शासकीय संग्रहालय, चेन्नै

एक  दिन अपने भतीजे के साथ एगमोर स्टेशन जाना हुआ था, किसी रिश्तेदार को छोड़ने. वापसी में पेड़ों के झुरमुट में एक लाल रंग की इमारत  दिखाई  पडी जो फ़तेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे की अनुकृति जैसे लगी. हमने ड्राइवर महोदय से पूछा कि वहां जाने का रास्ता किधर से है. उसने बताया कि वह् तो म्यूज़ियम  के अन्दर है.  हमने सीधे म्यूज़ियम  ही चलने के लिए कहा और थोड़ी सी  दूरी तय करते ही उसके दरवाजे पर थे.   दिन के ग्यारह  बज रहे थे. हमें मालूम था कि एक बार अन्दर घुस जाने पर म्यूज़ियम  बंद होने के पूर्व निकल नहीं पायेंगे इसलिए उदर पूर्ति का जुगाड किया गया.  मुख्य सड़क को पार कर फ्लाईओवर  के दूसरी तरफ़ खान पान की व्यवस्था दिखी सो उसी तरफ़ बढ़ लिए.  पेट पूजा के बाद सीधे म्यूज़ियम  प्रवेश के लिए टिकट खरीदे गए (बडों केलिए 15 और बच्चों के लिए 10 रुपये की दर और प्रति केमरा  के 200 अतिरिक्त) और अन्दर घुस लिए.  अन्दर का इलाका काफी फैला हुआ था. सबसे पहले तो हमलोग उस उल्लेखित  भवन को देखने बायीं तरफ़ बढ़ गए.

IMG_2012

इण्डो सरासेनिक  शैली में लाल बलुवे पत्थर से बना यह भव्य भवन विक्टोरिया मेमोरियल हाल कहलाता है जिसका निर्माण सन् 1906 में प्रारंभ हुआ था और 1909  तक तैय्यार हो गया.  भवन की सुंदरता को कुछ देर तक निहारते रहे तभी देखा कि दरवाजे पर ताला जड़ा था तथा सील किया हुआ था. वहाँ लटकी सूचना पट से मालूम हुआ कि अन्दर जाना संभव नहीं है. यह भी लिखा था कि कोई भी इस भवन के ईर्द गिर्द भी जानें की जुर्रत ना करे.  भवन क्षतिग्रस्त है. पता चला कि अन्दर कुछ दरारें पड़  गयीं हैं और पिछले 10  सालों से ताला लटका हुआ है. इसी के अन्दर नेशनल आर्ट गैलरी स्थित है जहाँ अलग अलग दीर्घाओं  में  भारत भर से एकत्र किए गए विभिन्न शैलियों की बहुमूल्य कलाकृतियाँ हैं. पता चला कि इस भवन की मरम्मत हो रही है और केंद्र शासन से अनुदान प्राप्त होने का कोई चक्कर है. (अभी अभी अखबारों से पता चला है कि तामिलनाडू के मुख्य मंत्री ने ११ करोड रुपये स्वीकृत किये जाने की घोषणा की है)

The Museum Theatre and Connemara Library complex.

1905

IMG_1702

जहाँ यह संग्रहालय स्थित है, पेंथिओन परिसर (कॉम्प्लेक्स) कहलाता है और सामने की सड़क भी पेंथिओन रोड़ ही कहलाती है. पेंथिओन का शब्दार्थ जानने की कोशिश की तो एक अर्थ मिला “सर्व देव मन्दिर” – यह बड़ा माकूल लगा. इसी नाम से एक अति प्राचीन मन्दिर रोम में है. मुख्य भवन के सामने अर्धचंद्राकार हिस्से की स्थापत्य शैली भी कुछ कुछ इतालवी है.  इसके अन्दर थियेटर है जहाँ अँगरेजों के जमाने में नाटकों का मंचन होता था. आजकल संग्रहालय के स्वयम्‌ के कार्यशालाओं, सभाओं आदि का आयोजन होता है और यदा कदा कुछ महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए भी  उपलब्ध कराया जाता है.  पूरा परिसर 16.25 एकड़ के भूभाग में फैला हुआ है. कुल छह स्वतंत्र भवन हैं और 46 दीर्घाएं जहाँ पुरा सामग्री प्रदर्शित है. कोलकाता के बाद भारत का यह  दूसरा सबसे पुराना संग्रहालय है. दक्षिण एशिया के सबसे बडे संग्रहालयों में इसका स्थान आता है.   मूलतः संग्रहालय 1851 में किसी और जगह प्रारंभ किया गया था और 1854 में इस परिसर में स्थानांतरित हुआ. प्रारंभ में यहीं चिड़िया घर, मछलीघर आदि भी थे. उससे पहले इसी परिसर में कलेक्टोरेट भी हुआ करता था.  परिसर में ही 1890 में स्थापित कोन्नेमारा सार्वजनिक वाचनालय भी है. भारत के चार डिपॉजिटरी वाचनालयो में से यह एक है. यहाँ भारत में प्रकाशित होने वाले हर एक पत्रिका की एक प्रति भिजवाई  जाती है. इसी वाचनालय में जग प्रसिद्ध गणितज्ञ  स्वर्गीय रमानुजम अध्ययन किया करते थे.

IMG_1697

विक्टोरिया मेमोरियल हाल से मायूस होकर संग्रहालय की ओर बढ़ चले. अर्धचंद्राकार हिस्से के दोनों तरफ़ कई तोप करीने से रखे थे जिसे अँगरेजों ने विभिन्न युद्धों में हतियाया था. एक तोप टीपू सुल्तान का भी दिखा.

अलग अलग दीर्घाओं में जाने के लिए यथोचित्‌ दिशा सूचक उपलब्ध थे. सबसे पहले पाषाण  शिल्पों की गैलरी  देखना हुआ. यहाँ अमरावती (बौद्ध) उत्खनन से प्राप्त पुरा  वस्तुओं का एक अलग हाल है परन्तु वहाँ कुछ नवीनीकरण हो रहा था.

IMG_1699

IMG_1700

IMG_1708

IMG_1707

IMG_1710

IMG_1711

IMG_1706

IMG_1722

तत्पश्चात कांस्य मूर्तियों की दीर्घा का अवलोकन किया इस दीर्घा में 9 वीं से 12 वीं सदी की अनमोल कांस्य प्रतिमाओं को बडे ही करीने से प्रदर्शित किया गया है और हम मंत्र मुग्ध सा देखते ही रहे.

Gallery

IMG_1738

IMG_1729

IMG_1731

IMG_1762

IMG_1746

IMG_1747

IMG_1743

IMG_1771

शाम हो रही थी और संग्रहालय के कर्मी, लोगों को भगाने का उपक्रम करने लगे. दीर्घाएं तो बहुत सारी  थीं  इस लिए जो नजदीक दिखा वहीं घुस गए. जैसे प्राणी जगत्, भूगर्भीय संपदा , मुद्रा, डाक टिकट आदि के. उन सबको केवल सतही तौर से ही देख् सके थे. एक प्रकार से कबड्डी में पाली छूने का प्रयास और बाहर आना हुआ था. भवन के बाहर भी खुले आसमान के नीचे कुछ मूर्तियाँ रखी  थीं जो काफी सुंदर लगीं. परिसर के पीछे से होते हुए बाहर आ गए. पीछे इंग्लैंड के राजा रानियों  की प्रतिमाएं,  जो शहर के विभिन्न हिस्सों में कभी शोभायमान रहीं, रक्खीं हुई हैं.

IMG_1723

???????????????????????????????

मन्दिर के गर्भगृह से जाल निकासी के लिए बनी नाली का अन्तिम छोर है

परिसर में ही एक विशाल बाल संग्रहालय भी है और कहते हैं कि वहां प्रदर्शित वस्तुयें बाल मन को लुभाने के लिए अत्यंत प्रभावी हैं. कभी और फुर्सत से  आने का निश्चय करते हुए  वापस लौट आये. न जाने कब जाना होगा क्योंकि  जब फुर्सत होती है तो वाहन उपलब्ध नहीं रहता और जब वाहन मिल रही हो तो फुर्सत नहीं होती .

19 Responses to “शासकीय संग्रहालय, चेन्नै”

  1. ताऊ रामपुरिया Says:

    यह तो बहुत शानदार संग्रहालय है, अब तक इसके बारे में जाना नजीं था, अब अगस्त में बंगलौर चेन्नई जा रहे हैं तब इसे देखना नही भूलेंगे. बहुत सारगर्भित जानकारी मिली, आभार.

    रामराम.

  2. arvind mishra Says:

    अमूल्य रत्न निकाल लाये हैं आप वहां से !

  3. अली सैयद Says:

    आपका जबाब नहीं !

  4. प्रवीण पाण्डेय Says:

    यहाँ तो पूरी की पूरी सभ्यता की कहानी लिखी है।

  5. guddodadi Says:

    सुंदर छायांकन वा विस्तृत लेख
    धन्यवाद
    शिकागो से

  6. sanjay @ mo sam kaun Says:

    विवरण पढ़कर देखने का मन हो आया है, अवश्य जायेंगे।

  7. Swapna Manjusha Says:

    bahut shaandaar vivran.
    kabhi zindagi ne mauka diya to avashy dekhenege ye jagah bhi.
    aapka dhanywaad .

  8. विष्णु बैरागी Says:

    बहुत ही शानदार।

  9. vivek Says:

    bahut sundar

  10. राहुल सिंह Says:

    चेन्‍नई प्रवास के दौरान मेरा यह प्रिय स्‍थान था, फिर तस्‍वीरें देख कर आनंद आया.

  11. बी एस पाबला Says:

    शानदार संग्रहालय

  12. हिमांशु Says:

    चेन्नई चलें तो यहाँ जरूर चलेंगे। बेहतरीन।

  13. s k tyagi Says:

    vaah….bahut khoob hai vivran bhi aur photo bhi!!

  14. Alpana Says:

    एक बार पहले इस जगह के बारे में नेट पर पढ़ा था लेकिन इतने विस्तार से जानकारी आप के इस लेख से मिली.
    मूर्तियों आदि के चित्रों की क्वालिटी बड़ी अच्छी है.चेन्नई एक बार गए थे लेकिन समय की कमी के कारण सभी जगह नहीं देख सके.
    संग्रहालय के लिए तो रूचि और काफी फुर्सत होनी चाहिए.उम्मीद है कि बाल संग्रहालय भी आप का घूमना जल्द हो .

  15. Bharat Bhushan Says:

    नीचे से तीसरा चित्र सिखी के प्रतीक ‘खांडे’ से काफी मिलता जुलता है. आपका आभार.

  16. Bharat Bhushan Says:

    नीचे से तीसरा चित्र सिखी के प्रतीक ‘खांडे’ से काफी मिलता जुलता है. आपका आभार.

  17. समीर लाल Says:

    आभार जानकारी का…कभी उस तरफ निकले तो जरुर देखेंगे मगर अभी तो आपकी नजरों से देख लिया…

  18. आशा जोगळेकर Says:

    आप कितने भ्रमणप्रिय हैं और इसका फायदा हम भी उठा रहे हैं बहुत सुंदर संग्रहालय और कितनी सुंदर मूर्तियां ।

  19. शासकीय संग्रहालय चेन्नै: दैनिक भास्कर में 'मल्हार' - Blogs In Media Says:

    […] स्तंभ ‘ब्लॉग की दुनिया’ में मल्हार […]

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: