कांचीपुरम – कैलाशनाथ का मंदिर.

भारत में सतवाहन राज वंश की शक्ति क्षीण होनेपर   दक्षिण में पल्लवों के रूप में एक नयी शक्ति का उदय हुआ. इनके साम्राज्य में पूरा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का उत्तरी भाग शामिल था. इन्होने कांचीपुरम को अपनी राजधानी बनायीं और ४ थी से ९ वीं सदी तक राज किया. परन्तु इस पूरी अवधि में उत्तर के चालुक्यों एवं दक्षिण के चोल तथा पंडय राजाओं से वे संघर्षरत रहे. पल्लवों के काल में वास्तुकला, साहित्य एवं संगीत के क्षेत्र में अप्रतिम प्रगति हुई. दक्षिण पूर्व एशिया  में भारतीय संस्कृति के उन्नयन में पल्लवों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है. इन्हीं के काल में कांचीपुरम भी तमिल, तेलुगु एवं संस्कृत की शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बना. प्रारंभिक पल्लव अपने आपको ब्रह्म क्षत्रिय कहलाना पसंद करते थे. अर्थात ब्राह्मण  जिन्होंने शस्त्र धारण किया.  लेकिन कुछ इतिहासकारों का अनुमान है कि संभवतः इनका सम्बन्ध इरान के पहल्वों से था जो कृष्णा नदी के मैदानी भाग में कभी आ बसे होंगे. ५००  वर्षों  के उनके राजकाल में वैसे तो कई प्रतापी शासक हुए परन्तु साम्राज्य को उंचाईयों में पहुँचाने का काम महेन्द्रवर्मन १ (५७१ – ६३० ईसवी) एवं नरसिम्हवर्मन  १ (६३० – ६६८ ईसवी) ने किया.

मंदिरों के स्थापत्य कला के दृष्टिकोण से पल्लवों का काल महत्वपूर्ण रहा है. उस काल के स्थापत्य के दो स्वरुप दिखते हैं.प्रारंभ के निर्माण चट्टानों को तराश कर बनाये गए मंदिर आदि हैं. इसका सर्वोत्तम उदाहरण महाबलीपुरम में दृष्टिगोचर होता है. जिनकी कालावधि ६१० – ६९० ईसवी के बीच आंकी गयी है. वहीँ संरचनात्मक मंदिरों का निर्माण सन ६९० के बाद दिखाई पड़ता है. इस काल के लगभग सभी मंदिरों में मुख्य प्रतिष्ठा भगवन शिव की रही है.

कांचीपुरम चेन्नई बंगलूरु मुख्य मार्ग पर चेन्नई से लगभग ७६ किलोमीटर की दूरी पर है. यह नगर भारत के प्राचीनतम  ७ नगरों में एक है.  ३ – २ री  सदी ईसा पूर्व भी इस नगर के अस्तित्व में होने के प्रमाण तत्कालीन बौद्ध साहित्य में मिलते हैं. यहाँ पर १००० मंदिरों के होने की बात कही गयी है. यहाँ के प्रमुख मंदिरों में प्राचीनतम “कैलाशनाथ” या तामिल में कहें तो कैलाशनाथर (“जी” के एवज में है “र”)  का मंदिर है. यह मंदिर शहर से लगभग २ किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में है और वहां जाने के लिए ऑटो या टेक्सी आसानी से मिल जाता है. इस मंदिर को नरसिम्हवर्मन II, जो राजसिम्हा के नाम से भी जाना जाता था, के द्वारा ८ वीं सदी के पूर्वार्ध में अपनी पत्नी को प्रसन्न करने के लिए बनवाया गया था. मंदिर की दीवार में उत्कीर्ण ग्रन्थ लिपि के लेख में नरसिंहवर्मन   द्वारा ग्रहण किये गए विभिन्न उपाधियों का उल्लेख है. इस मंदिर की बनावट महाबलीपुरम के समुद्र तट पर बने  मंदिर से मेल खाती है, क्योंकि उसे  भी  राजसिम्हा के  द्वारा ही बनवाया गया था.

???????????????????????????????वैसे तो यह मंदिर भगवान् शिव को अर्पित है परन्तु विष्णु सहित अन्य  देवी देवताओं की मूर्तियाँ भी मंदिर के गर्भ गृह के बाहर स्थापित हैं. गर्भ गृह का चक्कर लगाने के लिए एक संकीर्ण गलियारा है जिसका प्रवेश बिंदु जन्म और निकास मृत्यु का पर्याय माना जाता है. जितने अधिक बार आप प्रवेश कर बाहर निकलेंगे उतने ही आप मोक्ष के करीब पहुंचेंगे. यह मंदिर मूर्तियों का खजाना है  और सभी मूर्तियों की कलात्मकता बेजोड़ है. भगवान् शिव को ही ६४ विभिन्न भाव भंगिमाओं के साथ इसी एक मंदिर में देखा जा सकता है. इस मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि मंदिर चारों ओर से ५८ छोटे छोटे मंदिरों  से घिरा है जिनमें विभिन्न उप देवी/देवताओं को स्थान दिया गया है.

मंदिर के अन्दर परिक्रमा पथIMG_2143


स्थापत्य के दृष्टिकोण से इस मंदिर की महत्ता अतुलनीय है और लोग इसका रसास्वादन करने के लिए ही यहाँ आते है. एक धार्मिक स्थल के रूप में स्थानीय लोगों के बीच भी यह अधिक लोकप्रिय नहीं है अतः मंदिर में दर्शकों की भीड़ नहीं रहती. हाँ शिवरात्रि के दिन यह मंदिर अवश्य ही  विभिन्न आयोजनों का केंद्र बन जाता है.

कहते हैं कि महाप्रतापी चोल राजा, राजा राजा चोल  ने इस मंदिर के दर्शन किये थे. इस मंदिर से ही प्रेरणा लेकर तंजाऊर में भव्य ब्रिह्देश्वर के मंदिर का निर्माण करवाया था.


31 Responses to “कांचीपुरम – कैलाशनाथ का मंदिर.”

  1. समीर लाल Says:

    वाह! आभार जानकारी का और तस्वीरों का.

  2. भारतीय नागरिक Says:

    बहुत सुन्दर लेख व उतने ही सुन्दर चित्र. अवश्य देखने जायेंगे.

  3. Arvind mishra Says:

    सुन्दर सचित्र वर्णन -क्या एक विशालकाय छिपकली -मूर्ति (पल्ली ?) भी यहीं हैं जिसे छूना पड़ता है ?

  4. sanjay vyas Says:

    अद्भुत. पुरातन परिक्रमा पथ पर प्रदक्षिणा करती आस्थाएं.
    आभार सर

  5. विवेक रस्तोगी Says:

    हमारा यहाँ जान रह गया है, अबकी बार जरुर जायेंगे, बहुत अच्छे चित्र और वर्णन

  6. गिरिजेश राव Says:

    बहुत बढ़िया। हिन्दी ब्लॉगरी की विविधता में आप का योगदान प्रशंसनीय है। ई मेल सब्सक्राइव कर रहा हूँ।

  7. Ratan Singh Shekhawat Says:

    एक ओर जानकारी भरे लेख के लिए आभार |
    चित्र बहुत सुन्दर और उम्दा लगे |

  8. रंजन Says:

    bahut sundar chitra..

  9. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    @अरविन्द जी,
    नहीं. वह कांचीपुरम के ही एक विष्णु मंदिर में है. उसे वरदराज पेरुमाल का मंदिर कहते हैं.

  10. seema gupta Says:

    कांचीपुरम के कैलाशनाथ मंदिर का बेहद ही रोचक और सुन्दर चित्रण…
    regards

  11. ताऊ रामपुरिया Says:

    अति विस्तारित और नयनाभिराम चित्रों से सजी इस पोस्ट ने मंत्रमुग्ध कर दिया. बहुत धन्यवाद आपका.

    रामराम.

  12. ali syed Says:

    ब्रह्म क्षत्रिय राजा …तो क्या महेंद्र वर्मन … महेंद्र ब्राह्मण जैसा कुछ रहा होगा ? ईरानी पहल्वों और पल्लवों में सातत्य लगता तो है ! आपकी प्रविष्टि हमेशा की तरह ज्ञानवर्धक है !

  13. satish saxena Says:

    आदरणीय सुब्रमनियन जी !
    आपका हमेशा इंतज़ार रहता है !
    इतिहास और पुरातत्व मेरा प्रिय विषय रहा है, आपकी हर पोस्ट सम्मानित और संग्रहणीय रही है ! अनुपम चित्रों के साथ भारत की गौरव शाली परम्परा को जीवित रखने में आप जैसे नायकों का नाम अग्रणीय रहेगा ! सादर !

  14. राज भाटिया Says:

    इस अति सुंदर लेख ओर सुंदर चित्रो के लिये आप का बहुत बहुत धन्यवाद

  15. हरि जोशी Says:

    बहुत दिन बाद ब्‍लाग पर लौटना हुआ। आपके ब्‍लाग पर हमेशा ही पुरातत्‍व, कला, संस्‍कृति और समाज के विभिन्‍न पहलुओं की जानकारी रोचक और प्रभावपूर्ण ढंग से मिलती है।

  16. अल्पना Says:

    हिंदुओं के पवित्र स्थलों में से एक कांचीपुरम .
    City of thousand temple कहलाई जाने वाली इस नगरी के कैलाशनाथ मंदिर के बारे में विस्तार से पढ़ने को मिला.चित्र भी बहुत सुन्दर हैं .मूर्ति कला देखने योग्य है.
    आभार.
    [मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने कोई १५ साल पहले इस स्थान के दर्शन किये हैं . तमिलनाडु में कांची पुरम का अनुभव अद्भुत रहा था .]
    ——–
    अगले एक माह के लिए आप सपरिवार केरल आदि स्थानों पर घूमने जा रहे हैं ,सुखद एवं सफल यात्रा के लिए शुभकामनाएं.अच्छे चित्र और यात्रा अनुभव के विवरणों की प्रतीक्षा रहेगी.[मेरी कोई भी सहेली केरल जाती है तो उस से मैं काला वाला हलवा ज़रूर मंगवाती हूँ.:)]यहाँ भी दुकानों में मिल जाता है लेकिन घर के बने उस हलवे की बात ही अलग होती है.
    —एक बार फिर से ढेर सारी शुभकामनाएँ .

  17. vinay vaidya Says:

    अति रोचक जानकारी ऒर उससे भी अच्छी प्रस्तुति !
    आभार ऒर धन्यवाद !

  18. नरेश सिंह राठौड Says:

    आपके ब्लॉग की खासियत है सुन्दर सजीव सचित्र वर्णन | आभार

  19. vidhu Says:

    वरदराज पेरुमाल के मंदिर का वर्णन आप पहले कर चुकें हेँ …यदि हाँ तो लिंक दे दीजिये ..मंदिरों के विषय में आपकी जानकारी लेखों के माध्यम से यूं मिलती है मानो हम स्वयं वहाँ भ्रमण कर रहे हों …पुस्तकार रूप में इसे अवश्य लिखें हमारी धरोहर को यूं बचाने का आपका सद्प्रयास अच्छा लगता है …इस लेख में चित्रों की सजीवता के साथ लेख की जिवंत अभिव्यक्ति …आज सुबह -सुबह पढना वाकई प्रसन्नता हुई ..आभार ..बधाई

  20. Vineeta Yashswi Says:

    humesha ki tarah hi jankari bhari post thi aur behtreen pictures ke sath…

  21. pritima vats Says:

    आकर्षक तस्वीरों के साथ एक और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार।

  22. अमर Says:

    बहुत ही रोचक जानकारी की आकर्षक प्रस्तुति। सुस्पष्ट चित्रों ने तो आलेख के सौन्दर्य और उपयोगिता को कई गुना बढ़ा दिया है।

  23. RAJ SINH Says:

    हमेशा की तरह वैविध्य और ज्ञान पूर्ण.चित्र और विडिओ तो भ्रमण का आनंद दे गए .

  24. nirmla.kapila Says:

    सुन्दर सचित्र वर्णन पढ कर आनन्द आ गया धन्यवाद और शुभकामनायें

  25. नीरज जाट जी Says:

    कांचीपुरम के बारे में सचित्र जानकारी बहुत ही काम की है। कभी उधर जाना हुआ तो इस पोस्ट को पहले पढ लेंगे।

  26. Manish Kumar Says:

    नवीं कक्षा में पल्लव राजाओं पर पढ़े इतिहास की पुनरावृति हो गई इस पोस्ट से। मंदिर के बारे में ये जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आभार !

  27. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI Says:

    और और चित्रों से सजी इस पोस्ट ने मन-प्रसन्न कर दिया |
    बहुत धन्यवाद आपका !

  28. anil pusadkar Says:

    बहुत दिनों बाद ब्लाग पर लौटा हूं,और आते ही शिव के दर्शन हो गये।आभार आपका,हमेशा की तरह शानदार पोस्ट्।

  29. Gyandutt Pandey Says:

    आपकी पोस्ट सदैव मन प्रसन्न कर देती है!

  30. mamta Says:

    विडियो देखकर मजा आ गया।

    शुक्रिया इतनी अच्छी सैर कराने का।

  31. Asha Joglekar Says:

    बहुत सुंदर चित्र और अच्छी जानकारी ।

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