मेरे घर पनाह लेने आया एक वाइपर



हम एक पोस्ट बना ही रहे थे  “हमारे अंगने में”  और उसे  भविष्य में प्रकाशित होने के लिए सेव करने ही वाले थे.  रात १०.३० बजे  जब घर के दरवाज़े को बंद करना था तो हमारे सुपुत्र ने देखा कि एक सांप घर के खुले दरवाज़े और दीवार के बीच  बैठा हुआ है. वह जोर से चिल्लाया. हम दौड़े दौड़े नीचे उतरे. हमने उसे शांत किया और कहा जा केमरा ले आ. उसने भी खीजते हुए कहा यहाँ घर में सांप घुसा हुआ है और आपको फोटो की पड़ी है. हमने दो चार फोटो उतारे. वह गरीब भीगी बिल्ली की तरह चुप चाप पड़ा  रहा. प्रथम दृष्टया हमें वह खतरनाक वाइपर लगा.   बीच  बीच में अपनी जीभ लपलपाकर मुह चिढ़ा रहा था मानो कह रहा हो कि तुम्हारे अंगने को तो पार कर बैठक तक पहुच गया हूँ. तुम्हीं ने तो कहा था कि एक शार्क चाहिए, हम तो उसके बाप हैं.  बहुत बारीकी से देखने पर हमें भ्रम होने लगा था कि यह एक निरापद अजगर का बच्चा है और इसे पकड़ कर झोले में भर लेते हैं. तभी एक विचार आया कि हमेशा हमें अजगर और वाइपर को समझ पाने में परेशानी होती रही है. कहीं यह वाइपर ही हुआ तो?

इस  बीच आस पड़ोस के लोग भी इकठ्ठा हो गए. कुछ युवा डंडे लिए हुए थे.   उन्होंने कमान अपने हाथ ले ली. हम ने आग्रह किया कि इस शरणागत को सुरक्षित निकलने का मौका दें. आम सहमती बनी कि किसी सांप पकड़ने वाले को बुला लिया जाए. वैसे भी आजकल कई लोगों ने इस तरह घरों में घुस आने वाले सांपों को पकड़ने का व्यवसाय बना लिया है. लोगों ने मोबाइल द्वारा किसी एक मुन्ना बाबा को बुलवा लिया. आधे घंटे में कह कर दो या ढाई घंटे बाद मुन्ना बाबा का पदार्पण हुआ. उसने देखते ही कह दिया, यह तो खतरनाक वाइपर ही है. हम हाथ नहीं लगायेंगे. जहर की पिचकारी चलाता है. ढक्कन वाले किसी बड़े डब्बे की मांग की और मजबूरन हमें अपने आटे वाले डब्बे को खाली कर देना पड़ा. मजे की बात यह रही कि वाइपर को वाइपर (जमीन में पोछा लगाने वाला) से ही डब्बे के अन्दर जाने के लिए उकसाया गया. वह निरीह शामत आ गयी समझ कर अन्दर की तरफ बढ़ने लगा. उसके सामने जब रुकावट रक्खा गया तो  हार कर  डब्बे में चला गया और ढक्कन बंद. सबने राहत की सांस ली. एक सज्जन हमारी जानकारी के बिना ही  इनाम बतौर ३०० रुपये मुन्ना बाबा को दे दिए परन्तु इतने से वह संतुष्ट न हुआ. एक महिला ने हमसे २०० रुपये देने को कहा और हम झट मान भी गए. मुन्ना बाबा संतुष्ट हुए और उन्होंने अपने द्वारा पकडे गए एक दूसरे नाग को डब्बे से बाहर निकाल लोगों पर अपनी धाक जमा ली.

मुन्ना बाबा का कहना था कि वे पकडे गए सांपों को जंगल में ले जाकर छोड़ देते हैं. हमें लगा कि भले ही ५०० रुपये लग गए, कम से कम उस निरीह प्राणी की जान तो बच गयी. परन्तु देर रात तक नींद नहीं आई. कहीं मुन्ना बाबा पकडे गए सांपों से जहर उगलवाने का काम तो नहीं करता? बाज़ार में एक ग्राम जहर की कीमत हज़ारों रुपये है.

इस प्रजाति को रसल्स वाइपर के नाम से जाना जाता है और अत्यधिक जहरीला होता है. इसके काटे जाने पर मानव का रक्त जमने लगता है जिससे मृत्यु हो जाती है. वैसे यह अजगर की तरह आलसी और धीमी चाल वाला प्राणी है परन्तु विपत्ति के समय यह अत्यधिक फुर्तीला और आक्रामक बन सकता है.
यह आलेख सर्प संसार में प्रकाशित हुआ था.

29 Responses to “मेरे घर पनाह लेने आया एक वाइपर”

  1. विष्‍णु बैरागी Says:

    कितना अच्‍छा होता कि देश के सारे लोग ब्‍लागिए होते। तब, ऐसे सचित्र संस्‍मरणों का सुन्‍दर संग्रह हो जाता।

  2. ali syed Says:

    बड़ा शरीफ सांप था जो डब्बे में चला गया ! कहीं उसे मुन्ना बाबा नें ही तो प्लांट नहीं किया था🙂

  3. Zakir Ali Rajnish Says:

    सुब्रमण्यम जी, चित्र पहेली-92 बूझने की हार्दिक बधाई।

  4. rashmi ravija Says:

    उसका आलसी और धीमा होना आपके हक़ में था..वरना पता नहीं कहाँ जाकर छुप जाता और फिर परेशानी होती.
    मुंबई में तो ऐसी संस्थाएं हैं जहाँ से कार्यकर्त्ता फ़ौरन आ जाते हैं और कोई पैसे भी नहीं लेते.पर कभी कभी सांप को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ने में सारा दिन लग जाता है.

  5. jc joshi Says:

    लगभग तीस वर्ष पूर्व गौहाटी में मुझे भी साँपों के बारे में एक व्यक्ति जो सांप पकड़ता था और दवा कि कंपनी को विष बेचता था (जहां वो पहले काम कर चुका था) उससे कुछ-कुछ जानने को मिला…और उस दौरान मेरी दूसरी लड़की का एक दिन रोना सुन जब मैं बाहर पिछले छोटे से आंगन में गया तो देखा वो आँख बंद करे रो रही थी और एक सांप उसकी परिक्रमा कर रहा था, दीवार के साथ-साथ…उसको मैंने हिलने से मना किया और जब सांप उससे थोड़ी दूर पीछे की ओर चला गया तो उसको दौड़ के आने को बोला (वो उधर पोछे का कपडा लेने गयी थी, किन्तु उसके नीचे वे सोये पड़े थे!)…मुझसे मेरी पत्नी ने तब उसे मारने को बोला था, किन्तु मैंने कहा कि जब उसने मेरा कोई नुक्सान नहीं किया तो मैं उसे क्यूँ मारूं? (बाद में सुना कि उसे फिर पीछे वाले मकान में रहने वाले लड़कों ने मार दिया)… इसे संयोग कहें या कुछ ओर मेरा तीन वर्षीय नाती मुझसे हाल में अपनी मौसी से सम्बंधित घटना सुन सबको ये कहानी सुनाता है!

  6. ताऊ रामपुरिया Says:

    सांप की भी जान बची और अपनी भी जान आफ़त से छूटी. मुन्ना बाबा की जेब भरी, कोई बात नही, जीव हत्या तो नही हुई, बाबा अगर जंगल में ही छोडते हों तो यह बहुत अच्छी बात है.

    रामराम.

  7. satish saxena Says:

    बाप रे बाप ….
    पसीना आ गया पोस्ट पढ़ते पढ़ते !

  8. प्रवीण पाण्डेय Says:

    बहुत अच्छा किया कि जंगल में छोड़ दिया, वही उसकी अपनी जगह है।

  9. PN Subramanian Says:

    @ प्रवीण
    वास्तव में जिस जमीन पर हमारा मकान या कालोनी बनी है यह उन्हीं लोगों की थी. हमने कब्ज़ा कर लिया. उन्हें विस्थापित करने के प्रतिफल स्वरुप इतना तो करना ही था.

  10. shobhana Says:

    जान बची लाखो पाए |भले ही ५०० जाये |

  11. अनूप शुक्ल Says:

    सांप पकड़ने के ५०० रुपये! वाह! रोचक पोस्ट!

  12. आशा जोगळेकर Says:

    चलो बाबा मुन्ना बाबा ने पकड कर जंगल में छोडा बहुत अच्छा किया ।

  13. sanjay Says:

    मुझे यही लग रहा था कि यह लेख मैं पहले पढ़ चुका हूँ, ’सर्प संसार, पर ही पढ़ा था।
    रोचक होते हैं आपके पोस्ट, और ज्ञानवर्धक भी।
    होम्योपैथी गोलियों की तरह।

  14. पूजा उपाध्याय Says:

    हमारे घर देवघर में भी अक्सर सांप निकलते हैं. वहां शिव मंदिर है तो ऐसा कहा जाता है कि सांप को मारने से पाप लगेगा…और किम्वदंती ऐसी है कि देवघर में साप के काटने से किसी कि मृत्यु नहीं होगी. उधर सांप काटने से अभी तक मैंने भी किसी को मरते नहीं सुना है.

    वाइपर को हमारे तरफ गेहूँवन बोलते हैं…इसके रंग के कारण.

  15. रंजन Says:

    बड़ा खतरनाक लग रहा था..

  16. रंजना सिंह Says:

    सांप जहरीला हो या न हो, सामने पद जाय तो भयभीत तो कर ही देता है…
    रोचक तथा जानकारीपरक पोस्ट के लिए आभार.

  17. भारतीय नागरिक Says:

    एक बार मेरे यहां भी एक सांप आ गया. रात में डेढ़ बजे. उसे पकड़ने की कोशिश की तो वह भाग कर पड़ोसी के मकान में चला गया. जहां उन्होंने उसे मार दिया..

  18. Dipak 'Mashal' Says:

    saanp ka naam sunte hi sihran hone lagtee hai aur vaaipar ka to bas hissss hi kafi hai sulaane ke liye..😦 shukra hai kisi ko koi nuksaan nahin pahuncha..

  19. zeal [Divya] Says:

    आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी..

  20. Kajal Kumar Says:

    एक प्राणी के जीवन के लिए 500 रूपये कुछ भी नहीं वरना लोग तो डर के मारे ही हर सांप को बस ज़हरीला मान मार डालते हैं.

  21. पं.डी.के.शर्मा "वत्स" Says:

    हमें तो तस्वीर में देखकर ही पसीना आ रहा है…..इतना खतरनाक और जहरीला साँप सामने आ जाए तो फिर राम ही बचाए🙂

  22. समीर लाल Says:

    बाप रे!

  23. rahulsingh Says:

    निरापद मानकर ही शायद उसने आपका निवास चुना था. कहीं एक चित्र देखा था, जिसमें सालिम अली जी के कंधे पर चिडि़या, शायद गौरेया बैठी थी.

  24. हरदीप संधु Says:

    वाह! रोचक पोस्ट!
    बाप रे !!!
    देखकर तो डर लग रहा था…….

  25. Bharat Bhushan Says:

    आपके ब्लॉग पर मैं पहले भी आ चुका हूँ. कल आपकी मेघनेट पर टिप्पणी बहुत अच्छी लगी. आज यहाँ हूँ. ‘जय मेघ मल्हार’

  26. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI Says:

    हम भी एक थो किस्सा चेपें दे रहे हैं …..
    हमारे विद्यालय खेतों के बीच बना हुआ तो अक्सर बारिश के मौसम में सांप और बिच्छु दीख पड़ते हैं ….किसी तरह से उन्हें भगाया जाता है …अब तक कोशिश रही है कि कोई मारा ना जाए ….पर कितने दिन यह व्रत कायम रह पायेगा ?…कह नहीं सकते ?

    जल्दी ही हम भी पोस्ट चेंपते हैं …कभी !!

  27. vinay vaidya Says:

    वाइपर के बारे में पढ़ते हुए मेरे ही घर चार दिनों पूर्व घटित एक वाकया याद आया.
    सुबह दो-चार बर्त्तन धोए ही थे कि वॉश-बेसिन में कुछ हिलता नज़र आया. बत्ती
    जलाकर देखा तो एक पनियल दो कुंडलियाँ लगाए आराम फ़र्मा रहा था . फोन कर
    मित्र को बुलाया, फ़िर एक बाबा को बुलाया. लेकिन वह पनियल ऐसा गायब हुआ,
    कि पता नहीं चला. फ़िर बड़े ध्यान से देखा तो किचन में ही दिब्बों के बीच अदृश्य
    सा बैठा था . और जब सब लोग दूर हट गये और बाबा ने (वही आटे का डिब्बा)
    लेकर उसे पकडना चाहा तो वह न जाने कैसे स्लिप होकर पुनः गायब हो गया.
    आपकी वाइपर से मुलाकात हो गई और सब सकुशल रहा, इस्के लिये भगवान का
    शुक्र.
    सादर,
    विनय.

  28. sunita shanoo Says:

    आपकी हर पोस्ट में कुछ न कुछ जानकारी होती है धन्यवाद।

  29. sanjay bengani Says:

    वाइपर!!! वो भी बच गया और आप भी🙂 अंत भला तो सब भला.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: