिनी ओर एक सड़क भिवंडी की ओर जाती है. इसी रास्ते पर २० किलोमीटर की दूरी पर है वज्रेश्वरी देवी का भव्य मंदिर.Outside Vajreshwari

मन्दाकिनी पर्वत की तलहटी के सुरम्य वादियों में, एक छोटी पहाडी पर कुल ५२ सीढियों को चढ़कर, सिंह द्वार को पार कर मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करते हैं. वहां से चारों तरफ की नैसर्गिक छटा बड़ी लुभावनी लगी. दाहिनी तरफ दूर एक नदी (तनसा) प्रवाहित हो रही थी. एक बड़े मंडप (हाल) के आगे गर्भगृह है. जिसमें तीन देवियाँ विराजमान हैं. रेणुका, वज्रेश्वरी और कालिका.Three Devis तीनों ही मूर्तियाँ संगेमरमर की बनी हुई हैं. वहां के पुजारी बड़े ही मृदुभाषी थे. उनसे ही पता चला कि वे गिरी गोसाईं सम्प्रदाय के हैं और इसी सम्प्रदाय द्वारा मंदिर की गतिविधियाँ संचालित होती हैं. DSC04298दर्शन कर हम लोगों ने मंदिर की परिक्रमा की. वहां एक हनुमान मंदिर तथा दत्त मंदिर भी है. पीछे कुछ दूरी पर गोसाईं सम्प्रदाय के कुछ संतों की समाधियाँ भी हैं. चारों तरफ का प्रांगण साफ़ सुथरा, पत्थर के फर्श से युक्त है. कुछ कुछ जगहों पर टूटा फूटा भी है. मंदिर के बाएं तरफ ही एक नाट्य मंच (योगिनी रंगमंच) भी बना हुआ है जिसे बेलों से आच्छादित किया हुआ है. यहाँ समय समय पर नृत्य नाटिकाएं, नाटक, गायन, प्रवचन आदि का कार्यक्रम होता रहता है.DSC04299

इस मंदिर के बारे में अनेकों जनश्रुतियां मिलती हैं. पेशवाओं की राजधानी पूना (वर्त्तमान पुणे) हुआ करती थी. बाजीराव पेशवा (१) के छोटे भाई चीमाजी अप्पा ने पुर्तगालियों के गढ़ वसई के किले की घेराबंदी कर रखी थी. स्वयं वज्रेश्वरी के निकट गणेशपुरी/अकलोली के पास पड़ाव डाला हुआ था. यह जगह पुणे से वसई जाने वाले मार्ग पर ही पड़ता है. यहाँ से वसई मात्र ३० किलोमीटर की दूरी पर ही है. वसई की घेराबंदी किये दो वर्ष होने को हो गए परन्तु विजय हाथ नहीं लग रही थी. चिमाजी अप्पा निराश हुआ जा रहा था.एक दिन निकट ही प्रवाहित होने वाले तनसा नदी के किनारे अपने प्रातः भ्रमण के समय  उसने पाया कि कोई एक संत जैसा दिखने वाला नदी से जल लेकर निकट के पहाडी पर जाया करता. उसे कौतूहल हुआ. दूसरे दिन वह उस संत के पीछे पीछे हो लिया. पहाडी पर पहुँचने पर संत ने अपनी कुटिया से कोई मूर्ति निकाली और अपने द्वारा लाये गए जल से अभिषेक किया. चीमाजी अप्पा धार्मिक प्रवृत्ति का होने के कारण वहां दंडवत हो गया और उस संत के साथ उसने भी देवी प्रतिमा की आराधना की. यह सिलसिला कुछ दिन चला. कहते हैं देवी प्रसन्न हो गयी और चीमाजी अप्पा के अभियान में परोक्ष रूप से मार्ग दर्शन देते रहने का आश्वासन भी दिया.

सन १७३९ में चीमाजी अप्पा अपने अभियान में सफल रहा और वसई का किला अंततः मराठों के कब्जे में आ गया. चीमाजी अप्पा ने इस विजय को वज्रेश्वरी देवी की अनुकम्पा मानते हुए, नव नियुक्त गवर्नर शंकर केशव फडके को आदेश दिया कि गणेशपुरी के निकट पहाडी पर ही वज्रेश्वरी देवी के लिए एक किलेनुमा मंदिर का निर्माण किया जावे. मंदिर में नित्य पूजा के लिए पुणे से गिरी सम्प्रदाय के पुजारियों को नियुक्त किया गया. यह गिरी गोसाई सम्प्रदाय का पेशवा दरबार में अच्छा दबदबा रहा है तथा इन्हें उच्च पदों पर भी रखा जाता था.DSC04303DSC04302

देवी दर्शन के बाद अब गरम पानी के कुंडों की बारी थी. पता चला कि इस क्षेत्र में भूगर्भीय परिस्थितिजन्य, गरम पानी के जल स्त्रोत अनेकों हैं, यहाँ तक की तनसा नदी में भी. हम लोग २/३ किलोमीटर चलकर अकलोली पहुंचे यहाँ बाकायदा सीमेंट के कुंड बने हैं. मुख्य कुंड से जहाँ का पानी अत्यधिक गरम है, जल प्रवाहित होकर तीन अलग अलग कुंडों में आता है. इन कुंडों के गरम पानी में औषधीय गुण के पाए जाने तथा अनेकों चर्म रोगों के लिए गुणकारी होने की मान्यता है. छुट्टी का दिन न होने पर भी वहां अच्छी खासी भीड़ थी. हमने जब चित्र लेना चाहा तो कई महिलाएं कुंड के बाहर आ गयीं. हम लोगों ने भी अपने पैर डुबोकर कुछ क्षणों का आनंद प्राप्त किया. सामने रामेश्वर महादेव का एक मंदिर है. यहाँ भी दर्शन कर आगे बढ़ गए.

गणेशपुरी जो निकट ही था, एक बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बन गया है (गुरुदेव सिद्ध पीठ). स्वामी मुक्तानंद जी यहाँ सन १९५६ में आये और उनके प्रयास से ७५ एकड़ में एक बहुत ही विशाल आश्रम बन गया है जहाँ अनेकों विदेशी आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण आवासों में रह रहे हैं और अपना भी आध्यात्मिक उद्धार करने में लगे हैं. यह क्षेत्र सर्वसाधारण के लिए वर्जित है. सड़क के किनारे ही मुक्तानंद जी के गुरु रहे स्वामी नित्यानंद जी की समाधि है. समीप ही भीमेश्वर गणेश मंदिर भी है परन्तु वे सब बंद थे अतः बिना उन सबके दर्शन किये ही वापस लौट आये. यहाँ भी गरम पानी के कुंड होने की बात बताई गयी थी. लौटते हुए रास्ते में हमने देखा कि सैलानियों के लिए अनेकों रेसोर्ट्स बने हुए हैं. विदित हो कि वज्रेश्वरी देवी एक योगिनी है इसलिए कदाचित तंत्र साधना के लिए यह क्षेत्र उपयुक्त माना जाता हो.

37 Responses to “वज्रेश्वरी देवी का मंदिर और गरम पानी के कुंड”

  1. समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले Says:

    बहुत आभार इतनी कुछ जानकारी और तस्वीरों का.

  2. kishore choudhary Says:

    बहुत सुंदर विवरण है, आपका इस जानकारी को बांटने के लिए आभार !

  3. Lovely Kumari Says:

    सुंदर विवरण.

  4. nirmla.kapila Says:

    बहुत दिनों से घर बैठे बैठे बोर हो रहे थे। तभी आपका ये निमन्त्रण मिला और चल पडे देवी के दर्शन को। बहुत सुन्दर विवरण है और तस्वीरें भी आपका बहुत बहुत धन्यवाद हमे घर बैठे ही भारत दर्शन करवा देते हैं

  5. ताऊ रामपुरिया Says:

    बहुत बेहतरीन पोस्ट. इतनी सुंदर तस्वीरों के साथ इस रोचक विवरण के लिये आभार आपका.

    रामराम.

  6. amar jyoti Says:

    रोचक जानकारी।

  7. राज भाटिया Says:

    बहुत अच्छी जान्कारी दी आप ने, गर्म पानी के स्त्रोत हमेशा ही अच्छे होते है इन से बहुत सी चर्म बिमारियां ठीक होती है, ओर दमे के लिये भी इस की भाफ़ अच्छी होती है,
    सुंदर चित्र
    आप का धन्यवाद

  8. Isht Deo Sankrityaayan Says:

    अच्छा विवरण है.

  9. RAJ SINH Says:

    बचपन में परिवार के साथ गया था और कुंडों में स्नान भी किया था ,बस इतना ही याद था .लेकिन आपकी रोचक जानकारी के साथ ही चित्रों को देख मन पुलकित हुआ .

  10. shobhana Says:

    बहुत सुंदर चित्र सहित पुरे इतिहास के साथ दिया हुआ व्यवस्थित वर्णन पढ़कर और चित्र देखकर मन प्रसन्न हो गया |
    करीब ३० ३२ साल पहले देखा था मगर ज्यदा कुछ याद नही है आपका आलेख पढ़कर हमने अपनी कुलदेवी रेणुका माँ के दर्शन कर लिए |
    बहुत बहुत धन्यवाद

  11. dr arvind mishra Says:

    आपके पुरातात्विक पर्यटन की हावी से हम भी लाभान्वित हो रहे हैं -सुन्दर जानकारी !

  12. NEERAJ MUSAFIR Says:

    सुब्रमनियम जी,
    गरम पानी के कुण्ड जहाँ भी होते हैं, औषधीय गुणों से युक्त ही होते हैं.
    हम तो सोच रहे थे कि ये कुण्ड केवल हिमालय क्षेत्र में ही हैं, लेकिन आज हमारा मिथक टूट गया.

  13. Zakir Ali Rajnish Says:

    इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आभार।
    वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।

  14. mahendra mishra Says:

    आपकी पोस्ट के माध्यम से काफी कुछ जानने का मौका मिला . रोचक विवरण फोटो के साथ जानकारीपूर्ण आलेख. आभार .

  15. rashmi Says:

    वृजेश्वरी देवी का मंदिर तो बहुत ही भव्य,सुन्दर और साफ़ सुथरा है…पर गरम पानी के कुंड के आस पास, सफाई का अच्छी तरह ध्यान नहीं रखा गया है…इतने भक्त, टूरिस्ट यहाँ आते हैं.प्रबंधकों का इसका ख़ास ख्याल रखना चाहिए…

  16. पं. डी.के.शर्मा "वत्स" Says:

    अति सुन्दर चित्रों से सुसज्जित जानकारीपरक यात्रा वृ्तान्त…….
    सुब्रमणियम जी, कहीं स्थानीय तौर पर इन्हे ही “विरजादेवी” के नाम से तो नहीं जाना जाता ?

  17. ghughutibasuti Says:

    आप जहाँ भी जाते हैं दर्शनीय खोज लेते हैं। बढ़िया जानकारी दी है।
    घुघूती बासूती

  18. Gyan Dutt Pandey Says:

    बहुत सुन्दर। हम सशरीर वहां जाते तब भी शायद इतना न जान पाते!

  19. Dilip kawathekar Says:

    ये मिथक टूटा कि गर्म पानी के स्रोत सिर्फ़ उत्तर की पर्वत शृंखला में मिलते हैं.

    देवी के दर्शन भी आपके बहाने हो गये. जानकारी भी सही है.

  20. Mahfooz Says:

    itni achchi jaankaari dene ke liye aapka aabhaari hoon…..

  21. Lavanya Says:

    माता रेणुका, वज्रेश्वरी देवी तथा माँ कालिका को नमन –

    हम गणेशपुरी गए हैं – जब् स्वामी मुक्तानंद जी वहां थे
    अनगिनत परदेसी लोग भी वहां मौजूद थे – वज्रेश्वरी मंदिर
    और वसई बंबई के इतने निकट होते हुए भी नैसर्गिक सुषमा
    लिए हुए है
    Good information + Nice pictures !
    Thank you Subhramaniyam ji

  22. Alpana Verma Says:

    मंदिर की बनावट और रंग संयोजन आकर्षक है.[दूधिया सफ़ेद और काला].
    इतिहास से जुडी कथा भी पढ़ी,जो मंदिर के महत्व को बता रही है.
    मुम्बई के आस पास इतने सुन्दर स्थल हैं जानना अच्छा लगा.
    गरम पानी के कुंड यहाँ हमारे शहर में भी है..[अल एन में ]यह तो कभी रेगिस्तान रहा होगा..लेकिन यहाँ भी एक जगह है जहाँ गरम पानी निकलता[था]है..अब भी है….आस पास नहाने के स्थान बनाए गए हैं..लेकिन अब उन पूल में यह पानी नहीं है.
    —–
    रंगमंच को यूँ बेलों से ढका भी देखना मन को भा रहा है.
    –कितनी जीवन्तता है भारत में अभी भी.
    आभार इस ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए.

  23. dhiru singh Says:

    नित्य नई जानकारी के लिए आपका शुक्रिया . आपके द्वारा ही भ्रमण कर लेते है

  24. satish saxena Says:

    सुदूर क्षेत्रों से पुरातात्विक जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद ….
    सादर !

  25. anil pusadkar Says:

    बढिया जानकारी।बहुत सालों पहले वीरार घूम चुका हूं मगर इस मंदिर के बारे मे पता नही था।रेणुका माता का एक मंदिर नागपुर से नांदेड़ रोड पर माहुर मे हैं।बहुत ही भव्य मुर्ति है माता की मगर सिर्फ़ सिर ही है।कह्ते है कि माता प्रकट हो रही थी कि परशुराम ने पलट कर देख लिया तो जितना भाग प्रकट हुआ बस वही प्रकट हो पाया।वंहा परशुराम का मंदिर भी है और कह्ते है कि उन्होने अपनी माता का श्राद्ध वंही पर किया था।

  26. Yogenda Moudgil Says:

    वाह दादा वाह….. जय माता दी…

    aapke BLOG par tippani prakashit nahi ho rahi ……
    tippani prakriya aasan honi chahiye
    –YM

  27. संजय बेंगाणी Says:

    मुझे ऐतिहासीक जानकारी वाला भाग सदा पसन्द आता है. रूची का विषय जो है.

    सरस जानकारी.

  28. limit Says:

    तीनो देवियों के दर्शनों के लिए आभार, बहुत सुन्दर प्रस्तुती…
    regards

  29. Vinay Kumar Vaidya Says:

    Interesting information !
    yadi aap tantra ke granthon men vajreshwaree, kaalikaa aur renukaa ke ullekh se sambandhit thodee see jaanakaaree aur de dete, to is lekh kee sundartaa aur mahatw bahut badh jaataa .

    Dhanyawaad,

  30. Asha Joglekar Says:

    आपके कारण हमें मुंबई और पुणे के आसपास के मंदिरों की भी जानकारी मिल रही है । यह वज्रेश्वरी योगिनि मंदिर सुंदर तो है ही पर आपने तो इसका ऐतिहासिक महत्व भी बता दिया । साथ ही गरम पानी के कुंड भी शायद वहां कुछ बन रहा है तभी टूटी दीवारें दिख रहीं हैं पर आसा करते हैं कि जल्दी ही बन जायेगा । सुंदर चित्र और आलेख भी विस्तृत ।

  31. Vineeta Yashswi Says:

    Bahut hi rochak aur intresting jankari mili…

    bahut achhi post hai aur apne bahut achhe andaz mai likha hai…

  32. Brijmohan Shrivastava Says:

    शब्द सौंदर्य,चित्रों की सुन्दरता ,एतिहासिक जानकारी ,ईश दर्शन ,प्रभावी भाषा शैली मसलन सुरम्य वादियां, नैसर्गिक छटा, बेलों से आच्छादित, भू गर्भीय परिस्थितिजन्य,। एक बात और बुरा मत मानियेगा एक लाइन से मै प्रभावित हुआ “”आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण आवासों मे रहकर अपना आध्यात्मिक उद्दार “”यहां आपने “” अपना भी “”प्रयोग किया है । खैर

  33. Nipun Pandey Says:

    ये तो बहुत अच्छी जानकारी दी आपने !!

    सबकुछ बता दिया ! मैं बहुत जल्द यहाँ जाने का विचार बनाता हूँ !

    आपकी इस लेखन शैली के अंदाज़ ही ऐसा है कि पाठक को बांधे रखता है|

  34. KRISHAN SAROOP SHARMA Says:

    आपने बहुत अच्छी जानकारी दी

  35. OS Says:

    OS HUM JALDI HI AARAHE HAI

  36. OS Says:

    वज्रेश्वरी देवी हे ठिकाण खरोखरच एक भव्य दिव्य ठिकाण आहे तसेच अकलोली हे सुधा निसर्ग रम्य आणि स्वर्ग सुखा सारख ठिकाण आहे

  37. Brijesh Pandey Says:

    Jeevan me divyata ka anubhav prapt karne ke liye Tungareshwar parvat,Shri Tungareshwar Mahadev mandir,Shri parashuram kund,Shri sadanand ashram aur Maa vajreshwari ke darshan lijiye….

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