पिचवरम के मैन्ग्रोव – दुनिया का दूसरा बड़ा

जहाँ समुद्र से नदियाँ मिल रही होती हैं, वहां नदियों में पानी का बहाव थम सा जाता है और एक विशाल क्षेत्र  में पानी का भराव दृष्टिगोचर होता है. बहुदा यह समुद्र का पानी नदी के पानी में मिलकर “बेक वाटर्स” निर्मित करता है. उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में ऐसी जगहें दलदली रहती हैं और एक ख़ास प्रकार की सदाबहार वनस्पति के लिए बहुत ही अनुकूल. इन्हें “मैन्ग्रोव” कहा गया है. विश्व का सबसे बड़ा मैन्ग्रोव जंगल सुंदरबन है जिसका ६० प्रतिशत भाग बंगलादेश और शेष भाग भारत में है. इस प्रकार का दूसरा सबसे बड़ा जंगल भी भारत ही में है.

चिदंबरम का नाम तो सुना ही होगा. हम उस लुंगी धारी की बात नहीं कर रहे हैं जो आजकल  काफी रोशन हो रहे हैं. चिदंबरम वो जगह है जहाँ शिव ने ब्रह्मांडीय नृत्य (कॉस्मिक) का प्रदर्शन किया था. डरें नहीं, हम उस मंदिर की बात नहीं करेंगे. लेकिन यहाँ से मात्र १६ किलोमीटर पूर्व की ओर एक जगह है “पिचवरम”. यहाँ  वेल्लार और कोलेरून  नामके दो नदियों ने, जो मैन्ग्रोव के जंगलों का निर्माण किया है, वह अपनी जैव विविधता के लिए प्रख्यात है.

इन पेड़ पौधों की जड़ें पानी में कुछ फीट गहराई तक डूबी रहती हैं. कुछ जड़ें तो हवा में ही रहती हैं और अपने लिए प्राणवायु (ओषजन) प्राप्त करने का सामर्थ्य रखती हैं. पेड़ों पर ही बीज (फल्ली की तरह) अंकुरित भी हो उठते हैं. इस जंगल का फैलाव लगभग २८०० एकड़ों में है. इन जंगलों की एक बहुत बड़ी उपयोगिता है. यह समुद्र तट पर एक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं. पिछली बार जब उस तट पर सुनामी का प्रकोप हुआ तो मैन्ग्रोव के जंगल के कारण ही उस तट के गाँवों और वहां की आबादी पर कोई आंच नहीं आई थी. सागर से मिलने के पहले सैकड़ों द्वीप बन गए हैं और नदियों द्वारा बनायीं गयी सकरी सकरी और कहीं कहीं चौड़ी जलमार्गों से नौका विहार बच्चों से बूढों एवं पक्षी शास्त्रियों, जैव विज्ञानियों सब के लिए आनंद दाई है.  समुद्र की ओर ले जानी वाले ऐसे जल मार्ग सैकड़ों में है और यहाँ पायी जाने वाली पक्षियों की तो बात ही छोड़ दें. लगभग २०० प्रजातियाँ पायी जाती हैं. प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा भी देखा जा सकता है. वहां के ठहरे हुए से पानी में विभिन्न प्रजाति के जलचर भी हैं. कई प्रकार की मछलियां और झींगे लोकप्रिय हैं. नव विवाहित जोड़ों के लिए तो इस से बेहतर दूसरी जगह नहीं हो सकती. काश हमें वो मौका मिला होता!

पिचवरम में तामिलनाडू पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित अतिथि गृह है. यहाँ ठहरने का इंतज़ाम भी है और वह भी सस्ते में.  खाने की व्यवस्था भी है. वैसे चाहें तो चिदंबरम को ही “बेस” बनाया जा सकता है.  मैन्ग्रोव के जंगलों को नजदीक से देखने के लिए पर्यटन निगम का एक बोट हाउस है जहाँ से नौकाएं किराये पर मिलती हैं. नौकाएं दो प्रकार की हैं. एक तो चप्पू वाला, दूसरा मशीन वाला.  गंभीर प्रकार के लोग चप्पू वाले नाव को पसंद करते हैं. दर प्रति व्यक्ति प्रति  घंटे ३० रुपये है. सागर तट लगभग ६ किलोमीटर दूर है. परन्तु है  लाजवाब.

समुद्र तट की रेत में आपको प्रकृति/लहरों द्वारा बनाया  गया चित्रांकन  मन मोह लेगा.

मुझे अचानक याद आ गया “काफिला” फिल्म में किशोर कुमार और   लता जी का वो गाना “लहरों से पूछ लो या किनारों से पूछ लो, फिर भी यकीन न हो तो सितारों से पूछ लो”.

बहु आयामी चित्रों के लिए एक अच्छी साईट:

http://www.view360.in/virtualtour/pichavaram/

36 Responses to “पिचवरम के मैन्ग्रोव – दुनिया का दूसरा बड़ा”

  1. प्रवीण पाण्डेय Says:

    अहा, बहुत ही सुन्दर। शीघ्र ही घूमने का मन बनाते हैं।

  2. संजय @ मो सम कौन? Says:

    जल्दी ही फ़िर से नव विवाहित होने का जुगाड़ करते हैं:)

  3. seema gupta Says:

    दूर दूर तक समुन्द्र से घिरे मैन्ग्रोव के जंगलों का बेहद खुबसूरत द्रश्य . सुन्दर दर्शनीय स्थल है
    regards

  4. amar Says:

    बहुत ही सुन्दर और चित्ताकर्षक!
    एक बार तो अवश्य ही जाना है उधर घूमने.
    आभार.

  5. राहुल सिंह Says:

    हमारे एक परिचित (फत्‍तू नहीं) तारामंडल, प्‍लेनेटोरियम देखकर गांव वापस आए और कहने लगे ‘शो ऐसा होता है कि कोई शराबी हो तो मान ले कि वह सचमुच खुले आकाश के नीचे तारे देख रहा है, बातों से उब रहे दूसरे ने कहा- इसमें ऐसा क्‍या है, दारू पी लो तो ऐसा यहां भी लगने लगेगा. (नव विवाहित जोड़े, इस प्रसंग की व्‍याख्‍या अपनी सुविधा और मरजी से कर लें, हमने तो यों ही लिख दिया है.) वैसे हसीन नजारे हैं, पिचवरम के.

  6. sanjaybengani Says:

    वाह!

  7. arvind mishra Says:

    पिच्वरम पर्यटन -बस मजा आ गया -नदी मुहाने इस्चुअरी का भी रूप ले लेते हैं न ?

  8. TOPIK GUIDE Says:

    वाह.. बड़ी रमणीक जगह है… हनीमून के लिए संभावित जगहों में गिना जा सकता है इसको.. 😉

  9. Isht Deo Sankrityaayan Says:

    बहुत ही सुन्दर वर्णन है. धन्यवाद.

  10. PN Subramanian Says:

    @डा.अरविन्द मिश्र:
    शत प्रतिशत सही. हमें ये बात नहीं सूझी थी.

  11. RAJ SINH Says:

    चाचा ग़ालिब का एक शेर है .

    जिक्र उस परीवश का और फिर बयाँ……………

    तो वही बात आप पे भी लागू होती है . यह सौन्दर्य और फिर आप की जिक्रे बयानी .
    क्या खूब !

  12. rashmi ravija Says:

    बहुत ही जानकारीपूर्ण आलेख….और बेहद मनमोहक तस्वीरें.

    अपनी बकेट लिस्ट में ‘पिचवरम’ को भी शामिल करना होगा.

  13. ghughutibasuti Says:

    मैनग्रोव तो मेरा मन सदा से लुभाते रहे हैं। पहली बार जब मैंने इन्हें देखा था तो भी मोहित थी और आज भी मोहित हो जाती हूँ। जब इनकी बड़े पैमाने में होती हत्या (जी हाँ, मुम्बई में यह लगातार होती रहती है, तोड़ी हुई इमारतों का मलबा फेंककर समुद्र से आने वाले पानी को बाधित कर इनकी हत्या की जाती है फिर सूखी जमीन को हथिया लिया जाता है।) देखती हूँ तो अपने मानव होने से वितृष्णा होती है।
    बहुत सुन्दर फोटो दिखाने व मैन्ग्रोव्स की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करवाने के लिए आभार।
    घुघूती बासूती

  14. mahendra mishra Says:

    बढ़िया जानकारी और फोटो बड़े जोरदार लगे..आभार

  15. राज भाटिया Says:

    बहुत सुंदर जानकारी दी आप ने अति सुंदर चित्र के संग, मन मोह लिया. धन्यवाद

  16. Gagan Sharma Says:

    जितनी अद्भुत जानकारी उतनी ही सुंदर फोटो।

  17. vinay vaidya Says:

    जी, पी.एन. साहब !
    लाजवाब जानकारी ।
    धन्यवाद !!
    सादर,

  18. Dr.ManojMishra Says:

    बेहतरीन तस्वीरों के साथ फिर यादगार पोस्ट .

  19. jc joshi Says:

    धन्यवाद! मुझे रेत पर हवा से बने चित्र समान जल की कलाकारी भी देख आनंद आया ! वैसे ही जैसा ऑस्ट्रेलिया को नंदी बैल के सर समान पा और अमेरिका को गरुड़ समान देख!

  20. स्वार्थ Says:

    नयनाभिरामी एवम जानकारीपूर्ण लेख। साभार धन्यवाद

  21. Hari Shanker Rarhi Says:

    Pictures are attractive and inviting. A nice travelogue.

  22. satish saxena Says:

    मुझे तो यह वर्णन और विषय अधिक मनोहारी लगा दिल कर रहा है की जाकर देखूं !
    ३० रुपये में एक घंटा ….मुझे लगता है विश्व में सबसे सस्ता होगा इसका मतलब वहां ठहराना भी सस्ता होना चाहिए ! कृपया इस प्रकार की डिटेल भी लिख दिया करें तो हम जैसों का भला होगा !
    सादर

  23. rekha srivastava Says:

    बहुत सुंदर, चित्रों के साथ दिया वर्णन ने मन मोह लिया. सच कहूं तो लगता है की इन चित्रों में ही प्रवेश करके देखा जाय. इस जानकारी के लिए आप आभार के पात्र हैं.

  24. सोमेश सक्सेना Says:

    फोटोस बहुत सुन्दर हैं. मन मोह गए.

  25. Dr.S.K.Tyagi Says:

    मज़ा आ गया पढ़ कर! फोटो देख कर तो एक और शादी की ललक जाग उठी!!

  26. विष्‍णु बैरागी Says:

    आपकी ऐसी पास्‍टें पर्यटन के लिए उकसाती हैं। सुन्‍दर। अति सुन्‍दर।

  27. aradhana Says:

    wonderful !

  28. Zakir Ai Rajnish Says:

    सुब्रमण्‍यम जी, बहुत ही अच्‍छा लगा आपके अनुभवों को साझा करना।

    ———
    पति को वश में करने का उपाय।

  29. nitin Says:

    सुन्दर!!

  30. singhsdm Says:

    बहुत सुन्दर वर्णन…………… काफी दिनों से आपके ब्लॉग पर नहीं आ पा रहा था….देर से आया मगर पुराने सभी पोस्ट पढ़े….बहुत ही सुन्दर वर्णन…!!!!!

  31. ali syed Says:

    आदरणीय सुब्रमनियन जी ,
    आपकी तरह से मौक़ा अपने हाथ से भी गया 🙂

  32. krishna Says:

    सरजी घर में अब तबियत कैसी है, आशा है सब कुशल ही होगा

  33. incitizen Says:

    खूबसूरत अद्भुत रमणीक..

  34. अल्पना Says:

    ‘चिदंबरम’ नाम की एक नयी जगह के बारे में जाना.
    सभी चित्र बहुत सुन्दर हैं.

    लहरों द्वारा बनाया गया चित्रांकन बहुत ही खास लगा.

  35. रंजना Says:

    वाह…अतिसुन्दर….

    itne सुन्दर सुन्दर jagahon ko aap dekh आते hain ,sachmuch bade soubhagyashaalee hain…

    dekhen hamara soubhagya kab udit hota है…

  36. jayesh Says:

    thanks for the info plz give me sme more info about coral reefs in india and all over the world

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: