जामिया मस्ज़िद (श्रीनगर)

हजरतबल देख लेने के बाद हसरत हुई कि वहां के जामिया मस्ज़िद को भी देख लिया जाए. हमारे ड्राईवर साहब कुछ उहापोह में थे. उन्होंने कहा कि वह इलाका पुराने शहर के बीचों  बीच है और सबसे खतरनाक है. कभी भी कुछ भी हो सकता है. फिर कुछ सोच कर कहा “चलिए आज तो जुमेरात (ब्रिहस्पतवार) है, देख लेते हैं”.  (इस पोस्ट के लिखे जाने तक श्रीनगर से  खबर आई कि  कश्मीर में सूफी इस्लाम और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की प्रतीक दस्तगीर साहिब की लगभग 300 साल पुरानी जियारतगाह सोमवार सुबह रहस्यमय परिस्थितियों में लगी आग से जलकर खाक हो गई। आग के बाद भड़की हिंसा के चलते पूरे कश्मीर में अघोषित क‌र्फ्यू लगा है. हिंसा भड़क उठी है, यह दरगाह खानयार  इलाके में है. अभी २९ जून को जामिया मस्ज़िद में जुम्मे की नमाज़ पर पाबन्दी लगा दी गयी है. निश्चित ही इन घटनाओं में मुझे  किसी षडयंत्र की बू आ रही है) पुराने शहर के अन्दर से गाडी आगे बढती गयी. कम आबादी वाले क्षेत्र से घनी और चहल पहल   भरे इलाके की  ओर  जा रहे थे.

रास्ते में वहां के माकानों को देख कर अच्छा लग रहा था. यहाँ के घरों/इमारतों  में खिड़कियाँ बहुत होती हैं.  चलती गाडी से दो चार तस्वीरें भी ले लीं. कुछ चलने के बाद हमें  चर्चनुमा ईमारत का शीर्ष दिख रहा था. पूछने पर ड्राईवर साहब  ने बताया “यहाँ चर्च केवल एक ही है. जो दूर से दिख रहा है, वही जामिया मस्ज़िद है.

मुख्य  मार्ग को पार कर एक ढलान के बाद ही पूरा मस्जिद दिखाई पड़ता है. वहां की सतह कुछ नीचे है. मस्जिद के दक्षिणी भाग में भव्य  मुख्य द्वार है. सामने ही क्या चारों तरफ एक काफी चौड़ी गली है और एक तरफ  कतार से दूकाने हैं. घर गृहस्ती की सभी वस्तुवें उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं. मस्जिद का स्थापत्य कुछ अनूठा है. न तो गुम्बद है न ही मीनारें. पूरे कश्मीर में मस्जिदों की बनावट कुछ ऐसी ही है. मुख्य द्वार से अन्दर प्रवेश किया तो देखा कि अन्दर के साफ़ सुथरे आंगन में सुन्दर बागीचा बना है. मस्जिद में प्रवेश के लिए उत्तर, दक्षिण और पूरब से कुल  तीन द्वार हैं. पश्चिम तरफ जियारत का मुख्य भाग है जहाँ मिहराब बना है. उसी के सामने  वज़ू के लिए एक  चौकोर हौज है. जमात की समय सारिणी के लिए अन्दर LED  का फलक लगा है. मिहराब वाले हिस्से और तीनों द्वारों को समेटे एक विशाल गलियारा है और पूरी फर्श गलीचों  से ढंकी है.

ज़ामिया  मस्जिद, श्रीनगर  के नौहता इलाके में है. इसे सुलतान सिकंदर ने सन १४०० में बनवाया था. उसके पुत्र जैन-उल-अबिदीन ने इसका विस्तार किया. इसके स्थापत्य को इंडो सारसेनिक कहा गया है जो गोथिक, मुग़ल तथा भातीय शैली का मिला जुला स्वरुप है. बनाने के लिए पक्के ईंटों का प्रयोग किया है और लकड़ी की सीलिंग  है उसके ऊपर टिन के चादरों की छत है. ऊंची छत  को थामे रखने के लिए देवदार से बने बहुत ही ऊंचे ३७० खम्बे हैं जो पहली नज़र में पत्थर के से लगते हैं. मस्जिद के छत के नीचे ही कुल ३३,३३३ लोग एक साथ नमाज़ अदा कर सकते हैं. इस मस्जिद को  भी कम से कम तीन बार आग ने अपने लपेटे में लिया था परन्तु हर बार पुनरुद्धार किया जाता रहा. इस सिलसिले में महाराजा प्रताप सिंह की भूमिका उल्लेखनीय रही है. उन्होंने पूरे उत्साह से नव निर्माण के लिए आवश्यक धन सुलभ कराया था.

भारत में देखे गए सभी मस्जिदों में यह सबसे सुन्दर और अनूठी सी लगी.

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16 Responses to “जामिया मस्ज़िद (श्रीनगर)”

  1. udantashtari Says:

    शायद यूँ तो जाना अब न ही हो पाये आम तौर पर…किन्तु आपका आभार है कि आपने इस माध्यम घुमवा दिया…कुछ अहसास तो गये ही….

  2. सतीश सक्सेना Says:

    कश्मीर के दुर्लभ द्रश्य दिखाने के लिए आपका आभार !

  3. विष्‍णु बैरागी Says:

    यह पोस्‍ट तो केवल पोस्‍ट से आगे बढकर जामिया मस्जिद की सैर है।

  4. arvind mishra Says:

    गोथिक, मुग़ल तथा भातीय शैली का मिला जुला स्वरुप -ओह तभी आप जान पर खेल कर देखने को उतारू थे -भव्य तो लग ही रही है !

  5. सुज्ञ Says:

    ओह इन चित्रों को देखकर, इसे साक्षात देख न पाने का दुख साल रहा है। जब भ्रमण में गए थे तो इसे न देख पाए।

  6. Bhushan Says:

    जो हम नहीं देख पाए वह आपने दिखा दिया. आपका बहुत-बहुत आभार.

  7. राहुल सिंह Says:

    चित्रों से तस्‍दीक हो रही बात.

  8. अली सैयद Says:

    टीन की छतें ? रास्ते पर खड़ी गाड़ियां ? गरीबी और अमीरी एक साथ , ट्रेफिक /कार पार्किंग के हालात टिपिकल इंडो स्थापत्य वाले 🙂

    मस्जिद के अन्दर लकड़ी के खम्बों पर जड़े हुए स्पीकर्स, सामने रखा हुआ माइक, फर्श की बेढब / बेतरतीब डिजाइन पुराने पे नये की जबरिया घुसपैठ सा लगा ! मेरा मतलब इंडो सारसेनिक स्थापत्य को बिगाड़ते हुए पैचवर्क 😦

  9. S K TYAGI Says:

    वाह, वाह बहुत खूब…आलेख भी , तस्वीरें भी और यायावरी का जज़्बा भी!!

  10. Alpana Says:

    Wakayee badi hi anuuthi lagi yeh masjid.

  11. bettyl Says:

    Nice virtual tour! I love the older buildings.

  12. ramakant singh Says:

    sajade men sir jhukata hun . salam un bandon ko jinhone is jagah ko aaj tak salaamat rakha hai.

  13. प्रवीण पाण्डेय Says:

    स्थापत्य ने प्रभावित किया है..

  14. yashodadigvijay4 Says:

    शनिवार 21/07/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

  15. Gagan Sharma Says:

    आपकी सजीव तस्वीरें सदा बोल कर सारी बात बतलाती हैं। आभार।

  16. indiasmart Says:

    ग़र फ़िरदौस ज़मीनस्त …

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