हाय मेरा लालू नहीं रहा

आज मन अवसाद से भरा है. कुछ माह पूर्व खुश होकर अपने (मोहल्ले के) लालू (श्वान) पर एक पोस्ट लिखी थी क्योंकि वह अपने लिए एक वधू लेकर आया था. कालांतर में ४ बच्चे भी हुए थे. इस बारिश के मौसम के आरम्भ में न मालूम क्या हुआ, उसकी वधू ने कहीं और रिश्ता बना लिया. कुक्कुरों के लिए यह तो सहज ही माना जाएगा परन्तु उस दिन से हमारा लालू एकाकी हो गया और वियोग में इधर उधर भटकता रहता. दुखी रहने के बावजूद वह लोगों को पहचानता था और दुम हिलाकर पोसिटिव  स्ट्रोक्स भी दिया करता. जब मैं घर के बाहर आता तो वह भी पास आ जाता. हम दोनों में मूक संवाद का दौर चलता क्योंकि हमारी मनःस्थिति  भी कुछ कुछ उससे मिलती जुलती रही. हमने भी तो अपने   जीवन साथी को खो दिया. कुछ मिनटों के संवाद से हमारा मन भी हल्का हो जाता और शायद उसका भी.

परिसर में विभिन्न लोगों के घर के बासी रोटियों पर ही उसकी ज़िन्दगी चल रही थी. न केवल परिसर के प्रति वह पूर्ण निष्ठावान था अपितु परिसर के हर व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से पहचानता भी था. किसी भी अपरिचित के परिसर में घुसने पर वह अपनी अप्रसन्नता प्रकट करते हुए जोर जोर से भौंक कर लोगों को आगाह कर देता, चाहे दिन हो रात.परन्तु उसने कभी भी किसी को काटा  नहीं है. मजाल है कोई दूसरा जानवर अन्दर आ जाए.

आज सुबह १० बजे उसके रोने की आवाज आई. बाहर जाकर देखा तो पता चला कि बगल जो महाशब्दे जी रहते हैं, उनकी कार के नीचे बैठा हुआ था. उन्होंने कार चालू की परन्तु वह नहीं हटा. नीचे उतर कर जब उसे भगाने का प्रयास किया तो और जोर जोर से रोने लगा. गाडी को निकाल पाना मुश्किल था क्योंकि लालू के दबने का खतरा था. लगभग एक घंटे तक की कोशिश के बाद वह कराहते हुए बाहर निकला तो हम लोगों ने पाया कि वह अपने पुट्ठों को उठाने में अक्षम हो गया है. इस लिए कोशिश के बावजूद अपनी जगह से इधर उधर सरक नहीं पा  रहा है. यही बात समझ में आई कि या तो किसी ने उसके पृष्ट भाग पर निर्दयता से प्रहार किया है या फिर कोई गाडी उस पर चढ़ गयी थी. हम लोग कुछ कर नहीं पा  रहे थे और उसकी दयनीय स्थिति देखी भी नहीं जा रही थी.लोग कितने निष्ठुर हो चले हैं. एक बेजुबान के साथ ऐसी निर्दयता.

आज शाम (20-9-2011) जब ऊपर की बालकनी से बाहर झाँका तो हमारा लालू सड़क पर निष्प्राण पड़ा था. कुछ सहृदय लोगोंने उसके शरीर पर कुछ फूल अर्पित किये थे. शायद यही उसकी नियति रही.

श्रद्धांजलि….

19 Responses to “हाय मेरा लालू नहीं रहा”

  1. काजल कुमार Says:

    ओह. निर्दयी लोगों के लिए सब एक हैं चाहे मनुष्य हों या अन्य प्राणी…

  2. अनूप शुक्ल Says:

    दुखद! संवेदनायें।

  3. J C Joshi Says:

    दुःख तो मुझे मेरी हवाई चप्पलों के बाबुलनाथ मंदिर, मुंबई में कुछ वर्ष पहले खो जाने से भी हुआ था… अथवा यह कहिये कि अपस्मरा पुरुष होने के कारण, और एक ही दिन में गणपति, लक्ष्मी, मुम्बा देवी आदि मंदिरों के चक्कर में अधिकतर उन्हें कार में ही छोड़ देने के कारण… किन्तु बाबुलनाथ में मंदिर पार्किंग स्थल से दूर होने, अन्दर लिफ्ट के निकट उन्हें खोलने के कारण गाडी में बैठने के और दूर पहुँच ही याद आया कि मैंने चप्पल वहीं छोड़ दी थी😦

    और जहां तक किसी विशेष प्राणी के साथ लगाव / मोह (विशेषकर कुत्ते के साथ) के कारण दुःख की अनुभूति का प्रश्न है, तो जब हमारा अंग्रेज कुत्ता किम हर श्रृंगार के वृक्ष के सामने साष्टांग प्रणाम कर शरीर का त्याग किया (जब हम बच्चे थे) तो उस दिन हमारे घर में दुःख के कारण खाना भी नहीं बना था😦
    दूसरी ओर ‘कृष्ण’ की इस लीला को देख आश्चर्य भी हुआ… सोचने में मजबूर भी हुए कि ‘हम’ इस अद्भुत दृश्य से कुछ शिक्षा लें!
    कुत्ते को धर्मराज यमराज का दूत माना गया है… तो क्या उसको भूतनाथ शिव के दर्शन हो गए थे???????

  4. Bharat Bhushan Says:

    दुर्घटना सामान्य सी ही क्यों न हो, जिसे भावनात्मक दुख होता है वह केवल सहने वाला जानता है. दुख हुआ. उस पर फूल-पत्ती डालने वालों ने अपने दिल की कोमल बात कह दी.

  5. प्रवीण पाण्डेय Says:

    मानवीय गुणों को आत्मसात करने से श्वानों को हानि ही हुयी है।

  6. राहुल सिंह Says:

  7. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन Says:

    हे राम!

  8. NEERAJ JAT Says:

    अति दुखद

  9. dr manoj mishra Says:

    संवेदनायें.

  10. rajey Says:

    आपने श्‍वान को लालू कहकर उसकी बेइज्‍जती खराब की है…. वो बेचारा श्‍वान तो कभी भी हराम का चारा नहीं खाता था

  11. rajey Says:

    श्‍वान को लालू कहकर उसकी बेइज्‍जती खराब की गई है उसने तो कभी भी हराम का चारा नहीं खाया था ….
    <a href="जुर्म क्या? ये सजा क्यों है?

  12. Indranil Bhattacharjee Says:

    sukh me sab saathi, dukh me na koi …

  13. braj kishor Says:

    शायद इसी लिए कहते हैं कुत्ते की मौत …कष्टों से भरपूर

  14. संजय @ मो सम कौन? Says:

    एक सच्चे दोस्त और नमकहलाल की भूमिका निभाकर आपका लालू अपना रोल पूरा कर गया।
    मार्मिक पोस्ट।

  15. चंदन कुमार मिश्र Says:

    000000000000

  16. sanjay bhaskar Says:

    अति दुखद

  17. sktyagi Says:

    क्रूर नियति…हार्दिक संवेदनाएं. जाने यह पोस्ट हमसे कैसे छूट गयी थी!

  18. Gagan Says:

    अत्यंत दुखद अंत।

  19. विष्‍णु बैरागी Says:

    भिनसारे आपकी यह पोस्‍ट पढी और मन उदास हो गया।

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