विस्तार लेता कोयमबेडू, चेन्नई

चेन्नई जाने पर हमें कोयमबेडू में रह रहे अपने छोटे भाई के यहाँ ही ठहरना होता है. इस बार का प्रवास कुछ लंबा रहा. ७६० फ्लेट वाले इस कॉलोनी में उसके घर पहुँचने के लिए ही १.५ किलो मीटर  चलना पड़ता है. एक दिन आस पास के स्थलों को बारीकी से समझने के लिए हम अकेले ही निकल पड़े. घर से निकले ही थे कि हमे दो प्रेमी युगल आपत्ति जनक स्थिति में सड़क पर ही मिल गये.

लगभग आधे घंटे चलने बाद गेट के बाहर पहुंचे और वहां लगे निर्देश पट्टिकाओं का अवलोकन किया. पता चला कि इसे  दक्षिण एशियाई संघ के खेलों के लिए खेलग्राम की तर्ज पर (SAF Games Village)   १९९५ में बनाया गया था. खेलों की समाप्ति पर वहां के अधिकतर माकानों को  सार्वजनिक उपक्रमों को ऊंचे दामों पर बेचा गया था. लगभग १०० माकान भारतीय प्रशाशनिक सेवाओं से जुड़े अधिकारीयों की झोली में गए. अन्दर एक विशालकाय भोजन गृह (स्विम्मिंग पूल सहित) भी है जिनपर भी इन्हीं अधिकारीयों ने कब्ज़ा कर लिया. गेट के बाहर ही पूनमल्ली हाई रोड जाती है. इस सड़क के बीच से ही पुल के ऊपर से चेन्नई मेट्रो जायेगी जिसका निर्माण कार्य बड़ी जोरों से चल रहा है.

बाहर निकल कर हमने बायीं और का रुख किया. कुछ दूर चलने पर ही एक भव्य इमारत दिखी. ऐसा लग रहा था जैसे किसी पानी जहाज़ को उल्टा कर टोपी पहना दी गयी हो. कौतूहल वश कुछ देर वहां खड़ा रहा तो एक सज्जन ने सुझाव दिया देख आईये देख आईये. ऐसा बस अड्डा आपको शायद ही कहीं मिले.

हम तो सर्वेक्षण के लिए ही निकले थे. अन्दर जो बड़ा सा हाल है उसकी विशालता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके भी ऊपर जो चौकोर सी गुम्बद बनी है वही १०० X १५० फीट लम्बी चौड़ी है. ऐसा लगा कि किसी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के अन्दर हों. यह स्थल यात्रियों के लिए है परतु यात्री बहुत कम दिखे. फर्श एकदम साफ़ सुथरी चकाचक थी. हाल से और अन्दर प्रवेश किया जाता है जहाँ बसें इंतज़ार करती हैं. यह भी बड़ा विस्तृत था.

वहां से निकल कर फिर बायीं तरफ ही चल पड़े जहाँ बताया गया था कि एशिया की सबसे बड़ी सब्जी, फल और फूलों की मंडी है. यह चित्र विकिपीडिया से साभार

यह तीनों मंडियां कुछ दूर दूर हैं और इनका विस्तार २९५ एकड़ है. कुछ १००० थोक और २००० चिल्हर व्यापारी यहाँ से अपना व्यवसाय चलाते हैं. प्रति दिन एक लाख से अधिक लोग यहाँ शहर के विभिन्न भागों से पहुंचते हैं. हालाकि फूल मंडी में प्रवेश कर गए परन्तु चारों तरफ के गलियारे का एक चक्कर लगाना कुछ कष्टदायक लगा इसलिए कुछ तस्वीरें खींच  वापस घर लौट आये थे.

पता चला है कि मेट्रो रेल सेवा का अंतिम छोर या टर्मिनल यहीं बन भी रही है अतः स्वाभाविक है कि संपत्ति की दरें आसमान छू   रही हैं.

20 Responses to “विस्तार लेता कोयमबेडू, चेन्नई”

  1. jatdevta Says:

    ये बस अड्डा देखा, वाकई कमाल है कुछ अलग सा है

  2. Bharat Bhushan Says:

    आदरणीय भाई साहब, हमेशा की तरह यह पोस्ट भी रुचिकर है. पढ़कर आनंद आ गया. भव्य बस अड्डा, वृहदाकार सब्ज़ी मंडी, आपत्ति जनक स्थिति में प्रेमी युगल और सब से बढ़ कर आपत्ति जनक स्थिति में प्रशासनिक अधिकारी :)).. बहुत खूब.

  3. ali syed Says:

    प्रणय लीला के ऐसे चित्र खींचना पुरातात्विक सांस्कृतिक विषय वस्तुओं के छायांकन की सीमाओं से बाहर भी समझा जा सकता है 🙂

    हो सकता है वे दोनों भी उनकी , अपनी दुनिया के प्रशासनिक अधिकारी हों🙂

  4. Ratan Singh Shekhawat Says:

    सभी चित्र सुन्दर लगे

  5. Alpana Says:

    ईश्वर से बड़ा कलाकार कोई नहीं .एक नन्हे से जीव पर भी इतनी सुन्दर रंग -बिरंगी चित्रकारी की हुई है.ऐसे ही घास के बीच कहीं उगते बहुत ही नन्हे फ़ूल याद आते हैं ,जिनपर बने सुन्दर चित्र रंगों का संयोजन देखते ही बनता है.
    ….
    चेन्नई के बस अड्डे को देख कर आश्चर्य हुआ और बहुत अच्छा भी लगा.
    फ़ूलों का बाज़ार देख कर साबित होता है कि वहाँ के लोग फ़ूलों के शौक़ीन हैं.

  6. mahendra mishra Says:

    चेन्नई के बारे में फोटो सहित बढ़िया जानकारी दी है ….आभार

  7. Gagan Sharma Says:

    शायद ही ऐसा बस अड़्ड़ा देश भर मे कहीं और हो। साफ सफाई काबिले तारीफ है।

  8. Hindi SMS Says:

    पिछले दिनों चैन्नै में था। विकास और विस्तार दोनों अचम्भित करते हैं। शाम को बहने वाली हवाओं ने मन मोह लिया।

  9. ललित शर्मा Says:

    प्रेमी युगल आपत्तिजनक अवस्था में होने पर भी चेन्नई पुलिस की नजर नहीं पड़ी। वरना हवालात में होते।🙂
    बसअड्डे की बनावट किसी एयर टर्मिनल से कम नहीं है।

    आभार

  10. sanjay Says:

    ’पोस्ट केवल व्यस्कों के लिये’ कैप्शन छूट गया:)

    सरजी, दूसरा प्रेमी युगल सेंसर की लपेट में आ गया क्या?

    बस अड्डा तो वाकई कमाल का है, जैसे आपकी पोस्ट।

  11. arvind mishra Says:

    कोयमबेडू, चेन्नई का सचित्र विवरण अच्छा लगा

  12. Dr.ManojMishra Says:

    आपकी पोस्ट्स मन मोह लेती हैं,आभार.

  13. विष्‍णु बैरागी Says:

    सदैव की तरह जानकारियॉं बढानेवाली रोचक पोस्‍ट। बस अड्डा और मण्‍डी के चित्र मनोहारी हैं। आपके परिश्रम को नमन।

  14. राहुल सिंह Says:

    जैव-विवधिता पर ऐसी दृष्टि, क्‍या कहने. वही ताजगी, वही रस, यहां आने पर जिसकी अपेक्षा होती है.

  15. J C Joshi Says:

    अति सुंदर सचित्र वर्णन!

  16. प्रवीण पाण्डेय Says:

    चित्रों ने ही सब बता दिया।

  17. RAJ SINH Says:

    प् ना सु जी ,
    पहली बार आपकी पोस्ट पर आपत्ति दर्ज करा रहा हूँ .बाकी सब तो टिप्पणिओं में कहा जा चुका है .सबसे सहमत हूँ . लेकिन आप ‘ आपत्तिजनक ‘ को परिभाषित करें .मैंने हर एक एंगल से देखा वह चित्र .मुझे तो कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा . हाँ प्राकृतिक और आनन्दमय ज़रूर लगा . ( मैं सिर्फ अपने आनंद की बात कर रहा हूँ ) .तो आपत्तिजनक क्या था उसमे ? प्रजातियों के ज्ञान के विद्वान् अपने काशी वाशी अरविन्द जी बताएं जज की भूमिका में की वह आपत्तिजनक है या सहज प्रकृति लीला ?

  18. पा.ना. सुब्रमणियन Says:

    @राज सिंह जी:
    आभार. चूंकि आपने प्रश्न किया है इस लिए बता रहा हूँ, हलाकि कोई रेलावेंस नहीं है. सामाजिक मर्यादाओं के विपरीत किया गया आचरण आपत्तिजनक माना जा सकता है. कीट पतंगों की दुनिया ही अलग है अतः उनकी अपनी मर्यादाएं हो सकती हैं. हम दखल देने वाले कौन होते हैं.

  19. incitizen Says:

    पोस्ट हमेशा की तरह ही रुचिकर. सभी फोटो भी बहुत अच्छे हैं. प्रशासनिक अधिकारी मलाई पा ही जाते हैं.
    अभी न तो फेसबुक, न ही औरकुट और न ही अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स कार्य कर रही हैं. क्या यह मुम्बई बम धमाकों के चलते तो नहीं है. यदि ऐसा है तो कृपया बतायें.

  20. रंजना Says:

    खूब बढ़िया सैर करायी आपने…

    आनंद आ गया…

    आभार…

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