सामान्य ज्ञान

आज एक वाकया हो गया. वैसे घर में तो तीन स्नानगृह/शौचालय है, मुझे ऊपर की मंजिल में एकदम बड़े वाले में जाना अच्छा लगता है. एक तसल्ली होती है क्योंकि मुंबई वाले जब यहाँ आते हैं तो उनका कहना होता था कि यह तो हमारे कमरे से बड़ा है. ऊपर से बाथ टब भी है जिसका प्रयोग हमने कभी नहीं किया. पानी कहाँ से लायें. कभी कभार जब परिवार के बच्चे आ जाते थे तो उनके मन बहलाव के लिए बचा बचा कर पहले से टब को भर लिया करते. लगता है हम भटक गए. मामला यह था कि अन्दर घुसने के बाद जब दरवाजे की सिटकिनी बंद करनी चाही तब उसका ढुचू  (नोब) नीचे गिर गयी. उसे उठाकर उसके  लिए बने हुए छेद में लगा तो दिया लेकिन मामला नहीं जमा. वह फिर निकल जाता. मुझे लगा कि अब इसे बदलना ही होगा. वैसे कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि घर   में उस समय मैं अकेला ही था. निवृत्त होने के बाद याद आया कि मेरे पास अरलडाईट है. मैं पुनः उस नोब को अपनी जगह स्थापित कर सकता हूँ. मैंने मिश्रण बनाया और लेप लगाकर नोब को अपनी जगह फिक्स कर दी. शाम को देखता हूँ कि  वह  इस कदर फिक्स हो गया  कि उसे हिलाया ही नहीं जा सकता. पेंचकस का इस्तेमाल कर हमने उसे अनुशाषित किया. देखते हैं कब तक चलता है.

जब बाथ रूम की बात चली तो मुझे याद आया कि यह तो कुछ भी नहीं है. एक भाई साहब के घर रुकना  हुआ था. कमरे से  लगा हुआ बाथ रूम   भी था परन्तु मुझे आगाह कर दिया गया कि गरम पानी चाहिए तो दूसरे बाथ रूम में जाएँ. हमने देखा था उस बाथ रूम में भी गीसर लगा है. हमने पूछा समस्या क्या है तो बताया गया कि उसे ऑन करने पर शाक मारता   है और नोब को खोलें तो पानी टपकता है. साधारणतया मेरी आदत रही है कि जब भी किसी के घर जाकर रहूँ तो प्रतिफल  स्वरुप अपनी भी  कुछ  सेवायें उन्हें दे जाऊं जिससे  आत्मीयता बनी रहे. मैंने समस्या को समझने की कोशिश की और शीघ्र ही बात समझ में आ गई. वैसे मैं कला पक्ष का ही रहा हूँ और तकनीकी  शिक्षा से वंचित ही रहा.
उस गीसर को समानांतर लगाना था. चित्रों को देख कर ही समझ सकते हैं. क्या ऐसी बातों के लिए कोई अतिरिक्त तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता है. कभी कभी लगता है हम समझना ही नहीं चाहते.

16 Responses to “सामान्य ज्ञान”

  1. राहुल सिंह Says:

    लेखी पर भरोसा करने की आदत नहीं होती आमतौर पर.

  2. विष्‍णु बैरागी Says:

    बिलकुल सच कहा आपने।

  3. Smart Indian - अनुराग शर्मा Says:

    निर्देश यदि मिस्त्री/प्लमर की भाषा/लिपि में लिखा होता या सचित्र होता तो ऐसी ग़लती की सम्भावना न्यूनतम रहती।

  4. arvind mishra Says:

    परोपकारी🙂

  5. अनूप शुक्ल Says:

    रोचक पोस्ट!

  6. Bhushan Says:

    कला पक्ष की ओर आने में काफी दिन लगा दिए हैं :))

  7. अली सैयद Says:

    सहज बोध इस दुनिया से उठ गया है क्या🙂

  8. प्रसन्नवदन चतुर्वेदी Says:

    सुन्दर प्रस्तुति…बहुत बहुत बधाई…

  9. अजय कुमार झा Says:

    101….सुपर फ़ास्ट महाबुलेटिन एक्सप्रेस ..राईट टाईम पर आ रही है
    एक डिब्बा आपका भी है देख सकते हैं इस टिप्पणी को क्लिक करें

  10. My Unfinished Life (@MyUnfinishedlyf) Says:

    happens🙂

    http://sushmita-smile.blogspot.in

  11. Puja Upadhyay Says:

    🙂 कभी कभी छोटी छोटी चीज़ों पर ध्यान नहीं जाता लोगों का. मैं इस सिलसिले में वायरिंग में अक्सर लोगों की ये परेशानी देखती हूँ…किसी भी तरह वायर को प्लग करने की कोशिश कर रहे हैं…चाहे स्पीकर अटैच करने हों…hdmi केबल से लैपटॉप जोड़ना हो कि कैमरा या हैंडीकैम. फोन के चार्जर भी दो तरह के होते हैं…छोटी यूएसबी पिन वाले ऑर बड़ी पिन वाले…अब इधर का उधर करेंगे तो गडबड तो होगी ही. हड़बड़ी में अक्सर लोग डीटेल्स पर ध्यान नहीं देते ऑर दिक्कत हो जाती है.
    कला या विज्ञान नहीं…कॉमन सेन्स की कमी का नतीजा है ऐसी चीज़ें🙂🙂

  12. Asha Joglekar Says:

    कभी कभी छोटी बातों पर ध्यान ना देने से बडी समस्या बन जाती है । रोचक पोस्ट ।

  13. AlpanaAlpana Says:

    आप ने सही कहा.. छोटी छोटी बातों पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते..खासकर किसी भी सामान के साथ आये निर्देश पत्रों को अमूमन कोई पढता ही नहीं देखा .
    यहाँ तक कि हम नेट से सॉफ्टवेर डाउनलोड करते समय भी निर्देश पढ़े बिना आई अग्री ”’क्लिक करते हैं..बाद में मुश्किलें आती हैं तब मालूम होता है गडबड कहाँ हुई..

  14. ghughutibasuti Says:

    हो सकता है कि व्यक्ति को पता ही न हो कि horizontal क्या होता है और horizontal wall mounting क्या। अनुराग शर्मा से सहमत और उन्होंने अपना नाम भी सही रखा है, स्मार्ट इन्डियन।
    घुघूती बासूती

  15. सुज्ञ Says:

    यह है भाषा का अज्ञान
    हुआ यह यंत्र शीर्षासन

  16. सतीश सक्सेना Says:

    आपकी यह पोस्ट काम की हैं भाई जी….

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