राजस्थान का बिश्नोई समाज

हम अपने आपको पर्यावरण के लिए समर्पित  होने का स्वांग रचते रहे. ख़ास  कर जब हम अपने मित्रों  के साथ  पिकनिक में जाया करते . वहां दूसरों द्वारा फैलाये हुए कचरे को इकठ्ठा कर उठा लाते. यह मेरी आदत नहीं थी, लगता है एक मजबूरी रही जिससे लोग मुझे पर्यावरण प्रेमी के रूप  में जानें. अपने आप को इस तरह पर्यावरण के लिए संवेदनशील होने का भ्रम पाल रखा है.

पर्यावरण के लिए सजग और प्रकृति से घनिष्ट राजस्थान के  बिश्नोई समाज के बारे में कुछ लिखने की चाहत एक अरसे से रही है परन्तु आज ऐसा कुछ हुआ कि लिखने की जरूरत ही नहीं पड़ी. यहाँ मैं उल्लेख करना चाहूँगा श्री राहुल सिंह के सिंहावलोकन में उनकी ताजा प्रविष्टि  “फ़िल्मी पटना” का जहाँ उनके शब्दों के जादू से ही सिनेमास्कोप बन गया है. चित्रों की  आवश्यकता ही नहीं है. शब्द अपने आप में सक्षम हैं इस बात से कोई विरोध नहीं है परन्तु चित्र भी उतने ही सक्षम होते हैं.

यह चित्र श्री विजय बेदी के द्वारा काफी मशक्कत के बाद लिया गया है और श्री गौरव घोष जी के टिपण्णी से सहमति जताने के बाद के खोज बीन में यहाँ उपलब्ध हुआ था: http://sixteenbynine.co/thousand-words-in-snap

एक और चित्र गूगल बाबा की मेहरबानी से मिला जिसे श्री हिमांशु व्यास ने लिया है. हिन्दुस्थान टाइम्स में वे छायाकार हैं.

रतन सिंह शेखावत  जी के द्वारा प्रेषित मेल में निहित  सुझाव का सम्मान करते हुए एक वीडिओ भी प्रस्तुत है:

 

110 Responses to “राजस्थान का बिश्नोई समाज”

  1. मनोज खत्री Says:

    इसी विश्नोई समाज की पहल और मेहनत की वजह से सलमान खान जेल की हवा खा चुके.. वर्ना इतने रसूख वाला जेल मैं !!

    फोटो लेने के लिए ज़रूर छायाकार ने खूब मेहनत की होगी.

    सुन्दर

  2. विष्‍णु बैरागी Says:

    अद्भुद जीवट और इच्‍छा षक्ति का स्‍वामी है विश्‍नोई समाज। पर्यावरण रक्षा हेतु मर मिटने का ऐसा जज्‍बा दुनिया के किसी और समाज में नहीं है।

    चित्र निश्‍चय ही सुन्‍दर, आकर्षक और पोस्‍ट को अधिक अर्थवान बनानेवाले हैं।

  3. arvind mishra Says:

    इस समाज का अनन्य पशु प्रेम जग विख्यात है :

  4. rakesh nsui Says:

    b

  5. rakesh nsui Says:

    bahut sundar

  6. rakesh meena Says:

    vishnoi samaj vastv me pakrti paremi ha

  7. Bharat Bhushan Says:

    हम पक्षियों को दाना डाल कर पुण्य कमाने की बात करते हैं. चित्रों में तो ममत्व स्वयं को ही वितरित कर रहा है. इनके छायाकारों का कार्य कालिदास से कम नहीं.

  8. ali syed Says:

    आदरणीय सुब्रमनियन जी ,
    ‘शब्द’ कुछ ‘रेखाओं’ की वज़ह से अस्तित्व में आते हैं सो ‘चित्र’ भी ! मुझे तो दोनों ही ‘शब्द’ लगते हैं ! आपकी इस पोस्ट से सारा लिखा हुआ मिटा दीजिए तब भी वह ‘चित्र’ वही कहेगा जो ‘शब्द’ कह रहे हैं …तो फर्क क्या है दोनों में ?

  9. राहुल कुमार सिंह Says:

    पहला चित्र गौरव के ही सौजन्‍य से देख चुका था, दूसरा यहां पहली बार देखा. निःशब्‍द कर देने वाले चित्र. आपको याद दिलाना चाहूंगा कि छत्‍तीसगढ़ के सैकड़ों गांवों में स्‍थानीय प्रवासी पक्षी ‘ओपन बिल्‍ड स्‍टॉर्क’ आते हैं, ग्रामवासियों की उनके प्रति भावना का चित्र तो नहीं खींचा जा सकता, लेकिन वह आपकी इस पोस्‍ट के विषय के अनुरूप होती है. उल्‍लेख हेतु आभार. चित्रों का कौन मुकाबला…, लेकिन ‘तुझसे हसीन तेरी याद’ तो रहेगी ही.

  10. satish saxena Says:

    जीवों से प्यार करने में यह समाज एक मिसाल है ! इन दुर्लभ चित्रों को उपलब्ध कराने के लिए आपका आभार !

  11. संजय बेंगाणी Says:

    बचपन राजस्थान में ही गुजरा है अतः काफी परिचित भी हूँ. तब किड़े-मकोड़ों को छूना यानी उनके काम में दखल देना होता है और इससे पाप लगता है ऐसी शिक्षा मिलती थी. माँसाहार बहुत घृणित कार्य माना जाता था/है.

    पर्यावण के लिए बलिदान देने वाला यह पहला समूदाय है.

  12. Abhihek Says:

    Oh ! Shabdon se kahin badhkar hai inka paryavaran prem.

  13. jc joshi Says:

    वाकई में बहुत कुछ बोलती तस्वीर!

    ‘हिन्दू’ मान्यतानुसार आत्मा हरेक प्राणी की एक सी ही है, परमात्मा का ही एक अंश, जो पहली बार ८४ लाख योनी धारण करने के पश्चात मानव रूप में प्रगट होती है,,, और फिर काल-चक्र में भले-बुरे कर्मानुसार उच्च अथवा निम्न श्रेणी के रूप धारण करती चली जाती है, आदि…

    क्या यह संभव है कि पिछले जन्म में भी यह स्त्री इस जन्म में मेमना दिखने वाले की माँ रही होगी!?

  14. नरेश सिंह Says:

    जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित इस सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए उनतीस नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस सम्बन्ध में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, जो इस प्रकार है –

    १) प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करना।
    २) ३० दिन जनन – सूतक मानना।
    ३) ५ दिन रजस्वता स्री को गृह कार्यों से मुक्त रखना।
    ४) शील का पालन करना।
    ५) संतोष का धारण करना।
    ६) बाहरी एवं आन्तरिक शुद्धता एवं पवित्रता को बनाये रखना।
    ७) तीन समय संध्या उपासना करना।
    ८) संध्या के समय आरती करना एवं ईश्वर के गुणों के बारे में चिंतन करना।
    ९) निष्ठा एवं प्रेमपूर्वक हवन करना।
    १०) पानी, ईंधन व दूध को छान-बीन कर प्रयोग में लेना।
    ११) वाणी का संयम करना।
    १२) दया एवं क्षमाको धारण करना।
    १३) चोरी,
    १४) निंदा,
    १५) झूठ तथा
    १६) वाद – विवाद का त्याग करना।
    १७) अमावश्या के दिनव्रत करना।
    १८) विष्णु का भजन करना।
    १९) जीवों के प्रति दया का भाव रखना।
    २०) हरा वृक्ष नहीं कटवाना।
    २१) काम, क्रोध, मोह एवं लोभ का नाश करना।
    २२) रसोई अपने हाध से बनाना।
    २३) परोपकारी पशुओं की रक्षा करना।
    २४) अमल,
    २५) तम्बाकू,
    २६) भांग
    २७) मद्य तथा
    २८) नील का त्याग करना।
    २९) बैल को बधिया नहीं करवाना।

    जाम्भोजी की शिक्षाओं पर अन्य धर्मों का प्रभाव स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता है। उन्होंने जैन धर्म से अहिंसा एवं दया का सिद्धान्त तथा इस्लाम धर्म से मुर्दों को गाड़ना, विवाह के समय फेरे न लेना आदि सिद्धान्त ग्रहण किये हैं। उनकी शिक्षाओं पर वैष्णव सम्प्रदाय तथा नानकपंथ का भी बड़ा प्रभाव है।
    इस सम्प्रदाय में गुरु दीक्षा एवं डोली पाहल आदि संस्कार साधुओं द्वारा सम्पादित करवाये जाते हैं, जिनमें कुछ महन्त भी भाग लेते हैं। वे महन्त, स्थानविशेष की गद्दी के अधिकारी होते हैं परन्तु थापन नामक वर्ग के लोग नामकरण, विवाह एवं अन्तयेष्टि आदि संस्कारों को सम्पादित करवाते हैं। चेतावनी लिखने एवं समारोहों के अवसरों पर गाने बजाने आदि कार्यों के लिए गायन अलग होते हैं।

    इस सम्प्रदाय में परस्पर मिलने पर अभिवादन के लिए ‘नवम प्रणाम’, तथा प्रतिवचन में’ विष्णु नै जांभौजी नै’ कहा जाता है।

    विश्नोई औरतें लाल और काली ऊन के कपड़े पहनती हैं। वे सिर्फ लाख का चूड़ा ही पहनती हैं। वे न तो बदन गुदाती हैं न तो दाँतों पर सोना चढ़ाती है। विश्नोई लोग नीले रंगके कपड़े पहनना पसंद नहीं करते हैं। वे ऊनी वस्र पहनना अच्छा मानते हैं, क्योंकी उसे पवित्र मानते हैं। साधु कान तक आने वाली तीखी जांभोजी टोपी एवं चपटे मनकों की आबनूस की काली माला पहनते हैं। महन्त प्राय: धोती, कमीज और सिर पर भगवा साफा बाँधते हैं।
    विश्नोईयों में शव को गाड़ने की प्रथा प्रचलित थी।

    विश्नोई सम्प्रदाय मूर्ति पूजा में विश्वास महीं करता है। अत: जाम्भोजी के मंदिर और साथरियों में किसी प्रकार की मूर्ति नहीं होती है। कुछ स्थानों पर इस सम्प्रदाय के सदस्य जाम्भोजी की वस्तुओं की पूजा करते हैं। जैसे कि पीपसार में जाम्भोजी की खड़ाऊ जोड़ी, मुकाम में टोपी, पिछोवड़ों जांगलू में भिक्षा पात्र तथा चोला एवं लोहावट में पैर के निशानों की पूजा की जाती है। वहाँ प्रतिदिन हवन – भजन होता है और विष्णु स्तुति एवं उपासना, संध्यादि कर्म तथा जम्भा जागरण भी सम्पन्न होता है।
    इस सम्प्रदाय के लोग जात – पात में विश्वास नहीं रखते। अत: हिन्दू -मुसलमान दोनों ही जाति के लोग इनको स्वीकार करते हैं। श्री जंभ सार लक्ष्य से इस बात की पुष्टि होती है कि सभी जातियों के लोग इस सम्प्रदाय में दीक्षीत हुए। उदाहरणस्वरुप, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, तेली, धोबी, खाती, नाई, डमरु, भाट, छीपा, मुसलमान, जाट, एवं साईं आदि जाति के लोगों ने मंत्रित जल (पाहल) लेकर इस सम्प्रदाय में दीक्षा ग्रहण की।

    राजस्थान में जोधपुर तथा बीकानेर राज्य में बड़ी संख्या में इस सम्प्रदाय के मंदिर और साथरियां बनी हुई हैं। मुकाम (तालवा) नामक स्थान पर इस सम्प्रदाय का मुख्य मंदिर बना हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष फाल्गुन की अमावश्या को एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें हजारों लोग भाग लेते हैं। इस सम्प्रदाय के अन्य तीर्थस्थानों में जांभोलाव, पीपासार, संभराथल, जांगलू,लोहावर, लालासार आदि तीर्थ विशेष रुप से उल्लेखनीय हैं। इनमें जांभोलाव विश्नोईयों का तीर्थराज तथा संभराथल मथुरा और द्वारिका के सदृश माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त रायसिंह नगर, पदमपुर, चक, पीलीबंगा, संगरिया, तन्दूरवाली, श्रीगंगानगर, रिडमलसर, लखासर, कोलायत (बीकानेर), लाम्बा, तिलवासणी, अलाय (नागौर)एवं पुष्कर आदि स्थानों पर भी इस सम्प्रदाय के छोटे -छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस सम्प्रदाय का राजस्थान से बाहर भी प्रचार हुआ। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बने हुए मंदिर इस बात की पुष्टि करते हैं।

    जाम्भोजी की शिक्षाओं का विश्नोईयों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। इसीलिए इस सम्प्रदाय के लोग न तो मांस खाते हैं और न ही शराब पीते हैं। इसके अतिरिक्त वे अपनी ग्राम की सीमा में हिरण या अन्य किसी पशु का शिकार भी नहीं करने देते हैं।

    इस सम्प्रदाय के सदस्य पशु हत्या किसी भी कीमत पर नहीं होने देते हैं। बीकानेर राज्य के एक परवाने से पता चलता है कि तालवा के महंत ने दीने नामक व्यक्ति से पशु हत्या की आशंका के कारण उसका मेढ़ा छीन लिया था।

    व्यक्ति को नियम विरुद्ध कार्य करने से रोकने के लिए प्रत्येक विश्नोई गाँव में एक पंचायत होती थी। नियम विरुद्ध कार्य करने वाले व्यक्ति को यह पंचायत धर्म या जाति से पदच्युत करने की घोषणा कर देती थी। उदाहरणस्वरुप संवत् २००१ में बाबू नामक व्यक्ति ने रुडकली गाँव में मुर्गे को मार दिया था, इस पर वहाँ पंचायत ने उसे जाति से बाहर कर दिया था।

    ग्रामीण पंचायतों के अलावा बड़े पैमाने पर भी विश्नोईयों की एक पंचायत होती थी, जो जांभोलाव एवं मुकाम पर आयोजित होने वाले सबसे बड़े मेले के अवसर पर बैठती थी। इसमें इस सम्प्रदाय के बने हुए नियमों के पालन करने पर जोर दिया जाता था। विभिन्न मेलों के अवसर पर लिये गये निर्णयों से पता चलता है कि इस पंचायत की निर्णित बातें और व्यवस्था का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य था और जो व्यक्ति इसका उल्लंघन करता था, उसे विश्नोई समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था।

    विश्नोई गाँव में कोई भी व्यक्ति खेजड़े या शमी वृक्ष की हरी डाली नहीं काट सकता था। इस सम्प्रदाय के जिन स्री – पुरुषों ने खेजड़े और हरे वृक्षों को काटा था, उन्होंने स्वेच्छा से आत्मोत्सर्ग किया था। इस बात की पुष्टि जाम्भोजी सम्बन्धी साहित्य से होती है।

    राजस्थान के शासकों ने भी इस सम्प्रदाय को मान्यता देते हुए हमेशा उसके धार्मिक विश्वासों का ध्यान रखा है। यही कारण है कि जोधपुर व बिकानेर राज्य की ओर से समय – समय पर अनेक आदेश गाँव के पट्टायतों को दिए गए हैं, जिनमें उन्हें विश्नोई गाँवों में खेजड़े न काटने और शिकार न करने का निर्देश दिया गया है।

    बीकानेर ने संवत् १९०७ में कसाइयों को बकरे लेकर किसी भी विश्नोई गाँव में से होकर न गुजरने का आदेश दिया। बीकानेर राज्य के शासकों ने समय – समय पर विश्नोई मंदिरों को भूमिदान दिए गए हैं। ऐसे प्रमाण प्राप्त हुए हैं कि सुजानसिंह ने मुकाम मंदिर को ३००० बीघा एवं जांगलू मंदिर को १००० बीघा जमीन दी थी।

    बीकानेर ने संवत् १८७७ व १८८७ में एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुसार थापनों से बिना गुनाह के कुछ भी न लेने का निर्देश दिया था। इस प्रकार जोधपुर राज्य के शासक ने भी विश्नोईयों को जमीन एवं लगान के सम्बन्ध में अनेक रियायतें प्रदान की थीं। उदयपुर के महाराणा भीमसिंह जी और जवानसिंह जी ने भी जोधपुर के विश्नोईयों की पूर्व परम्परा अनुसार ही मान – मर्यादा रखने और कर लगाने के परवाने दिये थे।

  15. नरेश सिंह Says:

    ऊपर कि टिप्पणी में कहावत हटा दी गयी है क्यों कि उसकी भाषा शैली थोड़ी कठिन है |

  16. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    नरेश जी,

    आपने तो बिश्नोइयोन पर पूरी थीसिस लिख डाली. आपका ह्रदय से आभार.

    सस्नेह,

    सुब्रमनियन

    ++++++++++++++++++++++++++++++++++
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  17. अमर Says:

    रोचक जानकारी के लिये आभार।

  18. रंजना सिंह Says:

    आपका और नरेश सिंह जी का ह्रदय से आभार…

    आपके पोस्ट ने जहाँ निःशब्द कर दिया था..नरेश जी की जानकारियों ने एक नयी ही दुनिया देखने का सुअवसर दिया..मैं पूर्णतः अनभिज्ञ थी इन तथ्यों से..
    बिश्नोई समाज के प्रति मन श्रद्धानत हो गया है..

  19. ghughutibasuti Says:

    अद्भुत ममता!
    घुघूती बासूती

  20. shikha varshney Says:

    अद्भुत…सर नवाने को जी करता है.

  21. प्रवीण पाण्डेय Says:

    पर्यावरण संरक्षण का उत्कृष्ट प्रयास।

  22. समीर लाल Says:

    अद्भुत!!!

  23. Ratan Singh Shekhawat Says:

    जोधपुर के किले में महाराजा को लकड़ी की जरुरत थी जिसके लिए उनका एक मंत्री खेजडली नामक गांव में पेड़ काटने पहुंचा ,पर पर्यावरण प्रेमी विश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ कटाने का विरोध किया और वे पेड़ों के चिपक गए , राजा के मंत्री ने पेड़ों के साथ उन लोगों को भी काट डाला जो पेड़ों की रक्षा के लिए उनके तनों से चिपके हुए थे ,बाद में जब राजा को इस हत्याकांड का पता चला तो उन्हें बहुत ग्लानी हुई और उन्होंने उन क्षेत्रों में जहाँ विश्नोई रहते थे में पेड़ काटने व शिकार करने पर पाबंदी लगा दी |
    इस सम्बन्ध में एक विडिओ यु-ट्यूब पर है जिसे कृपया पोस्ट में लगा दें ताकि विश्नोई समाज के पर्यावरण प्रेम को अच्छी तरह समझा जा सके

  24. Ratan Singh Shekhawat Says:

    जोधपुर के किले में महाराजा को लकड़ी की जरुरत थी जिसके लिए उनका एक मंत्री खेजडली नामक गांव में पेड़ काटने पहुंचा ,पर पर्यावरण प्रेमी विश्नोई समाज के लोगों ने पेड़ कटाने का विरोध किया और वे पेड़ों के चिपक गए , राजा के मंत्री ने पेड़ों के साथ उन लोगों को भी काट डाला जो पेड़ों की रक्षा के लिए उनके तनों से चिपके हुए थे ,बाद में जब राजा को इस हत्याकांड का पता चला तो उन्हें बहुत ग्लानी हुई और उन्होंने उन क्षेत्रों में जहाँ विश्नोई रहते थे में पेड़ काटने व शिकार करने पर पाबंदी लगा दी |
    इस सम्बन्ध में एक विडिओ यु-ट्यूब पर है जिसे कृपया पोस्ट में लगा दें ताकि विश्नोई समाज के पर्यावरण प्रेम को अच्छी तरह समझा जा सके http://www.youtube.com/watch?v=bLbYFvwuY5A

  25. राज भाटिया Says:

    बहुत सुंदर यह चित्र उस सलमान खान को दिखाना चाहिये जो इन हिरएणो को अपने शोक के लिये मार कर आया,यह मां उस से हजार गुणे बडी हे, धन्य हे यह मां,

  26. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI Says:

    वास्तव में आज टिप्पणिओं से ज्ञान वर्धन हुआ !

  27. भारतीय नागरिक Says:

    नमन है विश्नोइयों को..

  28. dhiru singh Says:

    नरेश जी और आपको जानकारी के लिये साधुवाद

  29. seema gupta Says:

    विश्नोई समाज से सम्बन्धित लेख बेहद ही रोचक और ममता की इस अद्भुत मिसाल को नमन. आदरणीय नरेश जी और आपका आभार इस महत्पूर्ण और रोचक जानकारी के लिए.
    regards

  30. मिहिरभोज Says:

    बङे ही हिम्मत वाले और दिलदार होते हैं विश्नोई ….हमारे साथ भी कुछ बंधु थे….

  31. मिहिरभोज Says:

    वहां एक कहावत प्रचलित है….सिर साटे रूंख बचे …तो भी सस्तो जाण
    कि यदि प्राण देकर भी पेङ बचाया जा सके तो भी सस्ता सौदा है…

  32. Isht Deo Sankrityaayan Says:

    खेजरली गांव में खेजड़ी पेड़ काटे जाने वाली घटना तो मैं जानता था, पर उसकी विडियो फिल्म देकर आपने अच्छा किया. बेहतर होगा, इसे हिन्दी और अंग्रेजी में भी डब किया जाए. अलबत्ता, बिश्नोई समाज की धार्मिक विशिष्टताओं के बारे में जेसी जोशी जी के कमेंट से नई जानकारी मिली.

  33. सुनीता शानू Says:

    पोस्ट और टिप्पणियां पढ़ कर हम तो नत मस्तक हो गये हैं बिश्नोई समाज के आगे। सचमुच अद्भुत।

  34. joseph pulikotil Says:

    Hello PNS:)

    Truly amazing. Our village women are known for their bravery and compassion. I was truly astonished to see these photos of a woman feeding the chinkara. Fantastic.

    Best wishes:)
    Joseph

  35. sanjay aneja Says:

    पाखंड से दूर, सच्चे दिल से पशु-प्रेम व पर्यावरण प्रेम में रत विश्नोई समाज को हमारा सलाम। आपका व पोस्ट में वर्णित बन्धुओं का आभार।
    बहुत अच्छी पोस्ट है।

  36. Dr.S.K.Tyagi Says:

    Revealing pictures! Knew a bit about Bishnoi’s love for deers but the shots express a lot about this love!! Thanks for posting.

  37. ताऊ रामपुरिया Says:

    आज विश्नोई समाज से प्रेरणा लेने और उस पर अनुकरण करने की आवश्यकता है. विश्नोई समाज अपने बलिदानों और कार्यों के लिये हमेशा ही आदर का पात्र रहेगा.

    रामराम.

  38. Zakir Ali Rajnish Says:

    Prernaprad hai ye samaj.
    …………..
    यौन शोषण : सिर्फ पुरूष दोषी?
    क्या मल्लिका शेरावत की ‘हिस्स’ पर रोक लगनी चाहिए?

  39. Brijmohanshrivastava Says:

    इस समाज के वारे में पहले सुना नहीं था पढ कर अच्छा लगा । श्री शेखवत जी की टिप्पणी भी पढी जो र्प्यावरण से सम्वंधित है । धन्यवाद

  40. नीरज जाट जी Says:

    ये देस है मेरा। ऐसा ही एक वाकया उत्तराखण्ड में घटित हुआ था- चिपको वाला।

  41. jc joshi Says:

    उत्तराखंड में चिपको आन्दोलन सन १९७४ में अनपढ़ स्त्रियों द्वारा आरंभ किया गया,,,इसलिए शायद उन्होंने राजस्थान के बिश्नोई समाज और सन १७३० की घटना के बारे में पहले नहीं सुना हो….लेकिन संभव है कि यह एक संयोग हो (या प्रकृति का रहस्यमय हाथ) कि यहाँ भी इस आन्दोलन का नेतृत्व गाँव की स्त्रियों ने ही किया था…

  42. अल्पना Says:

    पर्यावरण प्रेमी विश्नोई समाज को नमन.
    चित्र ही बहुत कुछ कह रहे हैं.
    उस पर नरेश सिंह जी की विस्तार से दी गयी टिप्पणी सोने पर सुहागा.
    विडियो अभी देखेंगे.
    आभार.

  43. Gourav Ghosh Says:

    Bohot Badhiya Sir. Dhanyavad Himanshu Vyas ke Photograph Ke liye.

  44. gokul ramrawas kallan Says:

    363 Khejarali Martyrs

    363 Khejarali Martyrs

    Woman : 72

    Ser No Name Gotra Village Male/Female
    1 Amrita Devi W/o Ramoji Khod Khejarali Female
    2 Ashi Bai D/o Ramoji Khod Khejarali Female
    3 Ratani Bai D/o Ramoji Khod Khejarali Female
    4 Bhagu Bai D/o Ramoji Khod Khejarali Female
    5 Ramoji Khod Khod Khejarali Male
    6 Girdharaji S/o Simbhuji Bhadoo Khejarali Male
    7 Jeevanji S/o Simbhuji Bhadoo Khejarali Male
    8 Jeeyan Beniwal W/o Girdhariji Bhadoo Khejarali Female
    9 Peethoji S/o Girdhariji Bhadoo Khejarali Male
    10 Andoji S/o Girdhariji Bhadoo Khejarali Male
    11 Kana Kalirani W/o Andoji Bhadoo Khejarali Female
    12 Dama D/o Andoji Bhadoo Khejarali Female
    13 Cheema D/o Andoji Bhadoo Khejarali Female
    14 Imarati D/o Andoji Bhadoo Khejarali Female
    15 Harnathji S/o Andoji Bhadoo Khejarali Male
    16 Ladoo Isram W/o Harnathji Bhadoo Khejarali Female
    17 Sanwatji S/o Harnathji Bhadoo Khejarali Male
    18 Indoji S/o Harnathji Bhadoo Khejarali Male
    19 Kheenvaji S/o Harnathji Bhadoo Khejarali Male
    20 Manba Kaswi W/o Kheenvaji Bhadoo Khejarali Female
    21 Barjangaji S/o Bijaji Beniyal Khejarali Male
    22 Bhagi Bai D/o Barjangaji Beniyal Khejarali Female
    23 Sabiyan Bai D/o Barjangaji Beniyal Khejarali Female
    24 Chachaji S/o Barjangaji Beniyal Khejarali Male
    25 Harji S/o Mukanji Beniyal Khejarali Male
    26 Maie Dudan W/o Mukanji Beniyal Khejarali Female
    27 Akhaji S/o Barjangaji Beniyal Khejarali Male
    28 Umoji Godara Khejarali Male
    29 Bheraji S/o Durgaji Potalia Khejarali Male
    30 Kalyanji S/o Motaji Potalia Khejarali Male
    31 Kishanji S/o Premji Potalia Khejarali Male
    32 Sukhli S/o Premji Potalia Khejarali Male
    33 Isharji S/o Premji Bangdwa Khejarali Male
    34 Magji S/o Isharji Bangdwa Khejarali Male
    35 Tawoji S/o Isharji Bangdwa Khejarali Male
    36 Sunderoji S/o Isharji Bangdwa Khejarali Male
    37 Heera Bai D/o Isharji Bangdwa Khejarali Female
    38 Hardasji S/o Khartoji Buriya Khejarali Male
    39 Kasubi Khod W/o Hardasji Buriya Khejarali Female
    40 Karam Singhji S/o Hardasji Buriya Khejarali Male
    41 Kishnoji S/o Dhanji Buriya Khejarali Male
    42 Dedaramji S/o Bheemji Buriya Khejarali Male
    43 Bheenjoji S/o Heeroji Bhadoo Rashida Male
    44 Ridmalji S/o Bheenjoji Bhadoo Rashida Male
    45 Tejoji Bhadoo Rashida Male
    46 Kesoji S/o Kumbhoji Jani Rashida Male
    47 Hariya Godari W/o Keshoji Jani Rashida Female
    48 Bhagwanji Jani Rashida m
    49 Rashoji S/o Kaluji Siyag Rashida Male
    50 Nara Nain W/o Rashoji Siyag Rashida Female
    51 Keshoji S/o Rashoji Siyag Rashida Male
    52 Jesoji S/o akoji Godara Hungaon Male
    53 Udoji S/o akoji Godara Hungaon Male
    54 Keshoji S/o Hardasji Beniyal Hungaon Male
    55 Hemoji S/o Hardasji Beniyal Hungaon Male
    56 Loonoji S/o Nathoji Beniyal Hungaon Male
    57 Anadoji S/o Nathoji Beniyal Hungaon Male
    58 Manroopji S/o Khetaji Godara Hungaon Male
    59 Gainoji S/o Kherajji Godara Hungaon Male
    60 Gokalji S/o Kherajji Godara Hungaon Male
    61 Pemoji S/o Jaisoji Godara Hungaon Male
    62 Lali Bai D/oJaisoji Godara Hungaon Female
    63 Sunderoji S/o Malji Dhaka Netra Male
    64 Sajanji S/o Malji Dhaka Netra Male
    65 Beeramji S/o Malji Sahu Netra Male
    66 Dauji S/o Roopji Sahu Netra Male
    67 Keshoji S/o Ramoji Bhadu Netra Male
    68 Binji Lol W/o Ramoji Bhadu Netra Male
    69 Sadroji S/o Manoharji Godara Beerani Male
    70 Anadoji S/o Manoharji Godara Beerani Male
    71 Andu Bai D/o Manoharji Godara Beerani Female
    72 Jeemaa Bai D/o Sujoji Godara Beerani Female
    73 Sukhiya Bai D/o Manoharji Godara Beerani Female
    74 Jaisaji S/o Dhanoji Bhadoo Beerani Male
    75 Nathoji S/o Jaswantji Bhadoo Beerani Male
    76 Seri Dhatarwal W/o Nathoji Bhadoo Beerani Female
    77 Motoji S/o Nathoji Bhadoo Beerani Male
    78 Kachharoji S/o Karamchandji Lol Lamba Male
    79 Padmoji S/o Karamchandji Lol Lamba Male
    80 Bhojoji S/o Sujanji Jani Lamba Male
    81 Panchoji Babal Fitkasni Male
    82 Roopoji S/o Panchoji Babal Fitkasni Male
    83 Budhoji S/o Asoji Babal Fitkasni Male
    84 Rooghoji S/o Ladhuji Babal Fitkasni Male
    85 Bhinyaji S/o Nathoji Babal Fitkasni Male
    86 Tejoji S/o Jasji Babal Fitkasni Male
    87 Lakhoji S/o Ajoji Babal Fitkasni Male
    88 Rauji S/o Ajoji Babal Fitkasni Male
    89 Sujanji S/o Ajoji Babal Fitkasni Male
    90 Peethoji S/o Jasji Babal Fitkasni Male
    91 Jetoji S/o Gordhanji Babal Fitkasni Male
    92 Narsinghji S/o Gordhanji Babal Fitkasni Male
    93 Bheenyoji S/o Kacharoji Babal Fitkasni Male
    94 Peethoji S/o Bheenyoji Babal Fitkasni Male
    95 Padma Khod W/o Peethoji Babal Fitkasni Female
    96 Nathoji S/o Bheenyoji Babal Fitkasni Male
    97 Manoharji S/o Anadoji Godara Fitkasni Male
    98 Roogoji S/o Jeeyaji Godara Fitkasni Male
    99 Sabloji S/o Jeeyaji Godara Fitkasni Male
    100 Bhanwaroji S/o Sujoji Godara Fitkasni Male
    101 Neti Thalod W/o Bhanwaroji Godara Fitkasni Female
    102 Manoharji S/o Bhanwaroji Godara Fitkasni Male
    103 Rohitasji S/o Jasji Jani Fitkasni Male
    104 Jetoji S/o Jasji Jani Fitkasni Male
    105 Soni Godari W/o Jetoji Jani Fitkasni Female
    106 Jagoji S/o Ramoji Doodi Fitkasni Male
    107 Damoji S/o Motalji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    108 Amaroji S/o Pooranji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    109 Panchoji S/o Karmoji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    110 Bharmalji S/o Hariramji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    111 Jeevrajji S/o Hariramji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    112 Panchoji S/o Hariramji Khawa Guda Bishnoiyan Male
    113 Lakhoji S/o Kishanoji Saran Guda Bishnoiyan Male
    114 Ramoji S/o Keshoji Saran Guda Bishnoiyan Male
    115 Karamsinghji S/o Shankarji Saran Guda Bishnoiyan Male
    116 Narbadji S/o Salooji Saran Guda Bishnoiyan Male
    117 Heeroji S/o Salooji Saran Guda Bishnoiyan Male
    118 Keshoji S/o Salooji Saran Guda Bishnoiyan Male
    119 Saidasji S/o Tejoji Saran Guda Bishnoiyan Male
    120 Dedoji S/o Karamsinghji Mal Guda Bishnoiyan Male
    121 Kuboji S/o Bhagwanji Karwasra Guda Bishnoiyan Male
    122 Lakhoji S/o Asuji Karwasra Guda Bishnoiyan Male
    123 Raimalji S/o Asuji Karwasra Guda Bishnoiyan Male
    124 Hemrajji S/o Asuji Karwasra Guda Bishnoiyan Male
    125 Saidasji S/o Sandoji Dudi Guda Bishnoiyan Male
    126 Gangaramji S/o Kherajji Jhang Guda Bishnoiyan Male
    127 Surtanji S/o Champoji Bhadoo Guda Bishnoiyan Male
    128 Anadoji S/o Champoji Bhadoo Guda Bishnoiyan Male
    129 Jasoda Godari W/o Champoji Bhadoo Guda Bishnoiyan Female
    130 Devraj Ji S/o AmraJi Siyag Guda Bishnoiyan Male
    131 Jiyo Ji S/o AmraJi Siyag Guda Bishnoiyan Male
    132 Kesi Dagiyal W/o Amraji Siyag Guda Bishnoiyan Female
    133 Champoji S/o Udoji Siyag Guda Bishnoiyan Male
    134 Roopji S/o Netoji Jani Guda Bishnoiyan Male
    135 Achaloji S/o Bhojoji Burdak Guda Bishnoiyan Male
    136 Lunga Siyag W/o Achloji Burdak Guda Bishnoiyan Female
    137 Binji Siyag W/o Devraj Ji Burdak Guda Bishnoiyan Female
    138 Kanworji S/o Gordhanji Burdak Guda Bishnoiyan Male
    139 Heera Bai D/o Gordhan Ji Burdak Guda Bishnoiyan Female
    140 Dano Ji S/o Roogo Ji Godara Bhagtasani Male
    141 Baloo Ji S/o Roogo Ji Godara Bhagtasani Male
    142 Harkoji S/o Beeramji Godara Bhagtasani Male
    143 Lakhoji S/o KanwaroJi Panwar Rudkali Male
    144 RamJi S/o Akhji Sinwar Rudkali Male
    145 Manoj Ji S/o Akhji Sinwar Rudkali Male
    146 Jeevraj Ji S/o Akhji Sinwar Rudkali Male
    147 KhartoJi S/o Akhji Sinwar Rudkali Male
    148 Dasoji S/o Jagmal Ji Dhayal Rudkali Male
    149 Ramoji S/o Aandoji Dhayal Rudkali Male
    150 Sonagarji S/o Kheraj Ji Adeeg Rudkali Male
    151 Khumoji S/o Kheraj Ji Adeeg Rudkali Male
    152 Mukanoji S/o Ratnaji Bhadoo Rudkali Male
    153 Karmoji S/o Asuji Daukiya Rudkali Male
    154 Manohar Ji S/o Khamoji Daukiya Rudkali Male
    155 Devji S/o Asuji Seengad Rudkali Male
    156 Jeevanji S/o Asuji Seengad Rudkali Male
    157 Nagraj Ji S/o Bharmal Ji Rinvan Rudkali Male
    158 Narsinghji S/o Magho Ji Godara Rudkali Male
    159 Kishanoji S/o Kalji Kanswan Peetawas Male
    160 Karamsinghji S/o Kalji Kanswan Peetawas Male
    161 Namoji S/o Raichandji Beniwal Peetawas Male
    162 Dauji S/o Jesaji Beniwal Peetawas Male
    163 Manoji S/o Keshoji Beniwal Peetawas Male
    164 Keshu W/o mano Ji Siyag Ramrawas Female
    165 Devji S/o Isharji Godara Ramrawas Male
    166 Jaimalji S/o Harnathji Godara Ramrawas Male
    167 Karamchandji S/o Surtan Ji Godara Ramrawas Male
    168 Surtanji S/o Hemraj Ji Dhayal Ramrawas Male
    169 Panchoji S/o Motaji Beniwal Ramrawas Male
    170 Kalji S/o Chutra Ji Gila Ramrawas Male
    171 Gordhan Ji S/o Chok Ji Saran Ramrawas Male
    172 Harko Ji S/o Sinyo Ji Manju Ramrawas Male
    173 Mano Ji S/o Raju Ji Bhadoo Ramrawas Male
    174 Meyoji S/o Hemji Bhadoo Ramrawas Male
    175 Chaukji S/o Manoharji Sahu Ramrawas Male
    176 Deepa Chahar W/o Chaukji Sahu Ramrawas Female
    177 Jodharam ji Echra Ramrawas Male
    178 Dhanraj ji S/o manohar Ji Sahu Ramrawas Male
    179 Opaji S/o Gordhan Ji Manju Feench Male
    180 Rami Godari W/o Asoji panwar Feench Female
    181 Sujanji S/o Sirdarji Panwar Feench Male
    182 Jagannath Ji S/o Shimbhu Ji Panwar Feench Male
    183 Deu Devi W/o Jagannath Ji Panwar Feench Female
    184 Tejo Ji S/o Hauji Panwar Feench Male
    185 Ugroji S/o Polaji Godara Feench Male
    186 Sheru Janwaran W/o Polaji Godara Feench Female
    187 Panchan Ji S/o polaji Godara Feench Male
    188 Udoji S/o Keshoji Godara Feench Male
    189 Ganga Bhadu W/o Udoji Godara Feench Female
    190 Andoji S/o Khetoji Chotia Feench Male
    191 Somi Panwar W/o Khetoji Chotia Feench Female
    192 Sunderoji S/o Kishanoji Godara Feench Male
    193 Ida Kaswi W/o Sunderoji Godara Feench Female
    194 Jagmal Ji S/o Sunderoji Godara Feench Male
    195 Hemraj Ji S/o Sunderoji Godara Feench Male
    196 Andoji S/o Sunderoji Godara Feench Male
    197 Jeevraj Ji S/o Fateh Ji Isram Feench Male
    198 Sanwal Ji S/o Bago Ji Khot Feench Male
    199 Sanwat Ji S/o Bago Ji Khot Feench Male
    200 Peetho ji Dhaka Dhawa Male
    201 Bali Beniwal W/o Peethoji Dhaka Dhawa Female
    202 Raichand Ji S/o Peethoji Dhaka Dhawa Male
    203 Roopoji S/o Anando ji Dhaka Dhawa Male
    204 Moto ji S/o Fateh Ji Dhaka Dhawa Male
    205 Girdhari Ji S/o Jeevan Ji Khileri Dhawa Male
    206 Bhaguji S/o Hemo Ji Bhadiyar Dhawa Male
    207 Anandoji S/o Manji Bhadiyar Dhawa Male
    208 Kheraj Ji S/o HemJi Godara Doli Male
    209 Deraj Ji S/o Hem Ji Godara Doli Male
    210 JeeyoJi S/o AnadoJi Godara Doli Male
    211 Deepa khod W/o AndoJi Godara Doli Female
    212 RatnoJi S/o HarJi Dara Doli Male
    213 SamelJi S/o HarJi Dara Doli Male
    214 Lado Saran W/o SamelJI Dara Doli Female
    215 HarJi S/o BharamaliJi Dara Doli Male
    216 DivrajJI S/o BharamaliJi Dara Doli Male
    217 Kheenvaji S/o HeerJi Dara Doli Male
    218 Kalu saran W/o KheenvaJi Dara Doli Female
    219 Karmi D/o KheenvaJi Dara Doli Female
    220 MaheshJi S/o HarchandJi Dara Doli Male
    221 LaluJi S/o BithalJi Jangu Doli Male
    222 RatnoJi S/o JetaJi Jani Doli Male
    223 RatnoJi S/o JeetoJi Kaswan Khadalo Male
    224 RajuJi S/o JeetoJi Kaswan Khadalo Male
    225 MangoJi Kaswan Bhawad Male
    226 sawaiJi S/o MangoJi Kaswan Bhawad Male
    227 AjoJi S/o MotoJi Bola Bhawad Male
    228 Sunder Godari W/o AjoJi Bola Bhawad Female
    229 SunderJi S/o AjoJi Bola Bhawad Male
    230 HarJi S/o ChaukJi Kaswan Kosana Male
    231 BheekhJi S/o ChaukJi Kanswan Kosana Male
    232 Nathi Panwar W/o BheekhJi Kanswan Kosana Female
    233 TikuJi S/o ChaukJi Kanswan Kosana Male
    234 DhanJi S/o BhagwanJi Jangu Kosana Male
    235 TikuJi S/o BastiJi Jangu Kosana Male
    236 NarainJi S/o MotaJi Jhuriya Kosana Male
    237 Heera Rahad W/o NarainJi Jhuriya Kosana Female
    238 KishnoJi S/o SajanJi Siyag Kosana Male
    239 SajanJi Siyag Kosana Male
    240 GohadJi Nain Kosana Male
    241 ShyamJi S/o ShimbhuJi Godara Dhoroo Male
    242 Naran Dhayal W/o ShimbhuJi Godara Dhoroo Female
    243 Saidas S/o RasoJi Godara Dhoroo Male
    244 NathoJi S/o SimrathJi Doodi Dhoroo Male
    245 RedoJi S/o SimrathJi Doodi Dhoroo Male
    246 DurgoJi S/o SimrathJi Doodi Dhoroo Male
    247 UdoJi S/o HeerJi Bhadoo Dohariyan Male
    248 JeeyaramJi S/o AnadoJi Bhadoo Dohariyan Male
    249 Lalodi D/o AnadoJi Bhadoo Dohariyan Female
    250 BhauJi S/o MagJi Daukiya Jhalamaliya Male
    251 DedoJi S/o sujanJi Kadwasra Danwara Male
    252 Beera Rahad W/o sujanJi Kadwasra Danwara Female
    253 SajanJi S/o AasoJi Rahar Danwara Female
    254 KishnoJi S/o DariyanJi Saran Danwara Male
    255 BastiJi S/o ChampoJi Isram Nandiya Male
    256 HarchandJI S/o ManoJi Puniya Nandiya Male
    257 ThakarJI S/o ManoJi Puniya Nandiya Male
    258 RamoJI S/o AmaroJi Rahar Hunganiya Male
    259 MotoJi S/o AloJi Khokhar Tilwasani Male
    260 KarnoJi S/o AloJi Khokhar Tilwasani Male
    261 Khivani Nain W/o Binja Ji Khokhar Tilwasani Female
    262 PanchoJi S/o Binja Ji Khokhar Tilwasani Male
    263 Damu Nain W/o Pancho Ji Khokhar Tilwasani Female
    264 KeshoJi S/o Binja Ji Khokhar Tilwasani Male
    265 Nathi Nain W/o KeshoJI Khokhar Tilwasani Female
    266 Khuman Ji Nain Tilwasani Male
    267 Kirpo Ji Nain Tilwasani Male
    268 Khivani Bai Nain Tilwasani Female
    269 Gopaldas Ji Nain Tilwasani Male
    270 Thani Bai Nain Tilwasani Female
    271 TejoJi S/o GohadJi Nain Tilwasani Male
    272 Sajni Thalod W/o Tejo Ji Nain Tilwasani Female
    273 Lalo Ji S/o DedaJI Nain Tilwasani Male
    274 Hardas Ji S/o DhanJi Tuiya Tilwasani Male
    275 AmaroJi S/o JeevanJI Doodi Lunawa Male
    276 DedoJi S/o NarsinghJI Doodi Lunawa Male
    277 NarainJi S/o Devraj Ji Doodi Lunawa Male
    278 DurgoJi S/o Moto Ji Doodi Lunawa Male
    279 UgroJi S/o Nagraj Ji Saran Bawrala Male
    280 Sadul Ji S/o Sawal Ji Saran Bawrala Male
    281 Devo Ji S/o RamoJi Saran Bawrala Male
    282 BastiJi S/o IsharJi Lol Jud Male
    283 BiramJi S/o IsharJi Lol Jud Male
    284 BagoJi S/o KushaloJi Lol Jud Male
    285 KarnoJi S/o KushaloJi Lol Jud Male
    286 MahoJi S/o KushaloJi Lol Jud Male
    287 RohitashJI S/o JasoJi Jani Jud Male
    288 KhinyoJI S/o JasoJi Jani Jud Male
    289 RaichandJi S/o PithoJI Jani Jud Male
    290 RupoJi S/o PithoJI Jani Jud Male
    291 DanoJi S/o ParmanandJi Chahar Olawi Male
    292 ChooraJi S/o PujwanJi Chahar Olawi Male
    293 Deevraj Ji S/o NathoJi Chahar Olawi Male
    294 HarichandJi S/o DurgaJi Sahu Bala Male
    295 NarsinghJi S/o KumbhoJi Sahu Bala Male
    296 Deepa Khavi S/o NarsinghJi Sahu Bala Female
    297 CholoJi S/o BharmalJi Tandi Joliyali Male
    298 Resi saran W/o RajuJi Tandi Joliyali Female
    299 Jagnath Ji S/o raichandJi Beniwal Joliyali Male
    300 Ashi W/o raichandJi Beniwal Joliyali Female
    301 Panchan Ji Beniwal Joliyali Male
    302 Khemi Saran W/oPanchan Ji Beniwal Joliyali Female
    303 NetoJi S/o RajoJi Sahu Hingoli Male
    304 Asi Buriyani W/o NetoJi Sahu Hingoli Female
    305 MotoJi S/o BharamalJi Kupasiya Hingoli Male
    306 KushaloJi S/o JiyoJi Kupasiya Hingoli Male
    307 DedoJi S/o KeshoJI Beniwal Hingoli Male
    308 NathoJi S/o KeshoJI Beniwal Hingoli Male
    309 KushaloJi S/o AnandoJi Dara Aratiya Male
    310 BaluJi S/o BhagchandJi Dara Aratiya Male
    311 RatnoJi S/o GaneshJI Goyal Aratiya Male
    312 Heera Panwar W/o RatnoJi Goyal Aratiya Female
    313 LakhoJi S/o HarkhoJi Goyal Aratiya Male
    314 HemaRam Ji S/o SamoJi Beniwal Bisalpur Male
    315 MadJi S/o HemaramJi Beniwal Bisalpur Male
    316 Suwati Dhaki W/o HemaramJi Beniwal Bisalpur Female
    317 SadoJi S/o GopalJi Khileri Matoda Male
    318 BharmalJi S/o ChampoJi Khileri Matoda Male
    319 BadariJi S/o ChampoJi Khileri Matoda Male
    320 Suji Nain W/o BharamalJI Khileri Matoda Female
    321 JasoJi S/o BiramJi Khileri Matoda Male
    322 KeshoJi S/o BiramJi Khileri Matoda Male
    323 KishnoJi S/o SajanJi Siyag Dadarawa Male
    324 RatanoJi S/o SajanJi Siyag Dadarawa Male
    325 KanwaroJI S/o GaneshJI Saran Beru Male
    326 Rupa Khod W/o KanwaroJI Saran Beru Female
    327 LaduJi S/o GaneshJI Saran Beru Male
    328 MagoJi S/o Gohad Ji Saran Beru Male
    329 Dhanraj Ji Beniwal Jangalu Male
    330 Hardas Ji S/o dawad Ji Gayana Jangalu Male
    331 BishnoJi S/o Hardas Ji Gayana Jangalu Male
    332 Ramchand JI S/o Tejo Ji Gayana Jangalu Male
    333 Jeti Agarwali S/o Tejo Ji Gayana Jangalu Female
    334 Daidas Ji S/o NathoJI Dhatarwal Begadiya Male
    335 AkhaJi S/o NathoJI Dhatarwal Begadiya Male
    336 NathoJi S/o Karamchand Ji Khichar Haniya Male
    337 NathoJi Godara Sirmandi Male
    338 KaramsinghJi Godara Sirmandi Male
    339 NarsinghJi Isarwal Samdau Male
    340 RughoJI S/o BhagwanJI Panwar Panchala Male
    341 DurgoJI S/o BhagwanJI Panwar Panchala Male
    342 RoopoJI S/o DhanJi Khileri Burcha Male
    343 RehadoJi S/o PoloJI Bhanwal Burcha Male
    344 BhojoJi S/o PoloJI Bhanwal Burcha Male
    345 MotoJi S/o DhanrajJI Bhanwal Burcha Male
    346 MaheshJi S/o RamchandJi Saran Tapu Male
    347 AnandoJi S/o ShankaroJi Khileri Tapu Male
    348 KeshoJi Jangu Kudi Male
    349 Tejo Ji Siyag Jatiyasar Male
    350 ChampoJi S/o BajarangJI Siyag Bhakarasani Male
    351 Moto Ji Yet to Know Yet to Know Male
    352 Pancho Ji Yet to Know Yet to Know Male
    353 Peetho Ji Yet to Know Yet to Know Male
    354 Harku Bai Yet to Know Yet to Know Female
    355 Sunder Bai Yet to Know Yet to Know Female
    356 Karmi Bai Yet to Know Yet to Know Female
    357 Gora Bai Yet to Know Yet to Know Female
    358 HaraJi Yet to Know Yet to Know Male
    359 Harup Ji Yet to Know Yet to Know Male
    360 GugtoJi Yet to Know Yet to Know Male
    361 TejoJi Yet to Know Yet to Know Male
    362 UdoJi Yet to Know Yet to Know Male
    363 KanoJI Yet to Know Yet to Know Male
    ________________________________________
    The List is prepared with the help of “Khejarali ke 363 Bishnoi Amar Shaheed by editor Shri Krishn Saharan” and Weekly magzine “Rising Rajasthan sep 9, 2003”. We have tried our best and always welcome any query through Your Views Page or E-mail .. Thanks

  45. zeal ( Divya) Says:

    .

    विश्नोई समाज का पर्यावण प्रेम निश्चय ही स्तुत्य है एवं प्रेरणादायी भी। मेरे लिए ये नयी जानकारी थी। आभार।

    .

  46. तृप्ती Says:

    आपका मेरे ब्लॉग पर आके अपना तर्क रखने के लिए शुक्रिया ….. आपके सवालो के जवाब देने कि कोशिश कर रही हू …..

    Chernobyl या फिर three mile island जैसी दुर्घटनाएं विरल हैं । दुर्घटनाएं कहाँ नहीं होती हैं … क्या कोयले के खानों या ताप विद्युत केन्द्रों में दुर्घटनाएं नहीं होती हैं, या फिर oil platforms पर नहीं होती हैं ? आज तक परमाणु उर्जा संयंत्रों में हुई दुर्घटनाओं में मरने वाले जितने लोग हैं उससे कहीं ज्यादा लोग केवल एक साल के अंदर कोयले के खानों में हुए दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं । तो क्या कोयले के खान बंद हो जाते हैं या हम कोयला इस्तमाल करना बंद कर देते हैं ?
    रही बात “चलता है” मनोवृत्ति की, तो यही कारण है कि कोयले के खानों में इतने लोग मरते हैं …. कम से कम नाभिकीय उर्जा संयंत्रों को बनाने वाले उच्च शिक्षित और निहायत दक्ष लोग हैं न कि कोयले के खान चलाने वाले अर्धशिक्षित लोग ।

  47. jc joshi Says:

    सुब्रमणियन जी, मानव रूप में होने के नाते ‘हम’ किसी भी सीमित काल में दिखने वाले मानव जीवन और मरण को ही अधिक महत्त्व देते हैं (और उसमें उलझ सा जाते हैं),,, और ‘सृष्ठिकर्ता’ को अनुपस्थित अथवा मूर्ख समझते हैं, विशेषकर कलियुग यानि ‘वर्तमान’ में,,,जबकि ‘सत्ययुग’ से सम्बंधित प्राचीन ज्ञानी हिन्दू ‘सत्य’ को ‘मायावी’ जान, ‘परम सत्य’ यानि अनादि एवं अनंत निराकार ब्रह्म की उपस्थिति को अपने-अपने भीतर ही जान, सभी मानव जाति को उसको जानने के प्रयास करने का उपदेश दे गए – यानि जीवन का लक्ष्य मानने का…
    यदि उनकी दृष्टि से देखें तो पायेंगे कि उन्होंने परमात्मा के अंश को, यानि आत्मा को (शक्ति रूप को), अधिक महत्त्व दिया,,,जिसे उन्होंने अनंत काल-चक्र में संलंग्न या शामिल हो ८४ लाख विभिन्न प्राणी रूपों में प्रगट होते जाना – पहली बार मनुष्य रूप में पृथ्वी पर प्रगट होने के लिए, एक ऐसा रूप जो स्वयं सृष्ठिकर्ता का ही प्रतिरूप अथवा प्रतिबिम्ब है (अनंत में से हर एक अनूठा)! इसलिए उन्होंने मानव रूप को विशेष कृति जाना, ‘परम सत्य’ तक पहुँचने की एक महत्वपूर्ण कड़ी…
    और जहां तक पृथ्वी पर जीवन का प्रश्न है, यह तो सब पढ़े-लिखे आज जानते ही होंगे कि हमारी सुंदर, चार अरब वर्ष से अधिक आयु वाली, पृथ्वी एक हिमयुग से दूसरे हिमयुग के बीच झूलती है,,,और शायद हमारे पुराणों आदि में भी लिखा सुना हो सभी ने कि ब्रह्मा के अनंत जीवन में उसका एक दिन चार अरब वर्षों (+) का ही होता है (४३ लाख के ऊपर वाले महायुग, चार युगों के जोड़, के १००० (+?) के लगभग चक्र), जिसके पश्चात ब्रह्मा की उतनी ही लम्बी रात का आरम्भ होना निश्चित जाना गया है (जो दर्शाता है की प्राचीन हिन्दू ‘सिद्ध पुरुष’ कितनी गहराई तक गए होंगे,,,जबकि आज भी संकेत पाए जाते हैं, हस्त-रेखा अथवा ज्योतिष शास्त्र आदि से कि वे पहुंचे हुए खगोलशास्त्री तो थे ही, यद्यपि उनका काल के कारण ज्ञान विलुप्त-प्राय दीखे आज) …

  48. Zakir Ali Rajnish Says:

    सुब्रमण्‍मय जी, कैसे हैं आप।

    बहुत दिनों से आपकी लेखनी आराम फरमा रही है, अब थोडा सा उसे कष्‍ट दें, प्‍लीज।

    ———
    सुनामी: प्रलय का दूसरा नाम।
    चमत्‍कार दिखाऍं, एक लाख का इनाम पाऍं।

  49. कृष्ण Says:

    मातृत्व के इस बेहतरीन व अदभुत भाव को तस्वीर और शब्दों में उकेरने के लिए आप को साधूवाद

  50. thalassis Says:

    ΚΑΤΑΠΛΗΚΤΙΚΉ ΣΚΗΝΉ http://thalassis.wordpress.com/
    Beautiful Scene

  51. राम त्यागी Says:

    अद्भुत एवं प्रेरणादायी !!

  52. ललित शर्मा Says:

    बिश्वोई समाज पर केन्द्रित आपकी पोस्ट सराहनीय है।
    नि:संदेह विश्नोई समाज प्रकृति प्रेमी है।

  53. हिमांशु Says:

    वंचित रह जाता भारतीय अस्मिता और गौरव को अक्षुण्ण रखने वाली इस गौरवशाली परम्परा को जानने से, यदि यह प्रविष्टि न पढता !

    अदभुत प्रविष्टि !‌ आभार ।

  54. गिरीश बिल्लोरे मुकुल Says:

    मान्यवर
    इस पोस्ट की संक्षिप्त सूचना पोस्ट देखिये
    _________________________________
    एक नज़र : ताज़ा-पोस्ट पर
    पा.ना. सुब्रमणियन के मल्हार पर प्रकृति प्रेम की झलक
    ______________________________

  55. suresh panda Says:

    अद्भुत पोस्ट । बधाई ।

  56. जी.के. अवधिया Says:

    दीपावली के इस शुभ बेला में माता महालक्ष्मी आप पर कृपा करें और आपके सुख-समृद्धि-धन-धान्य-मान-सम्मान में वृद्धि प्रदान करें!

  57. Brijmohanshrivastava Says:

    आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
    मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

  58. Asha Joglekar Says:

    Bahut dino bad aaee aapke blog par Wishnoee samaj ke bare men lekh tatha tippniyon se itanee jankaree mili is samaj ke prakruti prem ko shat shat naman. chitr aur video clip nahut sunder.

  59. SOHAN LAL VISHNOI Says:

    Bahut dino bad aaee aapke blog par Wishnoee samaj ke bare men lekh tatha tippniyon se itanee jankaree mili is samaj ke prakruti prem ko shat shat naman. chitr aur video clip nahut sunder.

  60. Sahil Tyagi Says:

    ya sub dak k acha laga

  61. OMPRAKASH DHAKA Says:

    पोस्ट और टिप्पणियां पढ़ कर हम तो नत मस्तक हो गये हैं बिश्नोई समाज के आगे। सचमुच अद्भुत।

  62. pratap panwar Says:

    aap dwara di gai jankari se bahut prabhavit hua. bishnoi sahitya bhi online ho jisase aam log labhanvit ho sake.
    pratap panwar v/p malwara teh.sanchore jalore 9414529027 02979285736 ptrbishnoi29@gmail.com,dcjalore@gmail.com

  63. sagar godara Says:

    bishnoi samaj ke bare me padh kar or photo dekh ker bahut shikh milti hai or ye samaj hamari captani kare ye hamari chahat hai naman

  64. POOJA MAAL SATHERAN Says:

    BISHNOI SAMAJ KE BARE ME LIKHANE OR FOTO & VIDEO DIKHANE KE LIYE VERY 2 THANKS.WE LOVE ONLY GOD GIFT NATURALATY & SAVE IT

  65. sanjay Says:

    Arrow Keys are located at the dottom end [ right side] ofthe
    krydoard. There are four Keys With arrows.
    The Scroll Lock key is used to stop text to stop

  66. dimpal bishnoi Says:

    this metter is very clasic and i read to bishnoi samaj history and io like this

  67. Rituraj Says:

    vandneeya………………..

  68. sudhir bishnoi Says:

    hey everbody
    u can check bishnoi’s 29 rules in http://www.bishnoism.com with full of meaning that y guruji made it
    its all for save earth,trees ,n humanity n clearity

  69. OP DHAKA Says:

    नरेश जी और आपको जानकारी के लिये साधुवाद
    KHEJRLI SHANDON KO PARNAAM..

  70. Hafiz mansuri Says:

    East or west bishnoi is the best

  71. Vimal Kumar Vishnoi Says:

    GURU JAMBHESWER JI KE DWARA STHAPIT VISHNOI SAMPRADAY EK MISHAL BAN GAYA HAI OR ISKE UDDESYO KO MANNE KE BAAD TO MUKTI PANA SARAL HAI. 9458031001..9927903061.MORADABAD. U.P.

  72. Vimal Kumar Vishnoi Says:

    VISHNOI SWARN AASHRAM TRUST SARAKARA VISHNOI DILARI MORADABAD,U.P.INDIA.244401. KE DWARA VISHNOI SAMAJ KE UTTHAN KE LIYE SABHI KANOONI ADVICE FREE ME DI JATI HAI OR SAMAJ KO EK SUTRA ME BAANDHNE KO PRAYASRAT HAI.SUJHAAB DENE KE LIYE AAP SABHI KA DHANYABAD.9458031001,9927903061.

  73. Vimal Vishnoi Says:

    VISHNOIYO KA BALIDAN PURE SANSAR ME JANA JATA HAI,363 VISHNOI MALE/FEMELE NE HARE TREES KO KATNE SE PEHLE APNA BALIDAN DE DIYA THA.AISHA EXAMPLE KAHI AUR DEKHNE K NAHI MILTA. 9458031001.9927903061.

  74. VIMAL KUMAR VISHNOI Says:

    VISHNOI SWARN AASHRAM TRUST,SARAKARA VISHNOI,DILARI ,THAKURDWARA,MORADABAD,UP.INDIA,KA MUKHYA UDDESYA JANHIT MAIN NISHULK SEWA KARNA HAI,ISKE DWARA HOSPITALS,AMBULENSES,COLLEGES,ROTI,KAPRA OR MAKAN KI VYAVASTHA KARNA HAI,JISSE DHARMIK OR SAMAJIK KARYA KI POORTIYO KE ANUDAN DIYE OR LIYE JAATE HAI.JANTA KI SEWA KAR SAKE. SBI.A/C-NO- 31986463604.

  75. मेघाराम बागङवा कुडकी Says:

    आप को दीपावली की सुभकामनाऐ

  76. vinod dharnia Says:

    very good article

  77. Amit Kumar Bishnoi Says:

    very nice

  78. NARENDRA DHAKA BISHNOI Says:

    sabhi dharam premiyo ka hardik aabhar
    Narayan Mohan Ram Bishnoi

  79. ARVIND KHILERY Says:

    bishnoi samaj ek paryawaran premi samaj he. is sampraday ke
    363 logo ka balidan vishav vikhyat he. Is sampraday ke sansthapak jambhoi ko shat shat naman

  80. ARVIND KHILERY malwara (sanchore) Says:

    very nice photo

  81. L.R.IRWAL Says:

    very nice

  82. a honest rating Says:

    I like the helpful info you provide in your articles. I’ll bookmark your blog and check again here regularly. I am quite certain I’ll learn lots of new stuff right
    here! Good luck for the next!

  83. Bishnoi29rp@gmail.com Says:

    बिश्वोई समाज पर केन्द्रित आपकी पोस्ट सराहनीय है।
    नि:संदेह विश्नोई समाज प्रकृति प्रेमी है।

  84. Bishnoi29rp@gmail.com Says:

    thanks

  85. prakash kumar suthar Says:

    mukam malpura post varman tahasil revdar jilla sirohi rajshthan pin 307514

  86. shriram bishnoi bajju Says:

    adbhut sabhi bandhuo ne samaj ki tahe dil se hosla afjai ki h. ……aabhar……

  87. आर.पी. बिश्नोई (प्रबन्ध सम्पादक बिश्नोई सन्देश मासिक) Says:

    इस वेबसाईट के संचालक महोदय का तहेदिल से आभार। हमारे समाज के बारे में जानकारी पोस्ट करने के लिए। हमारा समाज आपाका आभारी रहेगा।
    वैसे नरेशसिंहजी ने कुछ नहीं लिखा है यह विकीपिीडिया पर हमारा ही पोस्ट किया हुआ हे वहां से कोपी करके इधर पेस्ट किया है। फिर भ्ीा इनको धन्यवाद

  88. ashokbishnoi Says:

    thank u

  89. Prakashchand Bishnoi Says:

    सभी मानव जाति को उसको जानने के प्रयास करने का उपदेश दे गए – यानि जीवन का लक्ष्य मानने का…गौरवशाली परम्परा को जानने से, विश्नोई समाज का पर्यावण प्रेम निश्चय ही स्तुत्य है..

  90. Mahender Beniwal Says:

    Jeev daya palani,Runkh leela na ghavai.
    Ajhar jarai jeevat,Mare vas baikuth pavai.

  91. JAi bishnoi Says:

    Post k liye hardik aabhar adhik jankari ke liye visit kre.
    http://www.Facebook.com/gurujambheshwarpage

  92. प्राण चड्डा , Says:

    आने वाली पीढ़ी तक ये ज्ञान ये भावना पहुंचे इस कमाना के साथ …

  93. Anoop bishnoi Says:

    Jai jambheshwar

  94. Ramprakash Bishnoi Says:

    वेबसाईट के संचालक महोदय का तहेदिल से आभार। हमारे समाज के बारे में जानकारी पोस्ट करने के लिए। हमारा समाज आपाका आभारी रहेगा।
    For more detail visit…..श्री गुरु जम्भेश्वर धाम जाम्भा – जाम्बोलाव page
    https://www.facebook.com/JambheshwarBhagwan

  95. pancharam dara Says:

    जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित इस सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए उनतीस नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस सम्बन्ध में एक कहावत बहुत प्रसिद्ध है, जो इस प्रकार है –

    १) प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करना।
    २) ३० दिन जनन – सूतक मानना।
    ३) ५ दिन रजस्वता स्री को गृह कार्यों से मुक्त रखना।
    ४) शील का पालन करना।
    ५) संतोष का धारण करना।
    ६) बाहरी एवं आन्तरिक शुद्धता एवं पवित्रता को बनाये रखना।
    ७) तीन समय संध्या उपासना करना।
    ८) संध्या के समय आरती करना एवं ईश्वर के गुणों के बारे में चिंतन करना।
    ९) निष्ठा एवं प्रेमपूर्वक हवन करना।
    १०) पानी, ईंधन व दूध को छान-बीन कर प्रयोग में लेना।
    ११) वाणी का संयम करना।
    १२) दया एवं क्षमाको धारण करना।
    १३) चोरी,
    १४) निंदा,
    १५) झूठ तथा
    १६) वाद – विवाद का त्याग करना।
    १७) अमावश्या के दिनव्रत करना।
    १८) विष्णु का भजन करना।
    १९) जीवों के प्रति दया का भाव रखना।
    २०) हरा वृक्ष नहीं कटवाना।
    २१) काम, क्रोध, मोह एवं लोभ का नाश करना।
    २२) रसोई अपने हाध से बनाना।
    २३) परोपकारी पशुओं की रक्षा करना।
    २४) अमल,
    २५) तम्बाकू,
    २६) भांग
    २७) मद्य तथा
    २८) नील का त्याग करना।
    २९) बैल को बधिया नहीं करवाना।

    जाम्भोजी की शिक्षाओं पर अन्य धर्मों का प्रभाव स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता है। उन्होंने जैन धर्म से अहिंसा एवं दया का सिद्धान्त तथा इस्लाम धर्म से मुर्दों को गाड़ना, विवाह के समय फेरे न लेना आदि सिद्धान्त ग्रहण किये हैं। उनकी शिक्षाओं पर वैष्णव सम्प्रदाय तथा नानकपंथ का भी बड़ा प्रभाव है।
    इस सम्प्रदाय में गुरु दीक्षा एवं डोली पाहल आदि संस्कार साधुओं द्वारा सम्पादित करवाये जाते हैं, जिनमें कुछ महन्त भी भाग लेते हैं। वे महन्त, स्थानविशेष की गद्दी के अधिकारी होते हैं परन्तु थापन नामक वर्ग के लोग नामकरण, विवाह एवं अन्तयेष्टि आदि संस्कारों को सम्पादित करवाते हैं। चेतावनी लिखने एवं समारोहों के अवसरों पर गाने बजाने आदि कार्यों के लिए गायन अलग होते हैं।

    इस सम्प्रदाय में परस्पर मिलने पर अभिवादन के लिए ‘नवम प्रणाम’, तथा प्रतिवचन में’ विष्णु नै जांभौजी नै’ कहा जाता है।

    विश्नोई औरतें लाल और काली ऊन के कपड़े पहनती हैं। वे सिर्फ लाख का चूड़ा ही पहनती हैं। वे न तो बदन गुदाती हैं न तो दाँतों पर सोना चढ़ाती है। विश्नोई लोग नीले रंगके कपड़े पहनना पसंद नहीं करते हैं। वे ऊनी वस्र पहनना अच्छा मानते हैं, क्योंकी उसे पवित्र मानते हैं। साधु कान तक आने वाली तीखी जांभोजी टोपी एवं चपटे मनकों की आबनूस की काली माला पहनते हैं। महन्त प्राय: धोती, कमीज और सिर पर भगवा साफा बाँधते हैं।
    विश्नोईयों में शव को गाड़ने की प्रथा प्रचलित थी।

    विश्नोई सम्प्रदाय मूर्ति पूजा में विश्वास महीं करता है। अत: जाम्भोजी के मंदिर और साथरियों में किसी प्रकार की मूर्ति नहीं होती है। कुछ स्थानों पर इस सम्प्रदाय के सदस्य जाम्भोजी की वस्तुओं की पूजा करते हैं। जैसे कि पीपसार में जाम्भोजी की खड़ाऊ जोड़ी, मुकाम में टोपी, पिछोवड़ों जांगलू में भिक्षा पात्र तथा चोला एवं लोहावट में पैर के निशानों की पूजा की जाती है। वहाँ प्रतिदिन हवन – भजन होता है और विष्णु स्तुति एवं उपासना, संध्यादि कर्म तथा जम्भा जागरण भी सम्पन्न होता है।
    इस सम्प्रदाय के लोग जात – पात में विश्वास नहीं रखते। अत: हिन्दू -मुसलमान दोनों ही जाति के लोग इनको स्वीकार करते हैं। श्री जंभ सार लक्ष्य से इस बात की पुष्टि होती है कि सभी जातियों के लोग इस सम्प्रदाय में दीक्षीत हुए। उदाहरणस्वरुप, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, तेली, धोबी, खाती, नाई, डमरु, भाट, छीपा, मुसलमान, जाट, एवं साईं आदि जाति के लोगों ने मंत्रित जल (पाहल) लेकर इस सम्प्रदाय में दीक्षा ग्रहण की।

    राजस्थान में जोधपुर तथा बीकानेर राज्य में बड़ी संख्या में इस सम्प्रदाय के मंदिर और साथरियां बनी हुई हैं। मुकाम (तालवा) नामक स्थान पर इस सम्प्रदाय का मुख्य मंदिर बना हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष फाल्गुन की अमावश्या को एक बहुत बड़ा मेला लगता है जिसमें हजारों लोग भाग लेते हैं। इस सम्प्रदाय के अन्य तीर्थस्थानों में जांभोलाव, पीपासार, संभराथल, जांगलू,लोहावर, लालासार आदि तीर्थ विशेष रुप से उल्लेखनीय हैं। इनमें जांभोलाव विश्नोईयों का तीर्थराज तथा संभराथल मथुरा और द्वारिका के सदृश माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त रायसिंह नगर, पदमपुर, चक, पीलीबंगा, संगरिया, तन्दूरवाली, श्रीगंगानगर, रिडमलसर, लखासर, कोलायत (बीकानेर), लाम्बा, तिलवासणी, अलाय (नागौर)एवं पुष्कर आदि स्थानों पर भी इस सम्प्रदाय के छोटे -छोटे मंदिर बने हुए हैं। इस सम्प्रदाय का राजस्थान से बाहर भी प्रचार हुआ। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बने हुए मंदिर इस बात की पुष्टि करते हैं।

    जाम्भोजी की शिक्षाओं का विश्नोईयों पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ा। इसीलिए इस सम्प्रदाय के लोग न तो मांस खाते हैं और न ही शराब पीते हैं। इसके अतिरिक्त वे अपनी ग्राम की सीमा में हिरण या अन्य किसी पशु का शिकार भी नहीं करने देते हैं।

    इस सम्प्रदाय के सदस्य पशु हत्या किसी भी कीमत पर नहीं होने देते हैं। बीकानेर राज्य के एक परवाने से पता चलता है कि तालवा के महंत ने दीने नामक व्यक्ति से पशु हत्या की आशंका के कारण उसका मेढ़ा छीन लिया था।

    व्यक्ति को नियम विरुद्ध कार्य करने से रोकने के लिए प्रत्येक विश्नोई गाँव में एक पंचायत होती थी। नियम विरुद्ध कार्य करने वाले व्यक्ति को यह पंचायत धर्म या जाति से पदच्युत करने की घोषणा कर देती थी। उदाहरणस्वरुप संवत् २००१ में बाबू नामक व्यक्ति ने रुडकली गाँव में मुर्गे को मार दिया था, इस पर वहाँ पंचायत ने उसे जाति से बाहर कर दिया था।

    ग्रामीण पंचायतों के अलावा बड़े पैमाने पर भी विश्नोईयों की एक पंचायत होती थी, जो जांभोलाव एवं मुकाम पर आयोजित होने वाले सबसे बड़े मेले के अवसर पर बैठती थी। इसमें इस सम्प्रदाय के बने हुए नियमों के पालन करने पर जोर दिया जाता था। विभिन्न मेलों के अवसर पर लिये गये निर्णयों से पता चलता है कि इस पंचायत की निर्णित बातें और व्यवस्था का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य था और जो व्यक्ति इसका उल्लंघन करता था, उसे विश्नोई समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता था।

    विश्नोई गाँव में कोई भी व्यक्ति खेजड़े या शमी वृक्ष की हरी डाली नहीं काट सकता था। इस सम्प्रदाय के जिन स्री – पुरुषों ने खेजड़े और हरे वृक्षों को काटा था, उन्होंने स्वेच्छा से आत्मोत्सर्ग किया था। इस बात की पुष्टि जाम्भोजी सम्बन्धी साहित्य से होती है।

    राजस्थान के शासकों ने भी इस सम्प्रदाय को मान्यता देते हुए हमेशा उसके धार्मिक विश्वासों का ध्यान रखा है। यही कारण है कि जोधपुर व बिकानेर राज्य की ओर से समय – समय पर अनेक आदेश गाँव के पट्टायतों को दिए गए हैं, जिनमें उन्हें विश्नोई गाँवों में खेजड़े न काटने और शिकार न करने का निर्देश दिया गया है।

    बीकानेर ने संवत् १९०७ में कसाइयों को बकरे लेकर किसी भी विश्नोई गाँव में से होकर न गुजरने का आदेश दिया। बीकानेर राज्य के शासकों ने समय – समय पर विश्नोई मंदिरों को भूमिदान दिए गए हैं। ऐसे प्रमाण प्राप्त हुए हैं कि सुजानसिंह ने मुकाम मंदिर को ३००० बीघा एवं जांगलू मंदिर को १००० बीघा जमीन दी थी।

    बीकानेर ने संवत् १८७७ व १८८७ में एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुसार थापनों से बिना गुनाह के कुछ भी न लेने का निर्देश दिया था। इस प्रकार जोधपुर राज्य के शासक ने भी विश्नोईयों को जमीन एवं लगान के सम्बन्ध में अनेक रियायतें प्रदान की थीं। उदयपुर के महाराणा भीमसिंह जी और जवानसिंह जी ने भी जोधपुर के विश्नोईयों की पूर्व परम्परा अनुसार ही मान – मर्यादा रखने और कर लगाने के परवाने दिये थे।

  96. Pancharam Dara Says:

    अद्भुद जीवट और इच्‍छा षक्ति का स्‍वामी है विश्‍नोई समाज। पर्यावरण रक्षा हेतु मर मिटने का ऐसा जज्‍बा दुनिया के किसी और समाज में नहीं है।

    चित्र निश्‍चय ही सुन्‍दर, आकर्षक और पोस्‍ट को अधिक अर्थवान बनानेवाले हैं।

  97. hetram ishrawal Says:

    अद्भुद जीवट और इच्‍छा षक्ति का स्‍वामी है विश्‍नोई समाज। पर्यावरण रक्षा हेतु मर मिटने का ऐसा जज्‍बा दुनिया के किसी और समाज में नहीं है।

    चित्र निश्‍चय ही सुन्‍दर, आकर्षक और पोस्‍ट को अधिक अर्थवान बनानेवाले हैं।

  98. Prakashchand Bishnoi (PC Bishnoi) Says:

    बिश्नोईयों का मुक्ति धाम मुकामः शाश्वत है श्री गुरू जभेश्वर भगवन के नियम

    http://dhorimannatagline.blogspot.com/2014/02/blog-post_1940.html

  99. PC BISHNOI Says:

    बिश्नोईयों का मुक्ति धाम मुकामः शाश्वत है श्री गुरू जभेश्वर भगवन के नियम

    भारत आध्यात्मिक गुरूओं, सूफी-संतो की तपोभूमि है। जिन्होंने अलग-अलग कालखण्ड में इस धरा में जन्म लेकर अपने आध्यात्मिक चिंतन, वाणी और शिक्षाओं से समाज और देश को समृद्ध किया है। राजस्थान की मरूभूमि में भी बिरले व्यक्तित्व के धनी, प्रकृति उपासक संत के रूप में बिश्नोई धर्म के प्रवर्तक जाभोजी का प्रादुर्भाव हुआ। गुरू जभेश्वर द्वारा दिखाये गए मार्ग और सीख आज संपूर्ण मानवता और जीव-जगत कल्याण का आधार बनी है। बीकानेर जिले की नोखा तहसील के गांव मुकाम में गुरू जभेश्वर का समाधि स्थल मुकाम धाम बिश्नोई समाज का तीर्थ स्थल ही नहीं दीन-दुनिया के श्रद्धा का प्रमुख केन्द्र बन गया है।

    गांव मुकाम में लगने वाले राष्ट्रीय स्तर के मेले की तैयारियों एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है। बड़ी संख्या में पैदल व वाहनों से श्रद्धालु पहुंचे वहीं श्रद्धालुओं के आने का क्रम लगातार जारी है। श्रद्धालुओं ने निज मंदिर में धोक लगाकर हवन में घी खोपरों की आहुतियां दी। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा की ओर से बिश्नोई समाज के खुले अधिवेशन का आयोजन

    महासभा द्वारा : दुकानदारों को को प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। मुख्य मंदिर व आस पास के क्षेत्र को रोशनी से सजाया गया है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों को अधिकारियों के कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है। मेला परिसर से बाहर वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की गई है। यहां से दो किमी दूर समराथल धोरे पर भी श्रद्धालुओं की चहल पहल बढ़ गई है।

    सहित विविध आयोजन संत महात्माओं के सान्निध्य में होता है। अधिवेशन में राजनेता, जन प्रतिनिधि व देश-विदेश के हजारों की तादाद में बिश्नोई समाज के लोग हिस्सा लेकर 29 नियमों के माध्यम से चराचर जीव की रक्षा का संदेश देने वाले, आदर्श समाज की आचार संहिता प्रतिष्ठित करने वाले गुरू जभेश्वर के आदर्शो का स्मरण करते हैं।

    मुकाम में विक्रम संवत् 1593 मार्ग शीर्ष एकादशी को 85 वर्ष की आयु में गुरू जभेश्वर ने समाधि ली थी। उनके बनाये 29 नियमों की पालना करने वाले ही बिश्नोई कहलाते है। गुरू जंभेश्वर ने नियमों के साथ मानवीय चेतना, पर्यावरण रक्षा तथा उतम जीवनचर्या का संदेश देने वाली 120 साखियों की भी संरचना की।

    नागौर जिले के पीपासर गांव में वर्ष 1451 में जन्माष्टमी के दिन पंवार राजपूत परिवार में जन्में गुरू जभेश्वर के पिता नाम लोहटजी व माता का नाम हंसा देवी (केशर) था। इकलौती संतान होने के कारण माता-पिता व परिजन उन्हें बहुत प्यार करते थे। लेकिन जाभोजी बाल्यावस्था में ही मौन धारण रखते हुए आत्म व परमात्म चिंतन करने लगे। वर्षो तक गौ सेवा करने वाले जांभोजी 34 वर्ष की आयु में कार्तिक बदी अष्टमी सन् 1485 में समराथल धोरे पर पवित्रा पाहल बनाकर बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की। उन्होंने 51 वर्ष तक समराथल धोरे पर ही सत्संग व भगवान विष्णु की साधना व भक्ति में समय व्यतीत किया । उन्होंने 29 नियम बनाकर उसका व्यापक प्रचार प्रसार किया। उन्होंने लौकिक देह को विक्रम सवत 1526 में तालवा वर्तमान मुकाम गांव में त्याग अपने आलौकिक संदेशों की प्रतिष्ठा को चार चांद लगा दिए। उन्होंने जो 29 नियम बनाए उनके संबंध में एक कहावत भी प्रसिद्ध है “उणतीस धर्म की आंकडी, हृदय धरियो जोय, जांभोजी की कृपा करी नाम बिश्नोई होय“।

    गुरू जभेश्वर के 29 नियमों में प्रतिदिन सुबह स्नान करना, 30 दिन जन्म सुआ मनाना, पांच दिन रजस्वला स्त्राी को आंतरिक शुद्धता एवं पवित्राता को बनाए रखना, तीन समय संध्या उपासना करना, संध्या के समय आरती करना एवं ईश्वर के गुणों के बारे में चिंतन करना, निष्ठा एवं प्रेम पूर्वक हवन करना, पानी, दूध को छानकर पीना, वाणी में संयम रखना, दया एवं क्षमा को धारण करना, चोरी, निंदा, झूठ तथा वाद-विवाद का त्याग करना, अमावस्या के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु का भजन करना, जीवों के प्रति दया का भाव रखना, हरा वृक्ष नहीं काटना, काम क्रोध मोह एवं लोभ का नाश करना, रसोई अपने हाथ से बनाना, जीव जंतुओं पशुओं की रक्षा करना, अमल, तंबाकू, भांग मद्य, नील का त्याग करना तथा बैल की बधिया नहीं करना। गुरू जंभेश्वर द्वारा बताएं अहिंसा, दया, व पर्यावरण रक्षा तथा नशाखोरी की प्रवृति से दूर रहने आदि के नियम और सिद्धान्त युगों-युगों तक प्रासंगिक रहेंगें।

    मुकाम में प्रतिवर्ष फाल्गुन व आश्विन में प्रतिवर्ष मेले भरते है, मेले में आने वाले श्रद्धालु विशाल गगन चुंबी सफेद संगमरमर से बने गुरू जभेश्वर के मंदिर परिसर में खोपरे व शुद्ध घी से हवन में आहुतियां देने से समूचे मेला स्थल का वातावरण सुगंधमय बन जाता है। मेले में आने वाले श्रद्धालु गुरू जंभेश्वर की जन्म स्थली पीपासर व तपस्या स्थली समराथल धोरों पर स्थित मंदिर में भी धोक लगाएंगे तथा हवन में आहुतियां देने सहित पक्षियों के लिए चुग्गा डालते है, तथा मरू प्रदेश के कल्पवृक्ष खेजडी सहित विभिन्न वृक्षों को लगाने, हरिण आदि वन्य जीवों की रक्षा के संकल्प को दोहराते हैं। मेले के दौरान सेवक दल की ओर से भोजनालय सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन किया जाएगा। हरियाणा, पंजाब, सहित अन्य प्रान्तों से विशेष रेल व विभिन्न वाहनों में आने वाले श्रद्धालुओं के प्रवास व भोजन की व्यवसथा में मेले के एक सप्ताह पूर्व ही स्वयं सेवक दल के सदस्य लग गए है।

    अतः समाज में शुद्र -सेवा भाव से सेवा देने वाला अत्यंत आवश्यक है। इसके बिना क्षत्रिय को शुद्र बनना पड़ता है – इसके बिना ब्राह्मण को शुद्र बनना पड़ता है जो के आज देख रहे हो- इसके बिना बनिये को भी नौकरी कर सेवा देनी पडती है। अतः या तो इस वर्ग के गुणों का सम्मान करते हुए – इसे इज्ज़त देते हुए -इससे लाभ उठाते हुए – थोड़ी काम में ऊंच नीच झेलते हुए इस वर्ग को जिन्दा रखो या इसकी अवहेलना निंदा उंच नीच फैला के किसी युग में इसके ही अधीन होने पे विवश होवो।

    प्रकाशचंद बिश्नोई (धोरीमन्ना)
    http://dhorimannatagline.blogspot.com/2014/02/blog-post_1940.html

  100. prem Says:

    gyjhty

  101. रवि उईके Says:

    हमारी इस छोटि सी शुरवात से
    भविष्य बदल सकता है !

  102. जय खीचङ Says:

    जिण भूमि बिश्नोई रेवे,
    बठे वन’जीव रो ठोर।
    जीव जगत सूं प्रेम रो,
    दृष्टांत मिले नी ओर।।

    रूंखा ताहीं सर देवे,
    पंथ जगत मं जोर ।
    रूंखा मं प्राण हुवे,
    ज्यूं प्राण मनुरी डोर।
    रूंख मिनख न सांसा देवे,
    अठे रूंखारी सांस मिनख ठोर।
    जीव जगत सूं प्रेमरो,
    दृष्टांत मिले नी ओर।।

    जीवां खातिर देह तजे,
    बे पावे सुरगे ठोर।
    जीव दया नित रखे,
    बे मिनख मरूरा भोम।
    देह तज जीव बचावे,
    बे लेवे जन्म नी ओर।
    जीव जगत सूं प्रेमरो,
    दृष्टांत मिले नी ओर।।

    वन’जीव रक्षीत रेवे,
    बिश्नोईयां रे ठोर।
    निरभै बठे विचरण करे,
    के हिरण के मोर।।
    जंभ कृपा सदा रेवे,
    चाले धर्म री डोर।
    जीव जगत सूं प्रेमरो,
    दृष्टांत मिले नी ओर।।

    जय खीचड़
    http://www.bishnoism.org

  103. subhash bishnoi Says:

    Bishnoi ak sundhr samaj hai jo pariyavrny se payr krta hai . Muje grv hai ki mene bishnoi samaj me jnm liya ha …… 9657271437

  104. shrawan Kumar bishnoi Says:

    09974212929 the bishnoi youa team sanchore

  105. dinesh bishnoi Says:

    bishnoi smaj ka adbhut karm ko……sat sat naman

  106. मदन लाल विश्नोई Says:

    विश्नोई समाज के रत्न श्री रामरतनजी एवं फिल्म निर्माण में सहयोगी अन्य कलाकार धन्यवाद के पात्र है जिनके प्रयास से विश्नोई समाज के पर्यावरण के प्रति अनुपम प्रेम,उनके त्याग,बलिदान एवं शौर्य की गाथा को विश्व में नई पहचान मिलेगी |

  107. GOVIND BHATI BALOTRA Says:

    Me govind bhat balotra se
    Aap ke no. Plzz dijiy ga

  108. mahendra bishnoi Says:

    very good

  109. श्रवण बिश्नोई Says:

    मुझे बिश्नोई होने पर गर्व है।

  110. ganga Says:

    very nice think

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