सेंट थॉमस द्वारा स्थापित भारत के प्राचीन चर्च

दक्षिण भारत में, वह भी ख़ास कर केरल के रोमन केथोलिक्स में ऐसा विश्वास है कि सेंट थॉमस जो जीसस के प्रथम शिष्यों में रहे, सन ५२ ईसवी में भारत में धर्म प्रचार हेतु आये थे. उनके बेड़े ने केरल के कोडूनगल्लुर के निकट मलनकरा   (मलियान्कारा) में लंगर डाली थी और कालांतर में स्थानीय लोगों का धर्मांतरण कर साढ़े सात चर्चों अथवा ईसाई  समुदायों का गठन किया था. या हम ऐसा भी मान सकते हैं कि उन समुदायों को धर्मान्तरित किया था. यह  ध्यान देने वाली बात है कि चर्च का तात्पर्य किसी भवन से नहीं रहा था लेकिन ज्यों ज्यों उन समुदायों  को इकट्ठे होने के लिए प्रार्थना स्थलों का निर्माण हुआ, वे ही  चर्च कहलाने लगे. आज भी केरल के परंपरागत रूढ़िवादी ईसाई समुदाय चर्च के बदले “सभा” शब्द का प्रयोग करते हैं. धर्मान्तरित पहले सात समुदाय क्रमशः  मलनकरा (मलियान्कारा), पलयूर, कोट्टाकावू, कोक्कामंगलम, निरनम, कोल्लम तथा चायल में  बसे थे. इन सभी जगहों में आज कई  बड़े बड़े चर्च हैं, परन्तु इन अस्थि पंजरों युक्त चर्चों का निर्माण कब हुआ था, कहना कठिन है क्योंकि वे सब आधुनिकता के लबादे में दीखते हैं.   मलनकरा का जो समुदाय था उनके ढेर सारे चर्च कई जगहों पर हैं और सभी अपने आपको प्राचीनतम कहते हैं. जैसा ऊपर इंगित किया गया है, सेंट थॉमस ने कुछ समुदायों को धर्मान्तरित किया था न कि ईंट गारे  से निर्मित किसी प्रार्थना स्थल  (चर्च) का निर्माण. स्वाभाविक ही है कि  बाद में उन समुदायों ने अपनी अपनी प्रार्थना स्थली कालांतर में बना ली हो. यही एक कारण है कि हमें इस सम्प्रदाय के बारे में कोई ठोस पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिल रहे हैं. जो हैं वे सब १० वीं सदी या उसके बाद के ही हैं. आईये देखें उन सभी सात जगहों की चर्चों को.

मलनकरा, इसी नाम से कई चर्च अन्यत्र भी हैं. यह चर्च वास्तव में अन्गामाली  में है

सेंट थॉमस चर्च, पलयूर

पलयूर  वाले तो अपने चर्च के भवन को ही  सन ५२ ईसवी का मानते हैं.

कोट्टाकावू

कोक्कामंगलम

निरनम

निरनम का ही एक दूसरा चर्च जो अपने को प्राचीनकाल का मानता है

कोल्लम

चायल

ऊपर हमने सात चिन्हित स्थलों के चर्चों का ब्यौरा तो दे दिया लेकिन एक आधा बचा हुआ है. इस आधे के चक्कर को हम यों मान सकते हैं कि उस समुदाय के पूरे लोग धर्मान्तरित नहीं हुए होंगे. केवल आधे ने ही इस नए धर्म को स्वीकार किया. यह रोचक है कि “तिरुविदांकोड़” नामक जगह में जो पद्मनाभपुरम से लगभग २ किलोमीटर की दूरी पर है, एक चर्च है जिसे उस “आधे” होने का श्रेय दिया जाता है. बाकायदा वहां एक सूचना फलक भी लगा है जिसमें निर्माण वर्ष सन ६३ ईसवी बताया गया है. ऐसा लगता है मानो उस समुदाय ने अपने पूर्व के पूजा स्थल को ही गिरिजा घर में बदल लिया हो.





31 Responses to “सेंट थॉमस द्वारा स्थापित भारत के प्राचीन चर्च”

  1. राहुल सिंह Says:

    गजब की साढ़े साती है और आस्‍था के सामने इतिहास घुटने टेक ही देता है. हम भी नतमस्‍तक हैं

  2. प्रवीण पाण्डेय Says:

    इतिहास का एक पक्ष ज्ञात हुआ।

  3. JC Joshi Says:

    जानकारी के लिए धन्यवाद!

    ‘(शनि की) साढ़े साती’ से याद आया की पश्चिम दिशा को शनि के नियंत्रण में होना माना गया, और नीले रंग को उसका सार,,, और उसे लोहे धातु से (और मानव शरीर में स्नायु तंत्र से) भी सम्बंधित माना गया, आदि, आदि…

  4. Indranil Bhattacharjee Says:

    अच्छी जानकारी है … वैसे ये सच है कि भारत में ऐसी बात कई जगह देखने के लिए मिलती है कि चाहे ईसाई हो या इस्लाम … जहाँ भी धर्मान्तरण हुआ है …. पहले के मंदिरों को चर्च या फिर मस्जिद या मज़ार में बदल दिया गया है ….

  5. satish saxena Says:

    आधा चर्चा / गिरिजा घर पर थोडा और लिखते तो और अच्छा लगता ! बहरहाल चित्र बहुत अच्छे लगे ! इतिहास की जो जानकारी आप दे रहे हैं, वह समय के साथ अनूठी और दुर्लभ मानी जायेगी !
    सादर

  6. संजय @ मो सम कौन? Says:

    एक आदमी अपनी ससुराल गया और शर्म के कारण जल्दी ही और रोटी के लिये मना कर बैठा। उधर से आग्रह किया गया कि अच्छा ये आधी तो खाईये। श्रीमान जी ने आधी खाई और बोले, ये आधी वाली तो बहुत स्वाद है, यही आने दो चार-पांच और।
    नाराज मत होईयेगा, ये अपुन का स्टाईल है तारीफ़ करने का। आधी चर्च वाली बात बेहद पसंद आई, और मांगता है अपुन को:)
    दक्षिण के स्थाप्त्य कला का नमूना हिन्दु मंदिरों के माध्यम से देख चुके हैं, आज अलग अलग चर्च के दर्शन दीदार करवा कर आपने और प्रफ़ुल्लित कर दिया है।
    सुब्रमणियन साहब, दिल से आभारी हैं आपके।

  7. Braj Kishore Says:

    रोमिला थापर और ए. एल बैशम से संत थामस के बारे में पता था पर समुदायों के विषय में एकदम नहीं जानता था.फोटो देख कर लगा कि यात्रा भी कर ली.
    शुक्रिया.

  8. seema gupta Says:

    सेंट थॉमस द्वारा स्थापित भारत के प्राचीन चर्च के अंतर्गत बेहद सुन्दर जानकारी और मनमोहक चित्र

    regards

  9. RAJ SINH Says:

    राहुल सिंह की टिप्पणी से सहमत .आपकी पोस्ट से गदगद !

  10. भारतीय नागरिक Says:

    इन्द्रनील जी से सहमत. गिरजाघर की स्थापत्य कला अच्छी लगती है.. यही नहीं पता नहीं मुझे सभी पुरानी इमारतें क्यों आकर्षित करती हैं.

  11. ghughutibasuti Says:

    बहुत बढिया जानकारी व चित्र. आभार.
    घुघूती बासूती

  12. राज भाटिया Says:

    बहुत सुंदर जानकारी जी, वेसे बहुत दुख होता हे जब देखते हे कि मंदिरो को तोड कर, उन पर कब्जा कर के उन्हे दुसरा रुप दिया गया हे कारण कोई भी हो… नीचे वाले चित्र से साफ़ झलक आती हे मंदिरो की, ओर किसी भी धर्म क अपमान कर के दुसरा अपना कब्जा उस पर जमाये तो उसे धर्म नही कहते, उसे गुंडा गर्दी कहते हे,
    सभी चित्र ओर विवरण अच्छॆ लगे . धन्यवाद

  13. हरि जोशी Says:

    क्रिसमस के मौके पर बेहतरीन जानकारी के लिए आभारा मनमोहक चित्रों के साथ सुंदर लेख।

  14. Bharat Bhushan Says:

    मैंने अपने जीवन में धार्मिक स्थानों को बनते और उन पर ‘अति प्राचीन’ होने का शिलालेख लगते देखा है. इतिहास में यह कोई नई बात नहीं है. मैं सभी धार्मिक स्थलों को किसी न किसी रूप में आर्थिक गतिविधि के रूप में देखता हूँ. यही कारण है कि इन पर झगड़े होते हैं. यदि केवल धर्म की बात होती तो झगड़ा कैसा? खैर आपके द्वारा कराया गया भारत दर्शन अनुपम है. आभार.

  15. loksangharsha Says:

    nice

  16. समीर लाल Says:

    आनन्द आ गया

  17. नितिन Says:

    सुन्दर जानकारी! क्रिसमस पर शुभकामनायें।

  18. ali syed Says:

    राहुल सिंह साहब से सहमत !

  19. विष्‍णु बैरागी Says:

    ‘चर्च’ का यह अर्थ पहली बार जाना। इसके लिए धन्‍यवाद।

    इस पोस्‍ट में आपने एक स्‍थान पर इन चर्चों को ”अस्थि पंजरों युक्त” कहा है। किन्‍तु एक भी चित्र में ऐसा आभास नहीं होता। इसे स्‍पष्‍ट कर दिया जाता तो अधिक अच्‍छा होता।

  20. स्वार्थ Says:

    चित्रों से तो आपने साक्षात दर्शन करा दिये।
    धन्यवाद

  21. Gyandutt Pandey Says:

    वाह! शिवलिंग बदल गया नांद में। त्रिशूल बदला होगा क्रॉस में। मैं तो यही सोच रहा हूं कि हिन्दू धर्म में क्या कमजोरियां हैं कि धर्म परिवर्तन हजारों साल से होता आया है।

  22. अभिषेक मिश्र Says:

    एक बार फिर महत्वपूर्ण ऐतिहसिक जानकारी मिली आपसे, धन्यवाद.

  23. amar Says:

    रोचक!

  24. PN Subramanian Says:

    @श्री विष्णु बैरागी जी:
    “अस्थि पंजर से युक्त” से मेरा अभिप्राय यह है कि चर्च शब्द “समुदाय” के लिए था न कि एक ढाँचे के लिए. अतः यह कहना बेमानी होगा कि सेंट थोमस ने उन प्रार्थना स्थलों की स्थापना की थी या निर्माण कराया था. वैसे इन सभी गिरिजा घरों में एक तलघर होता है जहाँ वास्तव में उनके पादरियों आदि के शव पेटियों में बंद कर नीचे रखे जाते हैं.

  25. Zakir Ai Rajnish Says:

    इस सचित्र जानकारी के लिए हार्दिक आभार।
    पर एक बात समझ में नहीं आई कि जब संत थॉमस के आने के इतने सारे प्रमाण हैं, तो फिर उनकी भारत यात्रा को विवादित क्‍यों माना जाता है?
    ———
    अंधविश्‍वासी तथा मूर्ख में फर्क।
    मासिक धर्म : एक कुदरती प्रक्रिया।

  26. zeal ( Divya) Says:

    उपयोगी जानकारी एवं मनोरम चित्रों के लिए आभार।

  27. Isht Deo Sankrityaayan Says:

    अच्छी जानकारी है. आभार!

  28. Alpana Says:

    चर्च शब्द से क्या तात्पर्य रहा यह आज जाना.
    और यह जानकारी भी नयी लगी और आश्चर्यजनक भी कि-”इन सभी गिरिजा घरों में एक तलघर होता है जहाँ वास्तव में उनके पादरियों आदि के शव पेटियों में बंद कर नीचे रखे जाते हैं.”
    ………………………
    बेशक यहाँ दिए सभी के चित्र बेहद सुन्दर हैं .

  29. jc joshi Says:

    जो सदैव अनदेखा और अनजाना है, प्रकृति का रचयिता है, उसे जानने की इच्छा के कारण समय समय पर हमारे पूर्वजों ने विभिन्न मार्ग द्वारा उस तक पहुँचने के लिए मार्ग निर्देशन का विभिन्न ‘धर्मों’ द्वारा प्रयास किया है,,, यद्यपि आप किसी भी ‘धर्म’ को मानने वाले परिवार में उत्पन्न हुए हों, यह आप पर निर्भर होना चाहिए कि आप कौन से मार्ग को सही समझ उस पर चलना चाहेंगे,,, किन्तु प्राकृतिक तौर पर हर व्यक्ति अपने को किसी एक सीढ़ीनुमा मानव तंत्र के किसी विशेष स्तर पर पाता है: उससे कई ऊपर और संभवतः कुछेक नीचे, जिस कारण वो ‘ऊपर वालों’ को गुरु मान उनसे कुछ ज्ञान ग्रहण करता है (हर क्षेत्र में)…कहावत है, “घर का जोगी जोगना / आन गाँव का सिद्ध”…(‘हिन्दुओं’ ने सिद्धि प्राप्ति, यानि हर क्षेत्र के ज्ञान का सार ग्रहण करने पर बल दिया…)

    कामना करते हैं कि नव-वर्ष २०११ सभी के लिए मंगलमय हो”!!!

  30. Bharat Bhushan Says:

    नववर्ष की ढेरों हार्दिक शुभभावनाएँ.

  31. nirmla.kapila Says:

    महत्वपूर्ण जानकारी। आपको सपरिवार नये साल की हार्दिक शुभकामनायें।

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